लेकिन इस प्रस्ताव ने टोयोटा, जगुआर लैंड रोवर (JLR) और निसान जैसी दिग्गज कंपनियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। आइए समझते हैं कि आखिर ये कंपनियां किन बातों को लेकर चिंतित हैं।
जापानी वाहन निर्माता टोयोटा ने इन नियमों का खुलकर विरोध किया है। कंपनी ने चेतावनी दी है कि इससे निवेश, रोजगार और यूरोप की प्रतिस्पर्धी क्षमता को भारी नुकसान पहुंचेगा । टोयोटा की मांगें मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर केंद्रित हैं:
यह चिंता सिर्फ टोयोटा तक सीमित नहीं है। जापान की होंडा और निसान ने भी बाजार तक पहुंच को लेकर इसी तरह की आशंकाएं जताई हैं ।
जगुआर लैंड रोवर (JLR) के लिए यह मामला और भी पेचीदा है क्योंकि कंपनी का बड़ा उत्पादन ब्रिटेन में होता है। JLR और ब्रिटेन के मोटर वाहन उद्योग को डर है कि IAA के ये नियम ब्रेक्सिट के बाद ब्रिटेन में बने वाहनों और पुर्जों के साथ सीधा भेदभाव करेंगे ।
यह मामला सिर्फ गैर-EU कंपनियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसने पूरे यूरोपीय वाहन उद्योग को बांट दिया है:
विशेषज्ञों का कहना है कि इन नियमों का सबसे बड़ा खतरा यह है कि यह ब्रिटेन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे सहयोगी देशों से जवाबी व्यापारिक कार्रवाई (रेटालिएटरी ट्रेड मेजर्स) को जन्म दे सकता है, जिससे अरबों डॉलर की आपस में जुड़ी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित होगी ।
अंततः, यूरोप अपने उद्योग को बचाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के बीच एक कठिन संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इसके लिए उठाया गया यह कदम फिलहाल मुश्किलें ही बढ़ाता दिख रहा है।
लेकिन इस प्रस्ताव ने टोयोटा, जगुआर लैंड रोवर (JLR) और निसान जैसी दिग्गज कंपनियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। आइए समझते हैं कि आखिर ये कंपनियां किन बातों को लेकर चिंतित हैं।
जापानी वाहन निर्माता टोयोटा ने इन नियमों का खुलकर विरोध किया है। कंपनी ने चेतावनी दी है कि इससे निवेश, रोजगार और यूरोप की प्रतिस्पर्धी क्षमता को भारी नुकसान पहुंचेगा । टोयोटा की मांगें मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर केंद्रित हैं:
यह चिंता सिर्फ टोयोटा तक सीमित नहीं है। जापान की होंडा और निसान ने भी बाजार तक पहुंच को लेकर इसी तरह की आशंकाएं जताई हैं ।
जगुआर लैंड रोवर (JLR) के लिए यह मामला और भी पेचीदा है क्योंकि कंपनी का बड़ा उत्पादन ब्रिटेन में होता है। JLR और ब्रिटेन के मोटर वाहन उद्योग को डर है कि IAA के ये नियम ब्रेक्सिट के बाद ब्रिटेन में बने वाहनों और पुर्जों के साथ सीधा भेदभाव करेंगे ।
यह मामला सिर्फ गैर-EU कंपनियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसने पूरे यूरोपीय वाहन उद्योग को बांट दिया है:
विशेषज्ञों का कहना है कि इन नियमों का सबसे बड़ा खतरा यह है कि यह ब्रिटेन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे सहयोगी देशों से जवाबी व्यापारिक कार्रवाई (रेटालिएटरी ट्रेड मेजर्स) को जन्म दे सकता है, जिससे अरबों डॉलर की आपस में जुड़ी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित होगी ।
अंततः, यूरोप अपने उद्योग को बचाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के बीच एक कठिन संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इसके लिए उठाया गया यह कदम फिलहाल मुश्किलें ही बढ़ाता दिख रहा है।