यह जानकारी उपलब्ध साक्ष्यों और अध्ययनों पर आधारित है। जानिए चीन की LEAPER RNA एडिटिंग तकनीक कैसे काम करती है, इसके क्या नतीजे रहे, और यह ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (DMD) के इलाज में क्यों एक बड़ी उपलब्धि है।
LE051 थेरेपी कैसे काम करती है?
LEAPER 2.0 प्लेटफॉर्म एडेनो-असोसिएटेड वायरस (AAV) के ज़रिए शरीर में सर्कुलर ADAR-रिक्रूटिंग RNA (circ-arRNAs) पहुंचाता है
। ये विशेष RNA अणु शरीर में पहले से मौजूद ADAR (एडीनोसिन डीएमिनेज एक्टिंग ऑन RNA) नामक एंजाइम को रिक्रूट करते हैं।
ADAR एंजाइम, DMD जीन के प्री-mRNA पर एक विशेष स्थान पर एडीनोसिन (A) को इनोसिन (I) में बदल देता है। इस बदलाव की वजह से mRNA की स्प्लाइसिंग प्रक्रिया में एक्सॉन 51 को छोड़ दिया जाता है (एक्सॉन स्किपिंग)। DMD के वे लगभग 13% मरीज़ जिनमें जीन का रीडिंग फ्रेम खराब हो चुका है, इस प्रक्रिया से उनका रीडिंग फ्रेम दोबारा सही हो जाता है, और शरीर में एक थोड़ा छोटा, लेकिन काम करने वाला डिस्ट्रोफिन प्रोटीन बनने लगता है ![]()
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मुख्य नतीजे और मोटर फंक्शन में सुधार
- पहली बार इंसानों पर अध्ययन (फर्स्ट-इन-ह्यूमन स्टडी) में, DMD से पीड़ित तीन बच्चों को LE051 की एक अकेली इंट्रावीनस खुराक दी गई। एक साल की फॉलो-अप अवधि में, तीनों बच्चों ने अपनी "उल्लेखनीय और लगातार बनी रहने वाली मोटर क्षमता में सुधार" दिखाया — जबकि बिना इलाज के उनकी हालत लगातार बिगड़ती जाती
।
- बंदरों (नॉन-ह्यूमन प्राइमेट) पर हुए अध्ययन में, DMD के एक सामान्य हॉटस्पॉट म्यूटेशन वाले मॉडल को थेरेपी की एक खुराक देने पर देखा गया। इस दौरान डिस्ट्रोफिन प्रोटीन के खिलाफ कोई इम्यून प्रतिक्रिया नहीं हुई ।
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