जून 2026 की एक UN रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि AI डेटा सेंटर 2030 तक सालाना 945 TWh बिजली की खपत करने की राह पर हैं—जो वैश्विक कुल का लगभग 3% है—और इसका कार्बन उत्सर्जन अमेरिका में 50 से 100 लाख अतिरिक्त कारों के ब... रिपोर्ट में AI कंपनियों से अनिवार्य, मानकीकृत पर्यावरणीय रिपोर्टिंग की मांग की गई है और उपयोगकर्...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What are the key findings of the recent UN report on AI data centers' environmental footprint, including the projected electricity consumpti. Article summary: This is a newly published UN report (June 3, 2026) from the United Nations University's Institute for Water, Environment and Health. Here are the key findings:. Topic tags: general, academic, education, general web. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "AI is driving a surge in data center energy demand. Explore key data from 2024–2025 and forecasts for 2026, including infrastructure, costs," source context "Growing Energy Demand of AI - Data Centers 2024–2026 | TTMS" Reference image 2: visual subject "AI is driving a surge in data center energy demand. Explore key data from 2024–2025 and forecasts for 2026, includin
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेज़ी से बढ़ता दायरा अब एक ऐसा पर्यावरणीय पदचिह्न छोड़ रहा है जो किसी औद्योगीकृत राष्ट्र के बराबर है। संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय के जल, पर्यावरण एवं स्वास्थ्य संस्थान (UNU-INWEH) द्वारा 3 जून, 2026 को जारी एक विस्तृत रिपोर्ट इस बढ़ते संकट का अब तक का सबसे व्यापक लेखा-जोखा पेश करती है । यह निष्कर्ष एक कठोर चेतावनी है: AI को संचालित करने वाले वैश्विक डेटा सेंटर 2030 तक अपनी बिजली और पानी की खपत को दोगुने से भी अधिक करने की राह पर हैं, जिससे कार्बन उत्सर्जन, ई-कचरा और भूमि-उपयोग का ऐसा दबाव पैदा होगा जिस पर तत्काल नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
अगर वैश्विक डेटा सेंटर एक देश होते, तो 2025 में उनकी अनुमानित 448 टेरावॉट-घंटे (TWh) की बिजली खपत उन्हें वैश्विक स्तर पर 11वें स्थान पर रखती, जो लगभग पूरे फ्रांस देश के बराबर है । जैसे-जैसे AI का कार्यभार तेज़ होता है, रिपोर्ट के अनुमान दशक के अंत तक एक ऐसे संसाधन संकट की तस्वीर पेश करते हैं जो केवल बिजली से कहीं आगे तक फैला है।
UN की रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला अनुमान बिजली की खपत को लेकर है। 2030 तक, AI को संचालित करने वाले वैश्विक डेटा सेंटरों के सालाना 945 TWh बिजली की खपत करने का अनुमान है । यह आंकड़ा दुनिया की कुल बिजली उत्पादन का लगभग 3% है और पाकिस्तान, बांग्लादेश और नाइजीरिया—जिनकी संयुक्त आबादी 65 करोड़ से अधिक है—की वार्षिक बिजली खपत का लगभग तीन गुना है
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यह वृद्धि लगभग पूरी तरह AI के कारण हो रही है। AI-विशिष्ट डेटा सेंटरों की बिजली की मांग 2030 में 2023 की तुलना में 11 गुना अधिक होने की उम्मीद है। उस बिंदु पर, अकेले AI कार्यभार को उतनी ही बिजली की आवश्यकता होगी जितनी आज सभी पारंपरिक डेटा सेंटर मिलकर खपत करते हैं, जिससे AI संपूर्ण डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में ऊर्जा मांग के पीछे एक प्राथमिक शक्ति बन जाएगा ।
