अध्ययन का एक और दिलचस्प पहलू यह है कि इन सभी साझेदारों का योगदान एक ही समय पर नहीं हुआ। विश्लेषण से पता चला कि प्लैंक्टोमाइसिटोटा का विकासवादी संकेत अधिक पुराना है, जबकि माइक्सोकोकोटा और अल्फाप्रोटियोबैक्टीरिया (माइटोकॉन्ड्रिया का पूर्वज) का संकेत समय के हिसाब से एक-दूसरे के करीब और बाद का है। यह चरणबद्ध क्रम इस बात का समर्थन करता है कि जटिलता का निर्माण धीरे-धीरे, आनुवंशिक और चयापचय क्षमताओं के क्रमिक संचय से हुआ।
शोध में एक तीसरा और बेहद आश्चर्यजनक किरदार भी सामने आया: विशालकाय विषाणु (Giant Viruses)। ये विषाणु, जो न्यूक्लियोसाइटोविरिकोटा (Nucleocytoviricota) समूह के हैं, आकार और जटिलता में कुछ जीवाणुओं की बराबरी कर सकते हैं। अध्ययन बताता है कि प्रारंभिक यूकेरियोट विकास के दौरान जो कुछ जीन जुड़े, वे इन्हीं विशालकाय विषाणुओं से आए प्रतीत होते हैं।
इन विषाणुओं ने संभवतः एक 'जीन वाहन' की तरह काम किया, जो विभिन्न सूक्ष्मजीवों के बीच आनुवंशिक सामग्री की अदला-बदली कर रहे थे। गैबाल्डन के शब्दों में, "हमारा अध्ययन बताता है कि यह कहानी अधूरी है और मंच पर और भी कलाकार थे, जिनमें अन्य जीवाणु समूह और विशालकाय विषाणु शामिल थे, जिन्होंने जीन आदान-प्रदान को सुगम बनाया।"
यह अध्ययन हमारी सोच को पूरी तरह बदल देता है। यह जटिल जीवन की शुरुआत को एक अकेली एंडोसिम्बायोटिक घटना के रूप में देखने के बजाय, इसे सूक्ष्मजीवी चटाइयों (microbial mats) जैसे समृद्ध वातावरण में हुए एक सहयोगी प्रयास के रूप में स्थापित करता है। यहां अलग-अलग जीव लंबे समय तक साथ रहे और उनके बीच अनुवांशिक सामग्री का आदान-प्रदान होता रहा। यह 'दो की साझेदारी' से कहीं आगे, 'पूरे गांव' की कहानी है।
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