दिसंबर 2025 में मेटा ने चीनी उद्यमियों द्वारा स्थापित सिंगापुर आधारित एआई स्टार्टअप मानुस को $2 बिलियन से अधिक में खरीदा, लेकिन यह डील शुरू से ही विवादों में रही क्योंकि मानुस ने 2025 के मध्य में अपना मुख्यालय चीन से... 27 अप्रैल 2026 को चीन के राष्ट्रीय विकास और सुधार आयोग (एनडीआरसी) ने विदेशी निवेश सुरक्षा समीक्षा...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What happened in the Meta Manus deal — from the $2 billion acquisition and Beijing's order to unwind it, to the operational split completed. Article summary: The Meta Manus Deal: From Acquisition to Forced Unwind Meta acquired Manus, a Singapore based agentic AI startup founded by Chinese entrepreneurs, in December 2025 for more than $2 billion to boost its AI agent capabilit. Topic tags: general web, agents, ai, workflow, security. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "Beijing's unprecedented reversal of the $2 billion-plus AI deal forces Meta to unwind what was supposed to be its biggest agentic AI bet. Meta has finished pulling apart its operat" source context "Meta completes operational split from Manus, halts data sharing" Reference image 2: visual subject "# Meta has
दिसंबर 2025 में, फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक. ने अपनी एआई क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक बड़ा दांव खेला। उसने $2 बिलियन डॉलर (लगभग 16,600 करोड़ रुपये) से अधिक की राशि में 'मानुस' नामक एक एआई स्टार्टअप का अधिग्रहण कर लिया। मानुस 'एजेंटिक एआई' तकनीक पर काम करता था, जो स्वायत्त रूप से जटिल कार्यों को अंजाम दे सकने में सक्षम है । लेकिन यह डील शुरू से ही भू-राजनीतिक पेंच में फंसी हुई थी।
मानुस की जड़ें चीन में थीं। इसके संस्थापक चीनी उद्यमी थे और इसने अपनी शुरुआती सफलता चीनी इंजीनियरों और बुनियादी ढांचे की बदौलत हासिल की थी। लेकिन 2025 के मध्य में, अमेरिकी निवेश जुटाने के बाद, मानुस ने अपना मुख्यालय सिंगापुर शिफ्ट कर लिया, चीन में अपने दफ्तर बंद कर दिए, वहां के कर्मचारियों की छंटनी की और खुद को पूरी तरह से चीन से अलग कर लिया ।
इस कदम को चीन में प्रौद्योगिकी के अमेरिका को 'रिसाव' के रूप में देखा गया और इसकी कड़ी आलोचना हुई । जब दिसंबर 2025 में मेटा ने इसका अधिग्रहण किया, तब तक मानुस के कर्मचारी मेटा के सिंगापुर कार्यालयों में शिफ्ट हो चुके थे और टेनसेंट, जेनफंड और सिकोइया चाइना (अब होंगशान) जैसे निवेशकों को उनका भुगतान भी मिल चुका था
।
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब जनवरी 2026 में चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने इस अधिग्रहण की जांच शुरू की। और फिर 27 अप्रैल 2026 को, चीन के शक्तिशाली राष्ट्रीय विकास और सुधार आयोग (एनडीआरसी) ने एक संक्षिप्त बयान में इस डील को रद्द करने का आदेश दे दिया ।
एनडीआरसी के विदेशी निवेश सुरक्षा समीक्षा तंत्र के कार्यालय ने कहा कि यह अधिग्रहण विदेशी निवेश सुरक्षा समीक्षा नियमों का उल्लंघन है । यह एक ऐतिहासिक कदम था, क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ जब किसी पूर्ण हो चुके सौदे को चीन के विदेशी निवेश सुरक्षा कानूनों के तहत रद्द करने का आदेश दिया गया
।
बीजिंग के आदेश के बाद, मेटा ने जटिल और कानूनी रूप से पेचीदा 'अनडूइंग' (पलटने) की प्रक्रिया शुरू की। 11 जून 2026 तक, कंपनी ने मानुस के साथ परिचालनिक अलगाव (Operational Separation) पूरा कर लिया था। यह पूर्ण कानूनी विघटन की दिशा में एक 'महत्वपूर्ण कदम' था, लेकिन अभी अंतिम मंजिल नहीं ।
2026 के मध्य तक, तकनीकी और डेटा पृथक्करण पूरा हो चुका था, लेकिन दो सबसे बड़े सवाल अभी भी हवा में लटके हुए हैं:
संक्षेप में, मेटा और मानुस के बीच ऑपरेशनल और डेटा अलगाव पूरा हो चुका है। यह एक मजबूर विवाह का तकनीकी अंत है, लेकिन कानूनी स्वामित्व का उलटना और अरबों डॉलर का वित्तीय समीकरण अभी भी सुलझना बाकी है।
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दिसंबर 2025 में मेटा ने चीनी उद्यमियों द्वारा स्थापित सिंगापुर आधारित एआई स्टार्टअप मानुस को $2 बिलियन से अधिक में खरीदा, लेकिन यह डील शुरू से ही विवादों में रही क्योंकि मानुस ने 2025 के मध्य में अपना मुख्यालय चीन से...
दिसंबर 2025 में मेटा ने चीनी उद्यमियों द्वारा स्थापित सिंगापुर आधारित एआई स्टार्टअप मानुस को $2 बिलियन से अधिक में खरीदा, लेकिन यह डील शुरू से ही विवादों में रही क्योंकि मानुस ने 2025 के मध्य में अपना मुख्यालय चीन से... 27 अप्रैल 2026 को चीन के राष्ट्रीय विकास और सुधार आयोग (एनडीआरसी) ने विदेशी निवेश सुरक्षा समीक्षा नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए इस डील को रद्द करने का आदेश दिया और सभी विदेशी निवेश पर रोक लगा दी [1][3][4]।
आदेश के तहत मानुस के तीन सह संस्थापकों जिओ होंग, जी यिचाओ और झांग ताओ को चीन छोड़ने से रोक दिया गया, और दोनों पक्षों को लेन देन को तुरंत वापस लेकर इसे पूर्व स्थिति में बहाल करने का निर्देश दिया गया [1][7]।