2026 में ईरान युद्ध, होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी, उर्वरक कीमतों में भारी बढ़ोतरी और सुपर एल नीनो का संगम एक भीषण वैश्विक खाद्य संकट उत्पन्न कर रहा है। सितंबर 2026 तक कम से कम 14 15 करोड़ लोगों को तुरंत खाद्य सहायता की जरूरत होगी, जबकि व्यापक अनुमान बताते हैं कि गंभीर भूख का शिकार लोगों की संख्या 31.8 करोड़ है – ज...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What converging crises are threatening food access for over 100 million people, and how do the Iran war and El Niño interact to create this. Article summary: A convergence of the 2026 Iran war (and its Strait of Hormuz blockade), a severe fertilizer price spike, and a "super" El Niño event is driving a global food crisis. At least **140–150 million people** are projected to n. Topic tags: general, news, general web, user generated, government. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "# From war to weather: A 'super El Niño' event poses fresh risks to global food costs. * Meteorologists say an unusually powerful El Niño could take shape later this year, exacerba" source context "Iran war: Why a super El Niño event poses fresh risks to food costs" Reference image 2: visual subj
ईरान में 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए अमेरिकी-नेतृत्व वाले सैन्य संघर्ष, उर्वरक की कीमतों में आई तूफानी बढ़ोतरी और 'सुपर' एल नीनो मौसम चक्र के एक साथ मिलने से वैश्विक खाद्य व्यवस्था चरमराने लगी है। अनुमान है कि सितंबर 2026 तक 14 से 15 करोड़ लोगों को तुरंत खाद्य सहायता की जरूरत होगी, जबकि व्यापक आंकड़ों के अनुसार 31.8 करोड़ (महामारी-पूर्व से दोगुने) लोग गंभीर भूख की चपेट में हैं ।
सबसे खतरनाक पहलू यह है कि ये झटके अकेले नहीं आ रहे, बल्कि एक-दूसरे को और भयावह बना रहे हैं।
ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमले के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य - जो दुनिया के 20 से 25 प्रतिशत समुद्री उर्वरक व्यापार का रास्ता है - से व्यावसायिक जहाजों का आना-जाना लगभग पूरी तरह बंद हो गया ।
हालाँकि 27 मार्च को ईरान ने मानवीय और सीमित उर्वरक जहाजों को गुजरने की अनुमति देने पर सहमति जताई, लेकिन वैश्विक बाजार अभी भी बुरी तरह से प्रभावित हैं और यूरिया की कीमतें फरवरी के 400-490 डॉलर प्रति मीट्रिक टन की तुलना में 700 डॉलर के आसपास पहुँच गई हैं ।
इस बार का आर्थिक और जलवायु संकट एक साथ कृषि क्षेत्र पर दोहरी मार कर रहा है।
विश्व बैंक के मई 2026 के अपडेट में बताया गया कि अकेले उर्वरक के झटके से कृषि मूल्य सूचकांक में 8% का इजाफा हुआ और जलडमरूमध्य में रुकावट जारी रही तो अनाज व खाद्य तेलों में कैस्केडिंग मूल्यवृद्धि हो सकती है ।
सीधे शब्दों में कहें तो, होर्मुज की नाकाबंदी ने सबसे बुरे समय पर वैश्विक उर्वरक आपूर्ति की नलियाँ काट दीं, जिससे उत्पादन लागत एक महीने में लगभग 50% तक बढ़ गई। यह एक शक्तिशाली एल नीनो के साथ मेल खा रहा है, जो पहले से ही दुनिया के सबसे कमजोर इलाकों में वर्षा-सिंचित कृषि को बाधित कर रहा है। ये दो झटके एक-दूसरे को मजबूत कर रहे हैं – ऊँची उर्वरक कीमतें उपज घटाती हैं और एल नीनो उन्हीं अन्न भंडार क्षेत्रों में उत्पादन गिराता है – जिससे एक मूल्य-सर्पिल तैयार होता है जो करोड़ों लोगों को भीषण भूख की ओर धकेल रहा है।
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2026 में ईरान युद्ध, होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी, उर्वरक कीमतों में भारी बढ़ोतरी और सुपर एल नीनो का संगम एक भीषण वैश्विक खाद्य संकट उत्पन्न कर रहा है।
2026 में ईरान युद्ध, होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी, उर्वरक कीमतों में भारी बढ़ोतरी और सुपर एल नीनो का संगम एक भीषण वैश्विक खाद्य संकट उत्पन्न कर रहा है। सितंबर 2026 तक कम से कम 14 15 करोड़ लोगों को तुरंत खाद्य सहायता की जरूरत होगी, जबकि व्यापक अनुमान बताते हैं कि गंभीर भूख का शिकार लोगों की संख्या 31.8 करोड़ है – जो महामारी से पहले के स्तर से दोगुनी है [1][4][9]।
होर्मुज की नाकाबंदी ने दुनिया के लगभग 20 25% समुद्री उर्वरक व्यापार को ठप कर दिया, जिसके चलते यूरिया की कीमतों में एक महीने में 46% का उछाल आया [2][4][7]।