24,000 परमाणुओं के 'मिनी-ब्रह्मांड' ने कैसे दिखाया कि समय एंट्रॉपी से उभर सकता है
24,000 अतिशीत रुबिडियम परमाणुओं के एक टेबलटॉप प्रयोग ने एक ऐसा 'मिनी ब्रह्मांड' बनाया, जहां समय प्रेक्षित और छिपे हुए क्षेत्रों के बीच एंट्रॉपी के आदान प्रदान से उभरता है, और कोई बाहरी घड़ी न होने के बावजूद एक ही दिशा... 'फिजिकल रिव्यू रिसर्च' में प्रकाशित यह कार्य क्वांटम गुरुत्वाकर्षण में 'समय की समस्या' और संबंधप...
प्रकाशितकर्ताDeepSeek-V4-Pro से संपादितGPT Image 1.5 से चित्र बनाए गए
24,000 अतिशीत रुबिडियम परमाणुओं के एक टेबलटॉप प्रयोग ने एक ऐसा 'मिनी ब्रह्मांड' बनाया, जहां समय प्रेक्षित और छिपे हुए क्षेत्रों के बीच एंट्रॉपी के आदान प्रदान से उभरता है, और कोई बाहरी घड़ी न होने के बावजूद एक ही दिशा...
'फिजिकल रिव्यू रिसर्च' में प्रकाशित यह कार्य क्वांटम गुरुत्वाकर्षण में 'समय की समस्या' और संबंधपरक समय ढांचों का पहला नियंत्रित प्रयोगशाला परीक्षण प्रदान करता है।
जब परमाणुओं का प्रेक्षित और अप्रेक्षित क्षेत्रों के बीच आवागमन रुक गया, तो एंट्रॉपी का लेन देन थम गया और समय प्रभावी रूप से रुक गया, जो वास्तविक ब्रह्मांड की सैद्धांतिक 'हीट डेथ' को प्रतिबिंबित करता है।
What experimental evidence did Professor Giovanni Barontini and his team at the University of Birmingham produce by cooling roughly 24,000 rA conceptual illustration of the quantum 'mini-universe' where time emerges not from a clock, but from entropy exchange between ultracold atoms.
AI संकेत
Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What experimental evidence did Professor Giovanni Barontini and his team at the University of Birmingham produce by cooling roughly 24,000 r. Article summary: Professor Giovanni Barontini and his team at the University of Birmingham built a "mini-universe" by cooling a Bose-Einstein condensate of roughly 24,000 rubidium-87 atoms to just a few billionths of a degree above absol. Topic tags: general, education, academic, general web, government. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "## Recommended pages. # Professor Giovanni Barontini. School of Physics and Astronomy. ## Contact details. Giovanni is an experimentalist whose activities spread over a diverse ran" source context "Professor Giovanni Barontini - School of Physics and Astronomy - University of Birmingham" Referenc
openai.com
प्रोफ़ेसर जियोवानी बारोंटिनी और बर्मिंघम विश्वविद्यालय की उनकी टीम ने एक टेबलटॉप "मिनी-ब्रह्मांड" का निर्माण किया है, जो भौतिकी के सबसे गहरे प्रश्नों में से एक का आश्चर्यजनक उत्तर प्रस्तुत करता है: समय है क्या? लगभग 24,000 रुबिडियम-87 परमाणुओं को परम शून्य (–273.15 डिग्री सेल्सियस) से कुछ ही अंश ऊपर ठंडा करके एक बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट बनाया गया, और फिर इस बादल को एक पतली लेज़र दीवार से विभाजित कर दो भागों में बांटा गया—एक चमकीला (प्रेक्षित) क्षेत्र और एक अंधेरा (छिपा हुआ) क्षेत्र। फिजिकल रिव्यू रिसर्च में प्रकाशित इस प्रयोग ने पहला नियंत्रित प्रयोगशाला साक्ष्य प्रदान किया कि समय की एक सुसंगत दिशा (समय का तीर) किसी भी बाहरी घड़ी के बिना, पूरी तरह से अलग-थलग प्रणाली के भीतर उसके हिस्सों के बीच एंट्रॉपी के आदान-प्रदान से उभर सकती है।
