जेपी मॉर्गन एसेट मैनेजमेंट को उम्मीद है कि ECB जून में सिर्फ एक बार ब्याज दर बढ़ाएगा, जबकि पिक्टेट का मानना है कि दरों को स्थिर रखना ही उचित होगा [10]। यह रुख बाजार की आम धारणा के बिल्कुल विपरीत है, जो ईरान युद्ध से उपजी ऊर्जा महंगाई के चलते साल के अंत तक 75 आधार अंकों की वृद्धि की उम्मीद कर रहा है [10]। जेपी मॉर्गन...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What contrarian view are JPMorgan Asset Management and Pictet Asset Management taking ahead of the ECB's expected June 2026 rate hike — the. Article summary: JPMorgan Asset Management and Pictet Asset Management are taking a starkly contrarian stance ahead of the ECB's June 11 meeting: JPMorgan AM expects any June hike to be "one and done," with no follow-up tightening, while. Topic tags: general, general web, user generated, government. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "JP Morgan sees ECB rate hikes in June and September 2026 amid energy price rise. JP Morgan forecasts the European Central Bank will raise rates by 25 basis points in both June and" source context "JP Morgan sees ECB rate hikes in June and September 2026 amid energy price rise" Reference image 2: visual
जून 2026 में यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) ब्याज दरें बढ़ाने जा रहा है, यह लगभग तय माना जा रहा है। लेकिन इस बीच, दो दिग्गज एसेट मैनेजमेंट फर्मों ने बाजार की आम राय से बिल्कुल अलग और चौंकाने वाला रुख अपनाया है। जेपी मॉर्गन एसेट मैनेजमेंट और पिक्टेट एसेट मैनेजमेंट का मानना है कि यह ब्याज दर वृद्धि या तो 'वन एंड डन' (एक बार करो और खत्म) होगी, या फिर ECB को तो दरें बढ़ानी ही नहीं चाहिए ।
बाजार में ज्यादातर विश्लेषक और निवेशक इस समय तीन ब्याज दर वृद्धि की संभावना जता रहे हैं। ब्लूमबर्ग के एक सर्वेक्षण में अधिकांश अर्थशास्त्रियों ने 2026 में ECB द्वारा दो बार दरें बढ़ाने की उम्मीद जताई है । बाजार में साल के अंत तक कुल 75 आधार अंकों (bps) की वृद्धि की कीमत तय की जा रही है, और जून में 25 आधार अंकों की वृद्धि की 90% संभावना जताई जा रही है
। इस आक्रामक रुख के पीछे सबसे बड़ा कारण है ईरान युद्ध, जिसने तेल की कीमतों को चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं में रुकावट पैदा कर दी है
।
यहां बाजार की आम धारणा से हटकर दो अलग-अलग, लेकिन समान रूप से साहसिक राय सामने आई हैं:
जेपी मॉर्गन एसेट मैनेजमेंट ('वन एंड डन'): फर्म का तर्क है कि यूरोजोन की आर्थिक वृद्धि बहुत कमजोर है। ऐसे में, ECB जून में एक बार 'प्रतीकात्मक' वृद्धि करेगा, ताकि यह संदेश जाए कि वह महंगाई पर नजर रख रहा है, लेकिन इसके बाद वह आगे कोई कदम नहीं उठाएगा। जेपी मॉर्गन एएम की वैश्विक बाजार विश्लेषक ज़ारा नोक्स का कहना है कि केंद्रीय बैंक सिर्फ यह संकेत देने के लिए कदम उठा सकता है, लेकिन कमजोर विकास दर आगे की वृद्धि को रोक देगी ।
पिक्टेट एसेट मैनेजमेंट (पूरी तरह रोक): पिक्टेट के मुख्य रणनीतिकार लुका पाओलिनी का बयान और भी स्पष्ट है। उनका कहना है, "बाजार तीन वृद्धि की उम्मीद कर रहा है - वे शायद एक करें, सिर्फ यह दिखाने के लिए कि 'हम महंगाई के आंकड़े देख रहे हैं।' यूरोपीय अर्थव्यवस्था में कोई तेजी नहीं आ रही है।" पिक्टेट और एक अन्य फर्म कार्मिग्नैक का मानना है कि नीति निर्माताओं के लिए दरें बिल्कुल न बढ़ाना भी पूरी तरह से उचित होगा
।
ये दोनों फर्म अपने इस विपरीत रुख के पीछे कई मजबूत आर्थिक तर्क दे रही हैं:
