यह स्थिति हैती के लिए एक गहरी विडंबना है क्योंकि कठिन हालात में ऐतिहासिक योग्यता हासिल करने वाली 'लेस ग्रेनेडियर्स' को अपने ही समर्थकों के उत्साह के बिना मैदान में उतरना पड़ेगा ।
ईरान के लिए राह और भी पथरीली निकली। अमेरिकी-ईरानी संबंधों में मौजूदा तनाव ने खेल को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया है। यहां समस्या केवल यात्रा प्रतिबंध तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने कई मोर्चों पर जटिल रूप ले लिया।
ईरान के मुख्य कोच अमीर ग़लेनोई की निराशा साफ झलकती है जब वह कहते हैं, "हम इस व्यवहार से निराश हैं। विश्व कप के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ" ।
इस पूरे विवाद के बीच, स्कॉटलैंड के प्रशंसकों का उत्साह एक बिल्कुल अलग ही तस्वीर पेश करता है। 28 साल बाद विश्व कप में वापसी कर रही स्कॉटिश टीम के हज़ारों समर्थक, जिन्हें 'टार्टन आर्मी' के नाम से जाना जाता है, बोस्टन और प्रोविडेंस शहरों में डेरा डाले हुए हैं। उनकी चुनौतियों का स्वरूप बिल्कुल अलग है ।
यह फर्क साफ तौर पर विश्व कप की सार्वभौमिकता और एकता के सिद्धांतों पर एक कड़वा सवाल खड़ा करता है। फीफा ने एक बयान में कहा कि वह "ईरानी प्रशंसकों को मैचों में शामिल होने के अवसरों को अधिकतम करने के लिए अनुपालक समाधानों की पहचान करने के लिए ईरानी फुटबॉल महासंघ के साथ काम कर रहा है", लेकिन मैचों से कुछ दिन पहले तक यह मसला अनसुलझा ही था ।
हैती की ऐतिहासिक वापसी और ईरान की चुनौतीपूर्ण तैयारी पर अमेरिकी प्रवेश प्रतिबंधों की काली छाया पड़ी हुई है, जबकि स्कॉटिश 'टार्टन आर्मी' का उत्साह और पार्टी करने का जज़्बा इस असमानता को और भी बेनकाब करता है। आखिरकार, किसी के लिए यह विश्व कप उनके लिए है, और किसी के लिए नहीं ।
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