प्रायोगिक व्यवस्था: एक सीलबंद क्वांटम ब्रह्मांड
यह प्रयोग क्वांटम गुरुत्वाकर्षण की एक पुरानी सैद्धांतिक पहेली, जिसे "समय की समस्या" (Problem of Time) कहा जाता है, से सीधे टकराता है। व्हीलर–डेविट (Wheeler–DeWitt) ढांचे में—जो क्वांटम यांत्रिकी और सामान्य सापेक्षता को जोड़ने का एक प्रामाणिक तरीका है—पूरे ब्रह्मांड का वर्णन एक ऐसे समीकरण से किया जाता है, जो स्वयं समय पर निर्भर नहीं करता। इसका अर्थ यह है कि ब्रह्मांड की कोई अंतर्निहित बाहरी घड़ी नहीं हो सकती। अगर समय वास्तविक है, तो माना जाता है कि उसे संबंधपरक (रिलेशनल) तरीके से, प्रणाली के भीतर से ही उभरना होगा। बारोंटिनी की टीम ने इसी अवधारणा का भौतिक परीक्षण करने का बीड़ा उठाया।
Studio Global AI
अपना शोध जारी रखें
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
"24,000 परमाणुओं के 'मिनी-ब्रह्मांड' ने कैसे दिखाया कि समय एंट्रॉपी से उभर सकता है" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
24,000 अतिशीत रुबिडियम परमाणुओं के एक टेबलटॉप प्रयोग ने एक ऐसा 'मिनी ब्रह्मांड' बनाया, जहां समय प्रेक्षित और छिपे हुए क्षेत्रों के बीच एंट्रॉपी के आदान प्रदान से उभरता है, और कोई बाहरी घड़ी न होने के बावजूद एक ही दिशा...
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
24,000 अतिशीत रुबिडियम परमाणुओं के एक टेबलटॉप प्रयोग ने एक ऐसा 'मिनी ब्रह्मांड' बनाया, जहां समय प्रेक्षित और छिपे हुए क्षेत्रों के बीच एंट्रॉपी के आदान प्रदान से उभरता है, और कोई बाहरी घड़ी न होने के बावजूद एक ही दिशा... 'फिजिकल रिव्यू रिसर्च' में प्रकाशित यह कार्य क्वांटम गुरुत्वाकर्षण में 'समय की समस्या' और संबंधपरक समय ढांचों का पहला नियंत्रित प्रयोगशाला परीक्षण प्रदान करता है।
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
जब परमाणुओं का प्रेक्षित और अप्रेक्षित क्षेत्रों के बीच आवागमन रुक गया, तो एंट्रॉपी का लेन देन थम गया और समय प्रभावी रूप से रुक गया, जो वास्तविक ब्रह्मांड की सैद्धांतिक 'हीट डेथ' को प्रतिबिंबित करता है।
24,000 परमाणुओं के 'मिनी-ब्रह्मांड' ने कैसे दिखाया कि समय एंट्रॉपी से उभर सकता है
24,000 अतिशीत रुबिडियम परमाणुओं के एक टेबलटॉप प्रयोग ने एक ऐसा 'मिनी ब्रह्मांड' बनाया, जहां समय प्रेक्षित और छिपे हुए क्षेत्रों के बीच एंट्रॉपी के आदान प्रदान से उभरता है, और कोई बाहरी घड़ी न होने के बावजूद एक ही दिशा... 'फिजिकल रिव्यू रिसर्च' में प्रकाशित यह कार्य क्वांटम गुरुत्वाकर्षण में 'समय की समस्या' और संबंधप...
प्रकाशितकर्ताDeepSeek-V4-Pro से संपादितGPT Image 1.5 से चित्र बनाए गए
24,000 अतिशीत रुबिडियम परमाणुओं के एक टेबलटॉप प्रयोग ने एक ऐसा 'मिनी ब्रह्मांड' बनाया, जहां समय प्रेक्षित और छिपे हुए क्षेत्रों के बीच एंट्रॉपी के आदान प्रदान से उभरता है, और कोई बाहरी घड़ी न होने के बावजूद एक ही दिशा...
