चीन अपनी ताकतों—दुनिया का सबसे बड़ा AI पेटेंट पोर्टफोलियो, 6,200 से अधिक AI कंपनियां, और 1.2 ट्रिलियन युआन की मुख्य AI इंडस्ट्री—को 'खतरे' के बजाय वैश्विक AI विकास में योगदान करने की अपनी क्षमता के सबूत के रूप में प्रस्तुत करता है ।
दूसरी तरफ, पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस उन सबसे मुखर नेताओं में से हैं जो मानते हैं कि अमेरिका को यह AI प्रतियोगिता निर्णायक रूप से जीतनी चाहिए। फरवरी 2025 में स्टेट डिपार्टमेंट में एक संबोधन के दौरान राइस ने साफ शब्दों में कहा, "हमें यह रेस जीतनी ही होगी," क्योंकि उभरती हुई तकनीकें अमेरिकी कूटनीति का भविष्य तय करेंगी ।
राइस और उनके जैसे विचारकों के मुख्य तर्क इस प्रकार हैं:
अमेरिका ने 2025-2026 के दौरान चीन को एडवांस्ड AI चिप्स और सेमीकंडक्टर उपकरणों के निर्यात पर अपने नियंत्रणों को और सख्त किया है। चीन इसका लगातार विरोध करता है और इसे "सैन्य गठबंधन बढ़ाने और विकास को अवरुद्ध करने का प्रयास" कहता है ।
हालांकि, स्थिति सिर्फ टकराव की नहीं है। चीनी विदेश मंत्रालय ने बार-बार कहा है कि वह अमेरिका के साथ AI सहयोग के लिए तैयार है और हाल के चीन-अमेरिकी नेताओं के शिखर सम्मेलनों में AI पर चर्चा का उल्लेख किया है। फिलहाल, किसी औपचारिक द्विपक्षीय AI गवर्नेंस ढांचे की सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई है ।
एक बात गौर करने लायक है: इस विश्लेषण में हमें 2025-2026 के बीच अमेरिका-चीन के बीच बड़े लैंग्वेज मॉडल या रोबोटिक्स पर किसी पुष्ट संयुक्त अनुसंधान परियोजना का सबूत नहीं मिला। यह विषय अभी भी एक खुला प्रश्न बना हुआ है।
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