नैस्डैक में अप्रैल 2025 के बाद की सबसे बड़ी एक दिवसीय गिरावट दर्ज की गई । इसका सीधा असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा, जिनमें ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे कई प्रमुख टेक-निर्यातक देश शामिल हैं, जिनका एमएससीआई उभरते बाजार सूचकांक में भारी भारांश (वेटेज) है
। एमएससीआई का क्षेत्रीय इक्विटी गेज 2.25% गिर गया और जापान का निक्केई सूचकांक 1.3% की गिरावट के साथ बंद हुआ, जिससे एशियाई इक्विटी पर व्यापक दबाव बन गया
।
जून के पहले सप्ताह में मिडिल ईस्ट में तनाव अचानक बढ़ गया। 3 जून को, ईरानी ड्रोनों ने कुवैत के मुख्य हवाई अड्डे को निशाना बनाया और अमेरिका व ईरान के बीच एक-दूसरे पर हमलों का आदान-प्रदान हुआ । इन घटनाओं ने वैश्विक तेल आपूर्ति में व्यवधान की आशंका पैदा कर दी।
कच्चे तेल की कीमतें तुरंत उछल गईं और ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) का भाव बहु-मासिक उच्च स्तरों के करीब पहुंच गया । विश्लेषकों ने चेतावनी दी कि यह संघर्ष कच्चे तेल की कीमतों में 10% तक का इजाफा कर सकता है, जिससे महंगाई (इन्फ्लेशन) की आशंकाएँ पुनः बलवती हो गईं
। रॉयटर्स ने 8 जून को रिपोर्ट किया कि मिडिल ईस्ट में ताजा हमलों ने तेल की कीमतों को ऊपर धकेल दिया और महंगाई की आशंकाओं को हवा दी, जिसने उभरते बाजारों की बिकवाली में सीधा योगदान दिया
।
बढ़ती तेल कीमतें उभरते बाजारों के लिए दोहरी मार होती हैं: वे आयात लागत बढ़ाकर व्यापार घाटा खराब करती हैं और साथ ही केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरें ऊंची रखने के लिए मजबूर करती हैं।
चीन के बाजार नियामक ने 11 जून 2026 को पांच प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों—ताओबाओ (टीमॉल), जेडी.कॉम, पिनडुओडुओ, डोयिन और शियाओहोंगशू—को तलब किया । यह कार्रवाई ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों के बीच बढ़ती अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा, जिसे 'चूहा दौड़' (Rat Race) प्रतिस्पर्धा कहा जा रहा है, और विभिन्न अनियमितताओं पर लगाम लगाने के एक अभियान का हिस्सा थी
।
यह कोई अचानक उठाया गया कदम नहीं था। पिछले कई महीनों में चीन धीरे-धीरे अपनी डिजिटल अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण कड़ा कर रहा था:
जून 2026 की ताज़ा कार्रवाई ने बाजार को संकेत दे दिया कि सरकार की सख्ती जारी रहेगी। इससे चीन की दिग्गज तकनीकी और ई-कॉमर्स कंपनियों के भविष्य को लेकर नियामकीय अनिश्चितता फिर से बढ़ गई, जिसने एशियाई और उभरते बाजारों की धारणा पर नकारात्मक प्रभाव डाला ।
यह पूरी बिकवाली कई मोर्चों पर एक साथ बने दबाव का परिणाम थी: एक सिरे पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों के कारण पैसे की लागत बढ़ने का डर था, दूसरी ओर एआई की चमक फीकी पड़ने से टेक शेयर धड़ाम हुए, इसी बीच मिडिल ईस्ट की लड़ाई ने तेल की कीमतों को हवा देकर महंगाई का पुराना डर जगा दिया, और आखिर में चीन ने अपने सबसे बड़े तकनीकी क्षेत्रों पर नियंत्रण और कस दिया। इन चारों कारकों ने मिलकर निवेशकों के लिए एक साथ कई खतरे की घंटी बजा दी, जिससे उभरते बाजारों में तगड़ी बिकवाली देखने को मिली।
Comments
0 comments