वैश्विक केंद्रीय बैंकों के भंडार में सोने ने अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड को पछाड़ा
2025 के अंत तक सोना वैश्विक केंद्रीय बैंक रिज़र्व का सबसे बड़ा घटक बन गया, इसकी हिस्सेदारी 27% तक पहुंच गई जबकि अमेरिकी सरकारी बॉन्ड गिरकर 22% पर आ गए, जिसके पीछे लगातार भू राजनीतिक तनाव और रिज़र्व में विविधता लाने की... सोने की कीमतों में तेज़ उछाल ने इस बदलाव को और बढ़ावा दिया, लेकिन केंद्रीय बैंकों का मुख्य उद्दे...
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2025 के अंत तक सोना वैश्विक केंद्रीय बैंक रिज़र्व का सबसे बड़ा घटक बन गया, इसकी हिस्सेदारी 27% तक पहुंच गई जबकि अमेरिकी सरकारी बॉन्ड गिरकर 22% पर आ गए, जिसके पीछे लगातार भू राजनीतिक तनाव और रिज़र्व में विविधता लाने की...
सोने की कीमतों में तेज़ उछाल ने इस बदलाव को और बढ़ावा दिया, लेकिन केंद्रीय बैंकों का मुख्य उद्देश्य रिज़र्व में विविधता लाना और भू राजनीतिक जोखिमों से बचाव करना है, न कि अमेरिकी डॉलर को पूरी तरह से छोड़ना।
हालांकि सोना अब शीर्ष आरक्षित परिसंपत्ति वर्गों में सबसे ऊपर है, लेकिन इसमें प्रमुख मुद्राओं की तरह यील्ड (ब्याज) और तरलता नहीं है, जो इसे आधुनिक रिज़र्व प्रबंधन में एक विकल्प के बजाय एक रणनीतिक पूरक के रूप में स्थापि...
What does the European Central Bank's latest annual report reveal about gold overtaking US Treasuries as the world's largest reserve asset,Central banks globally now hold more gold than US government bonds, according to the ECB's June 2026 report.
AI संकेत
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दुनिया के केंद्रीय बैंकों की तिजोरियों में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, सोना अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड को पीछे छोड़ते हुए वैश्विक केंद्रीय बैंक रिज़र्व (भंडार) का सबसे बड़ा घटक बन गया है । यह भू-राजनीतिक अस्थिरता और आरक्षित विविधीकरण की रणनीतिक चाह से प्रेरित एक अहम पड़ाव है।
2025 के अंत तक रिज़र्व संरचना में बदलाव
2025 के अंत तक, वैश्विक केंद्रीय बैंकों की आरक्षित परिसंपत्तियों में सोने की हिस्सेदारी 27% तक पहुंच गई, जो एक साल पहले 20% थी। इसी अवधि में, अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड की हिस्सेदारी 25% से गिरकर 22% हो गई, जबकि यूरो-मूल्यवर्ग की आरक्षित परिसंपत्तियां 15% पर स्थिर रहीं ।
यह बदलाव सिर्फ बही-खातों का हेर-फेर नहीं है। यह आधिकारिक क्षेत्र की आक्रामक खरीदारी और मौजूदा होल्डिंग्स पर बड़े पैमाने पर मूल्यांकन लाभ दोनों को दर्शाता है। खुद ECB की बैलेंस शीट इस वैश्विक प्रवृत्ति का एक छोटा रूप है। 2025 में, केवल सोने की बाजार कीमत में यूरो के संदर्भ में वृद्धि के कारण, ECB की सोने की होल्डिंग्स का मूल्य हो गया। इसी अवधि में, अमेरिकी डॉलर, जापानी येन और चीनी रॅन्मिन्बी की विदेशी मुद्रा होल्डिंग्स का मूल्य €4.8 अरब घटकर €55.2 अरब हो गया, जिसका आंशिक कारण यूरो के मुकाबले इन मुद्राओं का मूल्यह्रास था ।
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इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
"वैश्विक केंद्रीय बैंकों के भंडार में सोने ने अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड को पछाड़ा" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
2025 के अंत तक सोना वैश्विक केंद्रीय बैंक रिज़र्व का सबसे बड़ा घटक बन गया, इसकी हिस्सेदारी 27% तक पहुंच गई जबकि अमेरिकी सरकारी बॉन्ड गिरकर 22% पर आ गए, जिसके पीछे लगातार भू राजनीतिक तनाव और रिज़र्व में विविधता लाने की...
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
2025 के अंत तक सोना वैश्विक केंद्रीय बैंक रिज़र्व का सबसे बड़ा घटक बन गया, इसकी हिस्सेदारी 27% तक पहुंच गई जबकि अमेरिकी सरकारी बॉन्ड गिरकर 22% पर आ गए, जिसके पीछे लगातार भू राजनीतिक तनाव और रिज़र्व में विविधता लाने की... सोने की कीमतों में तेज़ उछाल ने इस बदलाव को और बढ़ावा दिया, लेकिन केंद्रीय बैंकों का मुख्य उद्देश्य रिज़र्व में विविधता लाना और भू राजनीतिक जोखिमों से बचाव करना है, न कि अमेरिकी डॉलर को पूरी तरह से छोड़ना।
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
हालांकि सोना अब शीर्ष आरक्षित परिसंपत्ति वर्गों में सबसे ऊपर है, लेकिन इसमें प्रमुख मुद्राओं की तरह यील्ड (ब्याज) और तरलता नहीं है, जो इसे आधुनिक रिज़र्व प्रबंधन में एक विकल्प के बजाय एक रणनीतिक पूरक के रूप में स्थापि...