ऊर्जा उपयोग में यह बढ़ोतरी भारी कार्बन लागत के साथ आती है। रिपोर्ट का अनुमान है कि 2030 तक, AI डेटा सेंटर सालाना अतिरिक्त 2.4 से 4.4 करोड़ मीट्रिक टन CO₂ उत्सर्जित करेंगे । इसे संदर्भ में रखें तो, इस अनुमान का ऊपरी स्तर अमेरिकी सड़कों पर 1 करोड़ कारें और जोड़ने के उत्सर्जन के बराबर है
। रिपोर्ट की कवरेज में अन्य तुलनाएं कुल डेटा सेंटर उत्सर्जन की तुलना यूनाइटेड किंगडम के संपूर्ण वार्षिक उत्सर्जन से करती हैं, जो संभावित रूप से 40 करोड़ टन CO₂ समकक्ष तक पहुंच सकता है
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इन उत्सर्जनों में 2040 तक कार्बन-न्यूट्रल बिजली आपूर्ति की धारणा के बावजूद वृद्धि होने का अनुमान है, जो AI की बढ़ती ऊर्जा मांग के विशाल पैमाने को उजागर करता है ।
जहां सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बिजली और कार्बन है, रिपोर्ट इस बात पर ज़ोर देती है कि पानी एक गंभीर रूप से अनदेखा किया गया संसाधन है। जटिल AI मॉडलों को चलाने वाले सर्वरों को ठंडा करने के लिए आवश्यक पानी की मात्रा बहुत अधिक है।
अकेले संयुक्त राज्य अमेरिका में, AI सर्वरों की तैनाती से 2030 तक सालाना 731 से 1,125 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी की खपत होने का अनुमान है—जो लगभग 60 से 100 लाख अमेरिकियों की वार्षिक घरेलू जल उपयोग के बराबर है । वैश्विक स्तर पर, पानी का यह पदचिह्न चौंका देने वाला है। रिपोर्ट में पाया गया है कि 2030 में AI की कुल जल खपत उप-सहारा अफ्रीका में 130 करोड़ लोगों की बुनियादी वार्षिक घरेलू जल आवश्यकताओं के बराबर होगी
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AI बूम की पर्यावरणीय लागत परिचालन संसाधनों पर ही खत्म नहीं होती। रिपोर्ट इसके पदचिह्न के दो और महत्वपूर्ण आयामों को उजागर करती है:
UNU-INWEH की रिपोर्ट केवल समस्याओं की सूची नहीं है; यह कार्रवाई के लिए एक नीतिगत आह्वान है। यह चेतावनी देती है कि AI की वास्तविक लागत पूरे जीवनचक्र में फैली हुई है, और यह लागत अन्यायपूर्ण तरीके से वितरित की जा रही है, जिसमें विकासशील राष्ट्र पर्यावरणीय बोझ का असंगत हिस्सा वहन करते हैं जबकि अक्सर उन्हें आर्थिक लाभ कम देखने को मिलते हैं ।
रिपोर्ट की केंद्रीय मांग अनिवार्य, मानकीकृत पर्यावरणीय रिपोर्टिंग है।
रिपोर्ट अंतिम-उपयोगकर्ताओं पर भी जिम्मेदारी का एक हिस्सा डालती है, यह सुझाव देते हुए कि जब संभव हो, वे अपने कार्यों के लिए कम ऊर्जा-गहन AI उपकरणों का चयन करें, एक छोटा कदम जो सामूहिक रूप से तनावग्रस्त बिजली ग्रिड और जल आपूर्ति पर दबाव को कम कर सकता है ।
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जून 2026 की एक UN रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि AI डेटा सेंटर 2030 तक सालाना 945 TWh बिजली की खपत करने की राह पर हैं—जो वैश्विक कुल का लगभग 3% है—और इसका कार्बन उत्सर्जन अमेरिका में 50 से 100 लाख अतिरिक्त कारों के ब...
जून 2026 की एक UN रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि AI डेटा सेंटर 2030 तक सालाना 945 TWh बिजली की खपत करने की राह पर हैं—जो वैश्विक कुल का लगभग 3% है—और इसका कार्बन उत्सर्जन अमेरिका में 50 से 100 लाख अतिरिक्त कारों के ब... रिपोर्ट में AI कंपनियों से अनिवार्य, मानकीकृत पर्यावरणीय रिपोर्टिंग की मांग की गई है और उपयोगकर्ताओं से आग्रह किया गया है कि वे नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए सचेत रूप से कम ऊर्जा वाले AI उपकरण चुनें।
कार्बन के अलावा, अध्ययन पानी की खपत, भूमि उपयोग और ई वेस्ट के एक छिपे हुए संकट को उजागर करता है, और बताता है कि पर्यावरणीय बोझ का असंगत हिस्सा विकासशील देशों पर पड़ता है।