यमन में हूथियों द्वारा संयुक्त राष्ट्र कर्मियों का अपहरण अब संयुक्त राष्ट्र के आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े संकट का रूप ले चुका है। शुरुआती सामूहिक गिरफ्तारियों के दो साल बाद भी 73 कर्मचारी उनकी हिरासत में हैं। संयुक्त राष्ट्र ने बार-बार इसकी निंदा की है, मानवीय कार्यों को स्थगित किया है, और लगातार कूटनीतिक दबाव बनाए रखा है। दूसरी ओर, हूथियों ने जासूसी के आरोप, दिखावटी मुकदमे और हिरासत में कम से कम एक मौत के साथ मामले को और बढ़ा दिया है।
जून 2024 से अब तक की सामूहिक गिरफ्तारियों का कालक्रम
- 6-7 जून, 2024 — हूथियों ने अपने नियंत्रण वाले इलाकों में बड़े पैमाने पर छापेमारी करते हुए संयुक्त राष्ट्र, गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और नागरिक समाज के दर्जनों कर्मचारियों को गिरफ्तार किया, जिनमें संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के छह कर्मी भी शामिल थे
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- 13 जून, 2024 — पुष्टि हुई कि कम से कम 13 संयुक्त राष्ट्र कर्मियों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें से 4 को इस तरह रखा गया कि उनका बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं हो सका
। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने गिरफ्तारियों की निंदा करते हुए सभी की तत्काल रिहाई की मांग की
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- 23-25 जनवरी, 2025 — सना में सात और संयुक्त राष्ट्र कर्मियों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया । यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने इसे मामले को बढ़ाने वाला कदम बताते हुए निंदा की ।
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