ईंधन की कीमतों का झटका। नाकेबंदी ने दुनिया के पांचवें हिस्से के तेल और चौथाई एलएनजी का रास्ता रोक दिया है । तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है और कीमतों में हुई बढ़ोतरी का असर परिवहन, कृषि उत्पादन और राहत कार्यों की लागत पर सीधा पड़ा है
। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की रिपोर्ट बताती है कि चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े एशियाई आयातक देश ईंधन की बढ़ती कीमतों से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं
।
WFP की फंडिंग में कमी और सेवाओं में कटौती। विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने 2026 की शुरुआत ऐसे वक्त की जब पहले से ही 31.8 करोड़ लोग संकट-स्तर की भूख का सामना कर रहे थे — यह 2019 के आंकड़े से दोगुने से भी ज़्यादा है। एजेंसी ने 16.2 अरब डॉलर की अपील की थी, लेकिन उसके सामने 13 अरब डॉलर की फंडिंग की कमी थी । WFP के कार्यकारी निदेशक कार्ल स्काऊ ने चेतावनी दी है कि ईंधन और परिवहन की बढ़ती लागत संचालन पर और दबाव डाल रही है
। एजेंसी का अनुमान है कि बजट की मजबूरियों के चलते वह 2026 में योजना से 15 लाख कम लोगों की मदद कर पाएगी
।
अतिरिक्त 4.5 करोड़ लोग गंभीर भूख की चपेट में। WFP ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष जारी रहता है, तो मौजूदा 31.8 करोड़ के अलावा अतिरिक्त 4.5 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का शिकार हो सकते हैं । ऐसा हुआ तो यह वैश्विक स्तर पर अब तक का सबसे बड़ा भुखमरी का आंकड़ा होगा
।
श्रीलंका (Sri Lanka) — पहले से ही कर्ज़ और खाद्य संकट से जूझ रहे श्रीलंका में बढ़ती आयात लागत और उर्वरकों की कमी के कारण 13 लाख और लोग गंभीर भूख की ओर धकेले जा सकते हैं ।
सोमालिया (Somalia) — ऐसे अनुमान हैं कि अतिरिक्त 25 लाख लोग गंभीर भूख का सामना करेंगे, क्योंकि यह देश खाद्य आयात और मानवीय सहायता पर पूरी तरह निर्भर है ।
अफ़गानिस्तान (Afghanistan) — 23 लाख और अफ़गान नागरिकों के गंभीर भूख का शिकार होने का अनुमान है, जो पहले से ही भयावह मानवीय स्थिति को और विकराल बना देगा ।
भारत (India) — भारत, खाड़ी देशों से अमोनिया आयात करने वाला सबसे संवेदनशील देश है और यूरिया का भी एक बड़ा आयातक है । एक बड़े एशियाई ऊर्जा आयातक के रूप में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी भारत पर गहरा असर डाला है
।
ब्राज़ील (Brazil) — ब्राज़ील अपनी 80% से ज़्यादा उर्वरकों का आयात करता है, जिसमें नाइट्रोजन और फॉस्फेट के लिए खाड़ी स्रोतों पर भारी निर्भरता है। होर्मुज के बंद होने से सीधे खाड़ी से आपूर्ति रुकने के साथ-साथ मोरक्को जैसे वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की क्षमता भी प्रभावित हुई है ।
वृहद लैटिन अमेरिका — यह क्षेत्र अपनी कृषि निर्यात अर्थव्यवस्थाओं के लिए आयातित उर्वरकों पर बहुत अधिक निर्भर है। उर्वरकों की कमी और ईंधन की ऊंची लागत बुवाई के मौसम और पूरे महाद्वीप में खाद्य उत्पादन के लिए खतरा बन गई है ।
अफ़्रीका (Africa) — अमेरिकन प्रोग्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पूरे अफ़्रीकी महाद्वीप में ईंधन और उर्वरकों की भारी कमी है, जिससे खाद्य असुरक्षा गहरा रही है। ख़ासकर वे देश, जो पहले से भारी कर्ज़ के बोझ तले दबे हैं, उनके लिए यह आर्थिक संकट पैदा कर रहा है ।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा है कि वह निरीक्षण के अधीन मानवीय शिपमेंट — खाद्य, चिकित्सा आपूर्ति, ज़रूरी सामान — को गुज़रने देगी । हालांकि, सहायता एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, आसमान छूती ईंधन लागत, बीमा प्रीमियम और संचालन में आई रुकावटें किसी भी गलियारे की प्रभावशीलता को गंभीर रूप से सीमित कर रही हैं
। संयुक्त राष्ट्र ने इस स्थिति को मानवीय प्रणाली के लिए एक 'परफेक्ट स्टॉर्म' (संपूर्ण तूफ़ान) करार दिया है
।
Comments
0 comments