सोमालिया के रेफरी उमर अर्तान (34) इस विश्व कप में इतिहास रचने वाले थे – वे किसी पुरुष फीफा विश्व कप में मैदानी अधिकारी के तौर पर शामिल होने वाले पहले सोमाली बनने जा रहे थे । लेकिन 6 जून को मियामी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते ही अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (CBP) ने वैध वीज़ा होने के बावजूद उन्हें एंट्री देने से इनकार कर दिया और उन्हें टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया
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अर्तान ने द न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि उनका 'आजीवन सपना' चकनाचूर हो गया । जब इंफेंटिनो से 10 जून को मैक्सिको सिटी में इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने लोगों से 'चिल एंड रिलैक्स' करने को कहा और सफाई दी कि फीफा किसी सरकार को वीज़ा नियमों पर आदेश नहीं दे सकता
। इस बयान ने दुनिया भर में जबरदस्त हो-हल्ला मचा दिया, लोगों ने कहा कि एक मान्यता प्राप्त रेफरी की सुरक्षा के लिए फीफा को अपना रसूख ज़रूर इस्तेमाल करना चाहिए था
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अर्तान का मामला तो बस एक झलक भर था। जनवरी 2025 में ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद, अमेरिका ने सेनेगल, आइवरी कोस्ट, ईरान और हैती समेत कई देशों के नागरिकों पर यात्रा प्रतिबंध लगा दिए, जो इसी विश्व कप के लिए क्वालीफाई भी कर चुके थे । मुख्य परिणाम इस प्रकार रहे:
विश्व कप की सबसे बड़ी सुर्खियां शायद टिकटों की भारी कीमतें रहीं, जो कुछ मैचों के लिए 1,000 डॉलर (लगभग 85,000 रुपये) से भी ऊपर पहुंच गई। लाइनकर ने सार्वजनिक रूप से चिंता जताई कि क्या फुटबॉल अब 'अमीरों का खेल' बनता जा रहा है । बीबीसी ने अपने विश्लेषण में लिखा कि तमाम प्रशंसकों के बीच यह भावना गहरा गई है कि 'यह विश्व कप हमारे लिए नहीं, उनके लिए है'
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यह विश्व कप ऐतिहासिक है। यह 32 से बढ़कर 48 देशों वाला पहला संस्करण है और तीन देशों (संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको) की मेज़बानी में होने वाला पहला टूर्नामेंट है। लेकिन इस भव्यता ने अमेरिकी सत्ता और फीफा के बीच बनती-बिगड़ती सियासत को और भी बड़ा मुद्दा बना दिया, जिसने मैदान के अंदर के रोमांच को कई बार फीका कर दिया।
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