'फिजिकल रिव्यू रिसर्च' में प्रकाशित यह कार्य क्वांटम गुरुत्वाकर्षण में 'समय की समस्या' और संबंधपरक समय ढांचों का पहला नियंत्रित प्रयोगशाला परीक्षण प्रदान करता है।
जब परमाणुओं का प्रेक्षित और अप्रेक्षित क्षेत्रों के बीच आवागमन रुक गया, तो एंट्रॉपी का लेन देन थम गया और समय प्रभावी रूप से रुक गया, जो वास्तविक ब्रह्मांड की सैद्धांतिक 'हीट डेथ' को प्रतिबिंबित करता है।
What experimental evidence did Professor Giovanni Barontini and his team at the University of Birmingham produce by cooling roughly 24,000 rA conceptual illustration of the quantum 'mini-universe' where time emerges not from a clock, but from entropy exchange between ultracold atoms.
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प्रोफ़ेसर जियोवानी बारोंटिनी और बर्मिंघम विश्वविद्यालय की उनकी टीम ने एक टेबलटॉप "मिनी-ब्रह्मांड" का निर्माण किया है, जो भौतिकी के सबसे गहरे प्रश्नों में से एक का आश्चर्यजनक उत्तर प्रस्तुत करता है: समय है क्या? लगभग 24,000 रुबिडियम-87 परमाणुओं को परम शून्य (–273.15 डिग्री सेल्सियस) से कुछ ही अंश ऊपर ठंडा करके एक बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट बनाया गया, और फिर इस बादल को एक पतली लेज़र दीवार से विभाजित कर दो भागों में बांटा गया—एक चमकीला (प्रेक्षित) क्षेत्र और एक अंधेरा (छिपा हुआ) क्षेत्र। फिजिकल रिव्यू रिसर्च में प्रकाशित इस प्रयोग ने पहला नियंत्रित प्रयोगशाला साक्ष्य प्रदान किया कि समय की एक सुसंगत दिशा (समय का तीर) किसी भी बाहरी घड़ी के बिना, पूरी तरह से अलग-थलग प्रणाली के भीतर उसके हिस्सों के बीच एंट्रॉपी के आदान-प्रदान से उभर सकती है।
प्रायोगिक व्यवस्था: एक सीलबंद क्वांटम ब्रह्मांड
यह प्रयोग क्वांटम गुरुत्वाकर्षण की एक पुरानी सैद्धांतिक पहेली, जिसे "समय की समस्या" (Problem of Time) कहा जाता है, से सीधे टकराता है। व्हीलर–डेविट (Wheeler–DeWitt) ढांचे में—जो क्वांटम यांत्रिकी और सामान्य सापेक्षता को जोड़ने का एक प्रामाणिक तरीका है—पूरे ब्रह्मांड का वर्णन एक ऐसे समीकरण से किया जाता है, जो स्वयं समय पर निर्भर नहीं करता। इसका अर्थ यह है कि ब्रह्मांड की कोई अंतर्निहित बाहरी घड़ी नहीं हो सकती। अगर समय वास्तविक है, तो माना जाता है कि उसे संबंधपरक (रिलेशनल) तरीके से, प्रणाली के भीतर से ही उभरना होगा। बारोंटिनी की टीम ने इसी अवधारणा का भौतिक परीक्षण करने का बीड़ा उठाया।
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अपना शोध जारी रखें
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
"24,000 परमाणुओं के 'मिनी-ब्रह्मांड' ने कैसे दिखाया कि समय एंट्रॉपी से उभर सकता है" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
24,000 अतिशीत रुबिडियम परमाणुओं के एक टेबलटॉप प्रयोग ने एक ऐसा 'मिनी ब्रह्मांड' बनाया, जहां समय प्रेक्षित और छिपे हुए क्षेत्रों के बीच एंट्रॉपी के आदान प्रदान से उभरता है, और कोई बाहरी घड़ी न होने के बावजूद एक ही दिशा...
