इस लेंस्ड और आवर्धित दृश्य का उपयोग करते हुए, टीम ने JWST के NIRSpec इंटीग्रल फील्ड स्पेक्ट्रोग्राफ का रुख किया। इस उपकरण ने छवि के हर पिक्सेल के लिए एक स्पेक्ट्रम प्राप्त किया, जिससे वैज्ञानिक आकाशगंगा के केंद्र से विभिन्न दूरी पर स्थित तारों के वेग का नक्शा बनाने में सफल रहे। इस तकनीक को 'तारकीय गतिकी' (Stellar Dynamics) कहा जाता है—ठीक वही विधि जिसका उपयोग हमारी अपनी आकाशगंगा, मिल्की वे, के केंद्रीय ब्लैक होल का वजन करने के लिए किया गया था, और जिसके लिए 2020 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला था ।
किसी महाकाय ब्लैक होल के जितने करीब तारे होते हैं, उनकी परिक्रमा गति उतनी ही तेज़ होती है। सरल केप्लरियन गति (Keplerian Motion) के नियमों का उपयोग करके, त्रिज्या के साथ तारकीय वेग कैसे बदलते हैं, इसका मॉडल तैयार करके टीम ने ब्लैक होल के 'प्रभाव क्षेत्र' (Sphere of Influence) की पहचान की—वह क्षेत्र जहां तारों की गति पर ब्लैक होल का गुरुत्वाकर्षण हावी होता है। इसने प्रत्यक्ष द्रव्यमान मापन को संभव बनाया। इस अध्ययन से पहले, तारकीय गतिकी द्वारा सबसे दूर का सीधा मापन केवल 70 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर एक ब्लैक होल के लिए किया गया था। MRG-M0138 ने उस रिकॉर्ड को दस गुना से भी अधिक पीछे छोड़ दिया है ।
मापन ने लगभग 6 अरब सौर द्रव्यमान वाले एक ब्लैक होल की पुष्टि की । इसकी मेज़बान आकाशगंगा, MRG-M0138, एक विशाल, लाल अण्डाकार आकाशगंगा (Elliptical Galaxy) है जिसने बहुत पहले ही नए तारे बनाना बंद कर दिया है। इसका केंद्रीय ब्लैक होल सुप्त है, मतलब वह इस समय बड़ी मात्रा में गैस को न तो अपनी ओर खींच रहा है और न ही गर्म कर रहा है
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ये निष्कर्ष एक हिंसक अतीत की ओर इशारा करते हैं। MRG-M0138 संभवतः एक समय एक चमकीला क्वासर रही होगी, जो बढ़ते हुए ब्लैक होल में सर्पिल होती गैस से संचालित होता था। इस सक्रिय चरण से निकली अपार ऊर्जा ने उसी गैस को गर्म कर दिया या बाहर निकाल दिया होगा जिसकी तारा निर्माण के लिए आवश्यकता होती है, जिससे आकाशगंगा की 'तारा फैक्ट्रियाँ' प्रभावी रूप से बंद हो गईं। इसलिए, आकाशगंगा की आज की समाप्त, शांत स्थिति और ब्लैक होल की सुप्तावस्था संभवतः एक-दूसरे से जुड़ी हैं; ब्लैक होल इतना बड़ा और शक्तिशाली हो गया कि उसने अपनी ही मेज़बान आकाशगंगा की तारा-निर्माण प्रक्रिया को ठप्प कर दिया ।
यह खोज हमारी उस बुनियादी सोच पर सीधी चोट करती है कि आकाशगंगाएं और ब्लैक होल एक साथ कैसे बढ़ते हैं। हमारे स्थानीय ब्रह्मांड में, एक केंद्रीय ब्लैक होल के द्रव्यमान और उसकी मेज़बान आकाशगंगा के केंद्रीय उभार (Bulge) के गुणों के बीच एक गहरा संबंध देखा जाता है, जो बताता है कि वे एक तालमेल में सह-विकास करते हैं। यह मापन प्रत्यक्ष प्रमाण देता है कि यह संबंध हमेशा से ऐसा नहीं था, और ब्लैक होल अपनी मेज़बान आकाशगंगाओं के तारों का निर्माण पूरा करने से पहले ही बन सकते हैं और विशाल आकार में विकसित हो सकते हैं।
आंकड़े बताते हैं कि प्रारंभिक ब्रह्मांड के कुछ सबसे सघन क्षेत्र अत्यंत तीव्र ब्लैक होल विकास के स्थल थे, जो आसपास की आकाशगंगा से आगे निकल गए । MRG-M0138 का मापन उन सरल सह-विकास मॉडलों को चुनौती देता है जहां ब्लैक होल और आकाशगंगा का विकास हमेशा एक-दूसरे से कसकर जुड़ा होता है। भविष्य में JWST, यूक्लिड, नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप, और जाइंट मैगलन टेलीस्कोप जैसी अगली पीढ़ी की भू-आधारित वेधशालाओं के सर्वेक्षण इस लेंसिंग और तारकीय गतिकी तकनीक को कई और आकाशगंगाओं पर लागू करने का लक्ष्य रखते हैं, जिससे ब्रह्मांडीय समय के साथ ब्लैक होल और आकाशगंगाओं के सह-विकास की एक सांख्यिकीय तस्वीर बनाई जा सके
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