28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ अमेरिका-ईरान युद्ध, होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण, इतिहास का सबसे बड़ा तेल आपूर्ति संकट बन गया है। इसके झटके पूरी दुनिया की तरह यूरोपीय संघ (EU) और ब्रिटेन (UK) के ऊर्जा बाजारों में भी गहराई से महसूस किए जा रहे हैं। आइए, हर पहलू पर एक नज़र डालते हैं:
EU का जीवाश्म ईंधन आयात और लागत
- EU सीधे तौर पर ईरान से तेल का आयात नहीं करता, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य के लगभग पूरी तरह बंद होने से वैश्विक आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। सामान्यतः दुनिया का 20 से 25 प्रतिशत समुद्री तेल व्यापार इसी जलडमरूमध्य से होकर गुज़रता है
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। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इसे "वैश्विक तेल बाज़ार के इतिहास का सबसे बड़ा आपूर्ति व्यवधान" करार दिया है
।
- संघर्ष बढ़ने के बाद से, EU का दैनिक जीवाश्म ईंधन आयात बिल $58.7 करोड़ (लगभग ₹4,900 करोड़) से अधिक हो गया है
। मई 2026 की शुरुआत तक, युद्ध के कारण EU के जीवाश्म ईंधन आयात बिल में संचयी वृद्धि €2,200 करोड़ (लगभग ₹1,98,000 करोड़) को पार कर गई थी
।
- 2022 के रूस-यूक्रेन संकट के विपरीत, EU की गैस आपूर्ति को तत्काल भौतिक ख़तरा नहीं है (ईरान EU का प्रमुख गैस आपूर्तिकर्ता नहीं है), लेकिन कीमत का झटका गंभीर और लंबे समय तक रहने वाला है । ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत अवधि के अनुसार $120 से $164 प्रति बैरल तक पहुंचने का अनुमान था ।
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