एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, ऑल्टमैन एक साल से भी अधिक समय से वाशिंगटन के गलियारों में इस विचार को बेच रहे हैं। उनका तर्क है कि यह एक ऐसा तरीका है जिससे आम जनता इस परिवर्तनकारी तकनीक के मुनाफे में हिस्सेदार बन सकेगी ।
यह पूरी चर्चा एक और दिलचस्प पहलू से जुड़ी है। NOTUS रिपोर्ट के मुताबिक, OpenAI और Anthropic दोनों ही अपने IPO (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) की तैयारी कर रहे हैं। ऑल्टमैन का यह प्रस्ताव मूल रूप से सरकार को IPO से पहले ही 'टेबल पर एक सीट' देने का है । सीधे शब्दों में कहें तो, कंपनियों के शेयर बाजार में उतरने से पहले ही सरकार एक हिस्सेदार बन जाएगी।
हालांकि OpenAI इस विचार के लिए तैयार है, लेकिन Anthropic का रुख बिल्कुल अलग है। रिपोर्ट के अनुसार, एंथ्रोपिक ने स्पष्ट रूप से अधिकारियों से कह दिया है कि वे सरकार को कोई इक्विटी देने में रुचि नहीं रखते ।
कंपनी की प्रमुख चिंता यह है कि सरकारी स्वामित्व उनके जिम्मेदार AI विकास के मिशन से समझौता कर सकता है। यह एक दार्शनिक अंतर को दर्शाता है, जहां एक कंपनी (OpenAI) सरकारी भागीदारी को एक अवसर के रूप में देखती है, वहीं दूसरी (Anthropic) इसे अपनी स्वतंत्रता के लिए खतरा मानती है।
AI कंपनियों में हिस्सेदारी की यह चर्चा एक बड़े संदर्भ में हो रही है, जो इस प्रशासन की नई आर्थिक नीति को दर्शाती है।
इस सौदे की सबसे खास बात यह है कि सरकार ने निवेश के बदले इन सभी कंपनियों में अल्पमत, गैर-नियंत्रणकारी इक्विटी हिस्सेदारी (Minority, Non-Controlling Equity Stakes) ली ।
यह क्वांटम निवेश कार्यक्रम AI के लिए प्रस्तावित मॉडल की एक जीती-जागती मिसाल है। अंतर सिर्फ इतना है कि AI के लिए यह चर्चा अभी शुरुआती और पूरी तरह स्वैच्छिक है, जबकि क्वांटम निवेश CHIPS अधिनियम के तहत एक कानूनी रूप से औपचारिक सौदा था ।
AI कंपनियों में सरकारी हिस्सेदारी का यह प्रस्ताव अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन यह अमेरिकी सरकार और टेक इंडस्ट्री के बीच संबंधों में एक बड़े बदलाव का संकेत है। सैम ऑल्टमैन की इस पहल से लेकर एंथ्रोपिक के विरोध तक, यह पूरा मामला आने वाले समय में गहन नीतिगत बहस को जन्म देगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार अन्य AI कंपनियों के साथ इस मॉडल पर आगे बढ़ पाती है और क्या यह 'जनता के लिए AI' का एक नया युग शुरू कर पाती है।
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