3 जून 2026 को कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 1 पर हुए ड्रोन हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत और 63 से अधिक लोग घायल हुए [1][3]। हमले के दो दिन बाद अमेरिका ने कुवैत को 1.98 अरब डॉलर की एंड्यूरिल काउंटर ड्रोन प्रणाली की बिक्री को मंज़ूरी दी [4][5][6]। ईरान ने इसे अमेरिका द्वारा रचा गया 'फर्जी फ्लैग' ऑपरेशन...

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28 फरवरी 2026 को ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हवाई हमले किए, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई मारे गए। इसके बाद से ही मिडिल ईस्ट युद्ध की आग में झुलस रहा है । इसी जंग के बीच कुवैत एयरपोर्ट पर हुआ ड्रोन हमला एक नए विवाद का केंद्र बन गया है।
3 जून 2026 को कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-1 पर एक ज़बरदस्त धमाका हुआ। इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई और कम से कम 63 लोग घायल हुए । कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने इसे "ईरानी आक्रामकता" करार दिया, और कहा कि "कई आक्रामक ड्रोनों" ने टर्मिनल को निशाना बनाया
।
हमले के बाद कुवैत ने सीसीटीवी फुटेज जारी किया, जिसमें एक ड्रोन को इमारत से टकराते देखा जा सकता है। इस घटना के कारण सभी वाणिज्यिक उड़ानें रोक दी गईं ।
हमले के कुछ ही दिनों बाद — 5-6 जून 2026 को — अमेरिकी विदेश विभाग ने कुवैत को एंड्यूरिल इंडस्ट्रीज द्वारा निर्मित काउंटर-ड्रोन सिस्टम (c-UAS) की संभावित बिक्री को मंज़ूरी दे दी। इस डील की अनुमानित कीमत लगभग 1.98 अरब डॉलर (करीब 16,500 करोड़ रुपये) है ।
विदेश विभाग ने कहा कि यह बिक्री "कुवैत की मौजूदा और भविष्य के खतरों से निपटने की क्षमता में सुधार करेगी" और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों का समर्थन करेगी ।
9-10 जून को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अमेरिका पर 'फर्जी फ्लैग' (झूठा झंडा) ड्रोन हमला रचने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि अमेरिका ने एंड्यूरिल सिस्टम की मांग पैदा करने के लिए यह साजिश रची ।
प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने दावा किया कि अमेरिका ने हमले के लिए ईरानी ड्रोन की नकल का इस्तेमाल किया और फिर मची दहशत का फायदा उठाकर जल्दबाजी में हथियारों का सौदा पास कर दिया ।
हमले के तुरंत बाद ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपनी जिम्मेदारी से इनकार कर दिया था। IRGC के प्रवक्ता होसैन मोहब्बी ने दावा किया कि नुकसान एक खराब अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल के कारण हुआ, जो आने वाले प्रोजेक्टाइल को रोकने में विफल रही और टर्मिनल पर गिर गई । ईरान के राज्य-नियंत्रित मीडिया ने इस कहानी को खूब बढ़ावा दिया।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के पैट्रियट मिसाइल वाले दावे को सिरे से खारिज कर दिया और इसे "झूठा" बताया। CENTCOM ने कहा कि ईरानी ड्रोनों ने जानबूझकर यात्री टर्मिनल पर "सोची-समझी और अन्यायपूर्ण हमला" किया । CENTCOM ने पुष्टि की कि घटनास्थल से मिले मलबे और सबूतों ने ईरानी मूल के ड्रोन कलपुर्जों की पुष्टि की है।
8 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम हुआ था । लेकिन यह समझौता शुरू से ही कमज़ोर था। मई 2026 में, ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस को सूचित किया कि युद्ध "समाप्त" हो गया है, ताकि वॉर पॉवर्स रेज़ोल्यूशन की 60-दिन की कानूनी समयसीमा से बचा जा सके
।
इसी बीच, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक सांसद जोश गोथाइमर द्वारा पेश एक युद्ध अधिकार प्रस्ताव पर मतदान 212-212 से बराबरी पर रहा और प्रस्ताव विफल हो गया। यह प्रस्ताव ट्रंप को कांग्रेस की मंज़ूरी के बिना सैनिकों को वापस बुलाने का निर्देश देता ।
कुवैत एयरपोर्ट पर हमला इस बात का सबूत है कि ज़मीन पर हकीकत बिल्कुल अलग थी और युद्धविराम महज़ कागज़ी कार्रवाई बनकर रह गया था।
सबूत इस बात की पूरी तरह पुष्टि करते हैं कि कुवैत एयरपोर्ट पर ईरानी ड्रोन ने ही हमला किया। कुवैत का अपना सीसीटीवी फुटेज, कुवैती और CENTCOM के फोरेंसिक दावे, और 28 फरवरी से जारी ईरानी जवाबी हमलों का सिलसिला—सब एक ही दिशा में इशारा करते हैं। ईरान के 'फर्जी फ्लैग' और 'पैट्रियट खराबी' वाले दावों को मुख्य रूप से राज्य-नियंत्रित मीडिया (PressTV, TASS, Tasnim) द्वारा बढ़ावा दिया गया, जिन्हें CENTCOM ने ठोस सबूतों के साथ खारिज किया है ।
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3 जून 2026 को कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 1 पर हुए ड्रोन हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत और 63 से अधिक लोग घायल हुए [1][3]।
3 जून 2026 को कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 1 पर हुए ड्रोन हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत और 63 से अधिक लोग घायल हुए [1][3]। हमले के दो दिन बाद अमेरिका ने कुवैत को 1.98 अरब डॉलर की एंड्यूरिल काउंटर ड्रोन प्रणाली की बिक्री को मंज़ूरी दी [4][5][6]।
ईरान ने इसे अमेरिका द्वारा रचा गया 'फर्जी फ्लैग' ऑपरेशन बताया, जिसका मकसद हथियारों की बिक्री का औचित्य स्थापित करना था [2][7][15]।