सुस्त अर्थव्यवस्था: सबसे बड़ा तर्क यह है कि यूरोपीय अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत नहीं है कि वह लगातार ब्याज दर वृद्धि का बोझ झेल सके। ECB के अपने अनुमानों के अनुसार 2026 में आर्थिक वृद्धि दर औसतन सिर्फ 0.9% रहने की उम्मीद है । स्थिर या सुस्त विकास का मतलब है कि मांग-जनित महंगाई (डिमांड-पुल इन्फ्लेशन) बहुत कम है।
महंगाई की जड़ ऊर्जा कीमतें हैं, मांग नहीं: अप्रैल 2026 में यूरोजोन की मुख्य मुद्रास्फीति दर 2023 के बाद पहली बार 3.0% पर पहुंच गई । लेकिन यह उछाल मुख्य रूप से ऊर्जा की कीमतों के कारण है, जो ईरान युद्ध के चलते तेल की कीमतों में भारी वृद्धि का नतीजा है
। दोनों फर्मों का मानना है कि यह एक अस्थायी, आपूर्ति-पक्ष का झटका (सप्लाई-साइड शॉक) है, जिसे मौद्रिक नीति से ठीक नहीं किया जा सकता।
नीतिगत गलतियों का इतिहास: यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट से ठीक पहले और 2011 में यूरोजोन ऋण संकट के दौरान ब्याज दरें बढ़ाई थीं। दोनों ही बार मूल्य दबाव अस्थायी साबित हुए और आगे चलकर इन्हें 'समय से पहले सख्ती' की बड़ी गलतियां माना गया। जेपी मॉर्गन और पिक्टेट इन ऐतिहासिक उदाहरणों को एक चेतावनी के रूप में देखते हैं ।
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने न केवल तेल की कीमतों को बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर पहुंचाया है, बल्कि इसने आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। इसने एक क्लासिक 'स्टैगफ्लेशन' (महंगाई के साथ आर्थिक सुस्ती) का माहौल बना दिया है। आपूर्ति पक्ष से महंगाई बढ़ रही है, जबकि विकास कमजोर हो रहा है । इस अनोखी राय रखने वालों का तर्क है कि जैसे ही भू-राजनीतिक तनाव सामान्य होंगे, यह आपूर्ति झटका समाप्त हो जाएगा। इसलिए ECB को इस पर जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए।
यदि जेपी मॉर्गन और पिक्टेट का यह दांव सही साबित होता है, तो इसका यूरोपीय बॉन्ड बाजारों पर बड़ा असर होगा। अभी बाजार ने आक्रामक दर वृद्धि की कीमत तय कर रखी है, जिससे बॉन्ड यील्ड (प्रतिफल) बहु-वर्षीय उच्च स्तर के करीब हैं। यदि ECB उम्मीद से कम वृद्धि करता है, तो बाजार की यह 'हॉकिश' कीमत खत्म हो जाएगी और बॉन्ड यील्ड में गिरावट (यानी बॉन्ड की कीमतों में तेजी) आएगी ।
जेपी मॉर्गन के रणनीतिकारों ने अलग से यह भी नोट किया है कि शेयर बाजारों ने केंद्रीय बैंकों द्वारा दरें बढ़ाने के जोखिम को जरूरत से ज्यादा भांप लिया है। उनके अनुसार, इससे उपभोक्ता वस्तुओं और यूटिलिटीज जैसे रक्षात्मक क्षेत्रों में पलटाव का एक संभावित अवसर बन रहा है ।
निष्कर्ष यह है कि जहां पूरा बाजार एक लंबी और कठिन ब्याज वृद्धि यात्रा की तैयारी कर रहा है, वहीं दो प्रभावशाली संस्थान एक साहसिक, विपरीत दांव लगा रहे हैं। उनकी नजर में, ECB के लिए एकमात्र तार्किक रास्ता संयम बरतना है, चाहे वह केवल एक प्रतीकात्मक वृद्धि के रूप में हो या फिर पूरी तरह से स्थिर रहने के रूप में।
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जेपी मॉर्गन एसेट मैनेजमेंट को उम्मीद है कि ECB जून में सिर्फ एक बार ब्याज दर बढ़ाएगा, जबकि पिक्टेट का मानना है कि दरों को स्थिर रखना ही उचित होगा [10]।
जेपी मॉर्गन एसेट मैनेजमेंट को उम्मीद है कि ECB जून में सिर्फ एक बार ब्याज दर बढ़ाएगा, जबकि पिक्टेट का मानना है कि दरों को स्थिर रखना ही उचित होगा [10]। यह रुख बाजार की आम धारणा के बिल्कुल विपरीत है, जो ईरान युद्ध से उपजी ऊर्जा महंगाई के चलते साल के अंत तक 75 आधार अंकों की वृद्धि की उम्मीद कर रहा है [10]।
जेपी मॉर्गन का तर्क: यूरोजोन की कमजोर आर्थिक वृद्धि को देखते हुए ECB 'बीमा' के तौर पर सिर्फ एक बार दर बढ़ाकर रुक जाएगा [10]।