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
24,000 अतिशीत रुबिडियम परमाणुओं के एक टेबलटॉप प्रयोग ने एक ऐसा 'मिनी ब्रह्मांड' बनाया, जहां समय प्रेक्षित और छिपे हुए क्षेत्रों के बीच एंट्रॉपी के आदान प्रदान से उभरता है, और कोई बाहरी घड़ी न होने के बावजूद एक ही दिशा... 'फिजिकल रिव्यू रिसर्च' में प्रकाशित यह कार्य क्वांटम गुरुत्वाकर्षण में 'समय की समस्या' और संबंधपरक समय ढांचों का पहला नियंत्रित प्रयोगशाला परीक्षण प्रदान करता है।
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
जब परमाणुओं का प्रेक्षित और अप्रेक्षित क्षेत्रों के बीच आवागमन रुक गया, तो एंट्रॉपी का लेन देन थम गया और समय प्रभावी रूप से रुक गया, जो वास्तविक ब्रह्मांड की सैद्धांतिक 'हीट डेथ' को प्रतिबिंबित करता है।
उन्होंने एक बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट बनाया—यह पदार्थ की वह अवस्था है जहां अतिशीत परमाणु एक एकल, सुसंगत क्वांटम वस्तु की तरह व्यवहार करते हैं—और इसे एक समय-स्वतंत्र (स्थायी) जाल में रखा। फिर एक सावधानीपूर्वक ट्यून की गई प्रकाशीय लेज़र दीवार ने इस बादल को एक प्रेक्षित "चमकीले" क्षेत्र और एक अप्रेक्षित "अंधेरे" क्षेत्र में बांट दिया, जबकि परमाणु इस दीवार के आर-पार सुरंग बनाकर या पार कर सकते थे। महत्वपूर्ण बात यह है कि पूरे सिस्टम की सूक्ष्म-स्तरीय (फाइन-ग्रेंड) एंट्रॉपी स्थिर रहती है, जो एक बंद, अलग-थलग प्रणाली की परिभाषित विशेषता है। इसलिए, चमकीले क्षेत्र की स्थूल-स्तरीय (कोर्स-ग्रेंड) एंट्रॉपी में कोई भी बदलाव अनिवार्य रूप से छिपे हुए अंधेरे क्षेत्र के साथ एंट्रॉपी के आदान-प्रदान के कारण ही होना चाहिए।
समय के तीर का अवलोकन
जब सिस्टम को सील करके विभाजित कर दिया गया, तो टीम ने चमकीले क्षेत्र के विकास पर नज़र रखी और ब्रह्मांडीय समानताओं की एक उल्लेखनीय श्रृंखला की खोज की।
बिग बैंग और बिग क्रंच के चक्र
लेज़र दीवार के पार परमाणुओं के आवागमन के साथ ही चमकीला क्षेत्र बार-बार फैलता और फिर सिकुड़ता रहा। यह चक्र एक ब्रह्मांडीय उछाल (कॉस्मोलॉजिकल बाउंस) की नकल करता है। वह क्षण जब परमाणुओं ने पहली बार चमकीले क्षेत्र में प्रवेश किया, उसे "बिग बैंग" के रूप में समझा गया, और उनकी पूरी तरह से अंधेरे क्षेत्र में वापसी को "बिग क्रंच" माना गया। यह उछाल चक्र कई बार दोहराया गया, जिसने प्रयोगशाला के भीतर एक लघु, बार-बार दोहराने वाला ब्रह्मांडीय इतिहास रच दिया।
एक आंतरिक घड़ी के रूप में एन्ट्रॉपिक समय
परमाणुओं के इस उतार-चढ़ाव से शोधकर्ताओं ने एक "एन्ट्रॉपिक समय" (Entropic Time) को परिभाषित किया। चूंकि पूरे सिस्टम की एंट्रॉपी संरक्षित है, दोनों क्षेत्रों के बीच परमाणुओं की दिशात्मक गति ने चमकीले क्षेत्र में एंट्रॉपी का एक मापने योग्य, एक-तरफ़ा प्रवाह बनाया। इस प्रवाह ने एक विश्वसनीय आंतरिक घड़ी के रूप में काम किया, जिसमें कई आश्चर्यजनक गुण थे:
