6 जून, 2026 को तालिबान की नैतिकता पुलिस ने हेरात में अनिवार्य बुर्का या चादर न पहनने पर 20 से अधिक महिलाओं को टैक्सियों से खींचकर गिरफ्तार किया, जो भेदभावपूर्ण ड्रेस कोड को लागू करने की एक बड़ी कार्रवाई है। UNAMA ने इन गिरफ्तारियों को मौलिक मानवाधिकारों और आवाजाही की स्वतंत्रता का उल्लंघन बताते हुए निंदा की, जबकि उस...
अफ़ग़ानिस्तान के पश्चिमी शहर हेरात में तालिबान की नैतिकता पुलिस द्वारा ड्रेस कोड के कथित उल्लंघन पर महिलाओं की बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी ने संयुक्त राष्ट्र की तीखी निंदा को जन्म दिया है। मानवाधिकार समूह इसे अफ़ग़ान महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह मिटाने के तेज़ होते अभियान का हिस्सा बता रहे हैं।
6 जून, 2026 को, 'अम्र बिल मारूफ़ व नही अनिल मुनकर' मंत्रालय (MPVPV) ने यह अभियान चलाया। इसके तहत, अधिकारियों ने शहर की प्रमुख सड़कों पर चेकपॉइंट लगाकर टैक्सियों और सार्वजनिक वाहनों से महिलाओं को खींचकर हिरासत में ले लिया। स्थानीय निवासियों ने बताया कि एक ही दिन में 20 से अधिक महिलाओं को गिरफ्तार किया गया । ये गिरफ्तारियां खासतौर पर उन महिलाओं को निशाना बनाकर की गईं जिन्होंने बुर्का या लंबी चादर नहीं पहनी थी, जिसे तालिबान ने सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के लिए अनिवार्य कर रखा है
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ये गिरफ्तारियां कोई अकेली घटना नहीं थीं, बल्कि हेरात में महीनों से बढ़ते दबाव का चरम बिंदु थीं। जनवरी 2026 की शुरुआत में ही, MPVPV ने ऐसी ही सड़क चौकियां स्थापित कर दी थीं। जो महिलाएं बुर्का या नमाज़ वाली लंबी चादर में नहीं होती थीं, उन्हें वाहनों से ज़बरदस्ती उतारकर सार्वजनिक रूप से पूछताछ की जाती थी । नैतिकता पुलिस ने हेराती महिलाओं की पीढ़ियों से पहनी जाने वाली पारंपरिक पोशाक, मांटो (एक लंबा कोट) को भी 'अस्वीकार्य' घोषित कर दिया था
। अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) ने जनवरी से मार्च 2026 तक की अपनी रिपोर्ट में पहले ही दस्तावेज़ीकरण कर दिया था कि हेरात में MPVPV के निरीक्षक नियमित रूप से महिलाओं को सार्वजनिक परिवहन से उतरने का आदेश दे रहे थे और उन्हें चादर पहनने का निर्देश दे रहे थे
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8 जून, 2026 को, UNAMA ने एक सार्वजनिक बयान जारी कर "हेरात में ड्रेस आवश्यकताओं के कथित गैर-अनुपालन के लिए महिलाओं की कई गिरफ्तारियों और हिरासत" पर चिंता व्यक्त की, और कहा कि ये घटनाएं "गंभीर मानवाधिकार चिंताएं" पैदा करती हैं । मिशन ने अपनी निंदा में आवाजाही की स्वतंत्रता और कानून के समक्ष समानता के अधिकारों का आह्वान किया
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यह निंदा संयुक्त राष्ट्र द्वारा व्यवस्थित दस्तावेज़ीकरण की पृष्ठभूमि में आई है। 2026 के पहले तीन महीनों के लिए UNAMA की व्यापक तिमाही रिपोर्ट ने नैतिकता पुलिस के अभियानों के विशाल पैमाने का खुलासा किया। रिपोर्ट में पाया गया कि अकेले इस अवधि के दौरान उन्होंने देशभर में कम से कम 336 व्यक्तियों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया और 59 प्रलेखित मामलों में महिलाओं और पुरुषों के साथ दुर्व्यवहार किया । ये गिरफ्तारियां अक्सर कपड़ों की शैली के कथित उल्लंघन को निशाना बनाती थीं, लेकिन इनमें दाढ़ी काटने और संगीत सुनने जैसी चीज़ें भी शामिल थीं
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हेरात क्रैकडाउन लिंग-आधारित उत्पीड़न की एक व्यापक और तेज़ होती प्रणाली का नवीनतम कदम है, जो 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से तेज़ी से बढ़ी है। विशेषज्ञों और संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों ने इन नीतियों के संचयी प्रभाव को "लैंगिक रंगभेद" के रूप में वर्णित किया है । इस वृद्धि के प्रमुख पड़ावों में शामिल हैं:
ड्रेस कोड से परे, महिलाओं के अधिकारों के व्यवस्थित विध्वंस ने शिक्षा, रोज़गार और न्याय प्रणाली को भी निशाना बनाया है। 14 से अधिक फरमानों ने महिलाओं को माध्यमिक विद्यालयों और विश्वविद्यालयों से वंचित कर दिया है, उनके NGOs और संयुक्त राष्ट्र के लिए काम करने पर प्रतिबंध लगा दिया है, और लगभग 70 किलोमीटर से अधिक की किसी भी यात्रा के लिए पुरुष अभिभावक अनिवार्य करके उनकी आवाजाही की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित कर दिया है ।
तालिबान की रणनीति में परिवार के भीतर महिलाओं की स्वायत्तता का कानूनी सफाया भी शामिल है। फरमानों ने विवाह और तलाक में सुरक्षा को कमज़ोर कर दिया है, जिससे महिलाओं के लिए तलाक शुरू करना लगभग असंभव हो गया है और युवावस्था में पहुंचने पर एक लड़की की चुप्पी को विवाह की सहमति के रूप में व्याख्या करने की अनुमति दी गई है, जो प्रभावी रूप से बाल विवाह को संस्थागत बना रहा है । मार्च 2026 में, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव S/2026/170 में "विशेष रूप से महिलाओं और लड़कियों के लिए मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं के सम्मान के बढ़ते और व्यापक क्षरण के बारे में गंभीर चिंता" व्यक्त की और लैंगिक भेदभाव को संस्थागत बनाने वाले कानूनी उपायों की निंदा की
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अफ़ग़ानिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लिए शीर्ष एजेंडा मद बना हुआ है, जिसने मार्च 2026 में UNAMA के जनादेश को 17 जून, 2026 तक बढ़ा दिया, जिसमें सदस्यों ने तालिबान से अफ़ग़ान महिलाओं के संयुक्त राष्ट्र के लिए काम करने पर लगे प्रतिबंध को वापस लेने का आग्रह किया । तिमाही बैठकों के दौरान, संयुक्त राष्ट्र के उप मिशन प्रमुख ने साफ कहा है कि महिलाओं पर तालिबान के प्रतिबंध सीधे तौर पर "अफ़ग़ानिस्तान की प्रगति में बाधा डाल रहे हैं" और इसके अंतरराष्ट्रीय अलगाव को गहरा कर रहे हैं
। सुरक्षा परिषद ने स्पष्ट किया है कि शांति और समृद्धि "अप्राप्य" है जब तक तालिबान महिलाओं की शिक्षा, रोज़गार और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी पर लगे प्रतिबंधों को वापस नहीं लेता
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इन प्रतिबंधों की व्यवस्थित प्रकृति, जिसे अब टैक्सी में बैठने जैसी रोज़मर्रा की गतिविधियों में आतंक पैदा करने के लिए डिज़ाइन की गई सार्वजनिक गिरफ्तारियों के माध्यम से लागू किया जा रहा है, के कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। जैसे-जैसे UNAMA और मानवाधिकार संगठन दमन की हर लहर का दस्तावेज़ीकरण कर रहे हैं, अंतरराष्ट्रीय समुदाय अफ़ग़ानिस्तान की महिलाओं और लड़कियों के लिए निंदा को कार्रवाई में बदलने की निरंतर चुनौती का सामना कर रहा है।
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6 जून, 2026 को तालिबान की नैतिकता पुलिस ने हेरात में अनिवार्य बुर्का या चादर न पहनने पर 20 से अधिक महिलाओं को टैक्सियों से खींचकर गिरफ्तार किया, जो भेदभावपूर्ण ड्रेस कोड को लागू करने की एक बड़ी कार्रवाई है।
6 जून, 2026 को तालिबान की नैतिकता पुलिस ने हेरात में अनिवार्य बुर्का या चादर न पहनने पर 20 से अधिक महिलाओं को टैक्सियों से खींचकर गिरफ्तार किया, जो भेदभावपूर्ण ड्रेस कोड को लागू करने की एक बड़ी कार्रवाई है। UNAMA ने इन गिरफ्तारियों को मौलिक मानवाधिकारों और आवाजाही की स्वतंत्रता का उल्लंघन बताते हुए निंदा की, जबकि उसकी रिपोर्ट बताती है कि 2026 की शुरुआत में ही तालिबान नैतिकता पुलिस ने देशभर में कम से कम 336 लोगों को मनमान...
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