एक सुसंगत दिशा: एन्ट्रॉपिक समय एक ही सुसंगत दिशा में बहता था, और इसने कई विस्तार-संकुचन चक्रों की घटनाओं को सही क्रम में रखा।
परिवर्तनशील गति: क्षेत्रों के बीच एंट्रॉपी के आदान-प्रदान की दर के अनुसार यह आंतरिक घड़ी तेज़ या धीमी हो जाती थी।
सटीक भविष्यवाणी: बारोंटिनी ने पारंपरिक प्रयोगशाला समय के बजाय इसी आंतरिक, एन्ट्रॉपिक समय पर आधारित एक प्रभावी श्रोडिंगर-सदृश (Schrödinger-like) समीकरण निकाला और दिखाया कि इसने चमकीले क्षेत्र के मापे गए विकास को सटीक रूप से पुनरुत्पादित किया।
हीट डेथ और समय का अंत
जब चमकीले और अंधेरे क्षेत्रों के बीच परमाणुओं का वितरण अंततः स्थिर हो गया और बदलना बंद हो गया, तो एंट्रॉपी का आदान-प्रदान रुक गया। इस बिंदु पर, प्रेक्षित क्षेत्र के दृष्टिकोण से, समय प्रभावी रूप से थम गया—यह हमारे अपने ब्रह्मांड के लिए अनुमानित 'हीट डेथ' (ऊष्मीय मृत्यु) का एक सादृश्य है।
ब्रह्मांड की हमारी समझ के लिए यह महत्वपूर्ण क्यों है
यह प्रयोग इसलिए मायने रखता है क्योंकि यह एक बुनियादी प्रश्न को सैद्धांतिक अटकलों से निकालकर प्रायोगिक भौतिकी के दायरे में ले आता है। एक बंद क्वांटम प्रणाली को विभाजित करके और केवल एन्ट्रॉपी गतिशीलता से समय को उभरते हुए देखकर, टीम ने संबंधपरक-समय निर्माणों के लिए पहली नियंत्रित जांच-स्थली प्रदान की। उनके निष्कर्ष इस विचार का समर्थन करते हैं कि समय कोई मौलिक, बाहरी पृष्ठभूमि नहीं है, बल्कि एक थर्मोडायनामिक घटना है जो तब उत्पन्न होती है जब एक प्रेक्षक एक उपतंत्र को—ठीक वैसे ही जैसे चमकीले और अंधेरे क्षेत्रों के बीच का अंतर—एक बड़े, शाश्वत संपूर्ण से अलग करता है। यह टेबलटॉप लघु ब्रह्मांड अब वास्तविक ब्रह्मांड की भौतिकी की खोज के लिए एक नई प्रयोगसिद्ध खिड़की प्रस्तुत करता है।
api.drum.lib.umd.edu
[PDF] ABSTRACT ULTRACOLD MIXTURES OF RUBIDIUM ... - UMD DRUM
उन्होंने एक बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट बनाया—यह पदार्थ की वह अवस्था है जहां अतिशीत परमाणु एक एकल, सुसंगत क्वांटम वस्तु की तरह व्यवहार करते हैं—और इसे एक समय-स्वतंत्र (स्थायी) जाल में रखा। फिर एक सावधानीपूर्वक ट्यून की गई प्रकाशीय लेज़र दीवार ने इस बादल को एक प्रेक्षित "चमकीले" क्षेत्र और एक अप्रेक्षित "अंधेरे" क्षेत्र में बांट दिया, जबकि परमाणु इस दीवार के आर-पार सुरंग बनाकर या पार कर सकते थे। महत्वपूर्ण बात यह है कि पूरे सिस्टम की सूक्ष्म-स्तरीय (फाइन-ग्रेंड) एंट्रॉपी स्थिर रहती है, जो एक बंद, अलग-थलग प्रणाली की परिभाषित विशेषता है। इसलिए, चमकीले क्षेत्र की स्थूल-स्तरीय (कोर्स-ग्रेंड) एंट्रॉपी में कोई भी बदलाव अनिवार्य रूप से छिपे हुए अंधेरे क्षेत्र के साथ एंट्रॉपी के आदान-प्रदान के कारण ही होना चाहिए।
समय के तीर का अवलोकन
जब सिस्टम को सील करके विभाजित कर दिया गया, तो टीम ने चमकीले क्षेत्र के विकास पर नज़र रखी और ब्रह्मांडीय समानताओं की एक उल्लेखनीय श्रृंखला की खोज की।
बिग बैंग और बिग क्रंच के चक्र
लेज़र दीवार के पार परमाणुओं के आवागमन के साथ ही चमकीला क्षेत्र बार-बार फैलता और फिर सिकुड़ता रहा। यह चक्र एक ब्रह्मांडीय उछाल (कॉस्मोलॉजिकल बाउंस) की नकल करता है। वह क्षण जब परमाणुओं ने पहली बार चमकीले क्षेत्र में प्रवेश किया, उसे "बिग बैंग" के रूप में समझा गया, और उनकी पूरी तरह से अंधेरे क्षेत्र में वापसी को "बिग क्रंच" माना गया। यह उछाल चक्र कई बार दोहराया गया, जिसने प्रयोगशाला के भीतर एक लघु, बार-बार दोहराने वाला ब्रह्मांडीय इतिहास रच दिया।
एक आंतरिक घड़ी के रूप में एन्ट्रॉपिक समय
परमाणुओं के इस उतार-चढ़ाव से शोधकर्ताओं ने एक "एन्ट्रॉपिक समय" (Entropic Time) को परिभाषित किया। चूंकि पूरे सिस्टम की एंट्रॉपी संरक्षित है, दोनों क्षेत्रों के बीच परमाणुओं की दिशात्मक गति ने चमकीले क्षेत्र में एंट्रॉपी का एक मापने योग्य, एक-तरफ़ा प्रवाह बनाया। इस प्रवाह ने एक विश्वसनीय आंतरिक घड़ी के रूप में काम किया, जिसमें कई आश्चर्यजनक गुण थे:
एक सुसंगत दिशा: एन्ट्रॉपिक समय एक ही सुसंगत दिशा में बहता था, और इसने कई विस्तार-संकुचन चक्रों की घटनाओं को सही क्रम में रखा।
परिवर्तनशील गति: क्षेत्रों के बीच एंट्रॉपी के आदान-प्रदान की दर के अनुसार यह आंतरिक घड़ी तेज़ या धीमी हो जाती थी।
सटीक भविष्यवाणी: बारोंटिनी ने पारंपरिक प्रयोगशाला समय के बजाय इसी आंतरिक, एन्ट्रॉपिक समय पर आधारित एक प्रभावी श्रोडिंगर-सदृश (Schrödinger-like) समीकरण निकाला और दिखाया कि इसने चमकीले क्षेत्र के मापे गए विकास को सटीक रूप से पुनरुत्पादित किया।
हीट डेथ और समय का अंत
जब चमकीले और अंधेरे क्षेत्रों के बीच परमाणुओं का वितरण अंततः स्थिर हो गया और बदलना बंद हो गया, तो एंट्रॉपी का आदान-प्रदान रुक गया। इस बिंदु पर, प्रेक्षित क्षेत्र के दृष्टिकोण से, समय प्रभावी रूप से थम गया—यह हमारे अपने ब्रह्मांड के लिए अनुमानित 'हीट डेथ' (ऊष्मीय मृत्यु) का एक सादृश्य है।
ब्रह्मांड की हमारी समझ के लिए यह महत्वपूर्ण क्यों है
यह प्रयोग इसलिए मायने रखता है क्योंकि यह एक बुनियादी प्रश्न को सैद्धांतिक अटकलों से निकालकर प्रायोगिक भौतिकी के दायरे में ले आता है। एक बंद क्वांटम प्रणाली को विभाजित करके और केवल एन्ट्रॉपी गतिशीलता से समय को उभरते हुए देखकर, टीम ने संबंधपरक-समय निर्माणों के लिए पहली नियंत्रित जांच-स्थली प्रदान की। उनके निष्कर्ष इस विचार का समर्थन करते हैं कि समय कोई मौलिक, बाहरी पृष्ठभूमि नहीं है, बल्कि एक थर्मोडायनामिक घटना है जो तब उत्पन्न होती है जब एक प्रेक्षक एक उपतंत्र को—ठीक वैसे ही जैसे चमकीले और अंधेरे क्षेत्रों के बीच का अंतर—एक बड़े, शाश्वत संपूर्ण से अलग करता है। यह टेबलटॉप लघु ब्रह्मांड अब वास्तविक ब्रह्मांड की भौतिकी की खोज के लिए एक नई प्रयोगसिद्ध खिड़की प्रस्तुत करता है।
api.drum.lib.umd.edu
[PDF] ABSTRACT ULTRACOLD MIXTURES OF RUBIDIUM ... - UMD DRUM