वैश्विक केंद्रीय बैंकों के भंडार में सोने ने अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड को पछाड़ा
2025 के अंत तक सोना वैश्विक केंद्रीय बैंक रिज़र्व का सबसे बड़ा घटक बन गया, इसकी हिस्सेदारी 27% तक पहुंच गई जबकि अमेरिकी सरकारी बॉन्ड गिरकर 22% पर आ गए, जिसके पीछे लगातार भू राजनीतिक तनाव और रिज़र्व में विविधता लाने की... सोने की कीमतों में तेज़ उछाल ने इस बदलाव को और बढ़ावा दिया, लेकिन केंद्रीय बैंकों का मुख्य उद्दे...
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सोने की कीमतों में तेज़ उछाल ने इस बदलाव को और बढ़ावा दिया, लेकिन केंद्रीय बैंकों का मुख्य उद्देश्य रिज़र्व में विविधता लाना और भू राजनीतिक जोखिमों से बचाव करना है, न कि अमेरिकी डॉलर को पूरी तरह से छोड़ना।
हालांकि सोना अब शीर्ष आरक्षित परिसंपत्ति वर्गों में सबसे ऊपर है, लेकिन इसमें प्रमुख मुद्राओं की तरह यील्ड (ब्याज) और तरलता नहीं है, जो इसे आधुनिक रिज़र्व प्रबंधन में एक विकल्प के बजाय एक रणनीतिक पूरक के रूप में स्थापि...
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दुनिया के केंद्रीय बैंकों की तिजोरियों में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, सोना अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड को पीछे छोड़ते हुए वैश्विक केंद्रीय बैंक रिज़र्व (भंडार) का सबसे बड़ा घटक बन गया है । यह भू-राजनीतिक अस्थिरता और आरक्षित विविधीकरण की रणनीतिक चाह से प्रेरित एक अहम पड़ाव है।
2025 के अंत तक रिज़र्व संरचना में बदलाव
2025 के अंत तक, वैश्विक केंद्रीय बैंकों की आरक्षित परिसंपत्तियों में सोने की हिस्सेदारी 27% तक पहुंच गई, जो एक साल पहले 20% थी। इसी अवधि में, अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड की हिस्सेदारी 25% से गिरकर 22% हो गई, जबकि यूरो-मूल्यवर्ग की आरक्षित परिसंपत्तियां 15% पर स्थिर रहीं ।
यह बदलाव सिर्फ बही-खातों का हेर-फेर नहीं है। यह आधिकारिक क्षेत्र की आक्रामक खरीदारी और मौजूदा होल्डिंग्स पर बड़े पैमाने पर मूल्यांकन लाभ दोनों को दर्शाता है। खुद ECB की बैलेंस शीट इस वैश्विक प्रवृत्ति का एक छोटा रूप है। 2025 में, केवल सोने की बाजार कीमत में यूरो के संदर्भ में वृद्धि के कारण, ECB की सोने की होल्डिंग्स का मूल्य हो गया। इसी अवधि में, अमेरिकी डॉलर, जापानी येन और चीनी रॅन्मिन्बी की विदेशी मुद्रा होल्डिंग्स का मूल्य €4.8 अरब घटकर €55.2 अरब हो गया, जिसका आंशिक कारण यूरो के मुकाबले इन मुद्राओं का मूल्यह्रास था ।
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"वैश्विक केंद्रीय बैंकों के भंडार में सोने ने अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड को पछाड़ा" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
2025 के अंत तक सोना वैश्विक केंद्रीय बैंक रिज़र्व का सबसे बड़ा घटक बन गया, इसकी हिस्सेदारी 27% तक पहुंच गई जबकि अमेरिकी सरकारी बॉन्ड गिरकर 22% पर आ गए, जिसके पीछे लगातार भू राजनीतिक तनाव और रिज़र्व में विविधता लाने की...
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
2025 के अंत तक सोना वैश्विक केंद्रीय बैंक रिज़र्व का सबसे बड़ा घटक बन गया, इसकी हिस्सेदारी 27% तक पहुंच गई जबकि अमेरिकी सरकारी बॉन्ड गिरकर 22% पर आ गए, जिसके पीछे लगातार भू राजनीतिक तनाव और रिज़र्व में विविधता लाने की... सोने की कीमतों में तेज़ उछाल ने इस बदलाव को और बढ़ावा दिया, लेकिन केंद्रीय बैंकों का मुख्य उद्देश्य रिज़र्व में विविधता लाना और भू राजनीतिक जोखिमों से बचाव करना है, न कि अमेरिकी डॉलर को पूरी तरह से छोड़ना।
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
हालांकि सोना अब शीर्ष आरक्षित परिसंपत्ति वर्गों में सबसे ऊपर है, लेकिन इसमें प्रमुख मुद्राओं की तरह यील्ड (ब्याज) और तरलता नहीं है, जो इसे आधुनिक रिज़र्व प्रबंधन में एक विकल्प के बजाय एक रणनीतिक पूरक के रूप में स्थापि...
भू-राजनीतिक कारण: केंद्रीय बैंक क्यों खरीद रहे हैं?
ECB की अध्यक्ष क्रिस्टीन लगार्ड और उपाध्यक्ष लुइस डी गिंडोस ने इस प्रवृत्ति के पीछे लगातार भू-राजनीतिक तनाव को एक प्राथमिक बल बताया है । इस बदलाव की जड़ें 2022 में देखी जा सकती हैं, जब पश्चिमी देशों ने यूक्रेन पर आक्रमण के बाद रूस के डॉलर भंडार को स्थिर (फ्रीज़) कर दिया था। इस कार्रवाई ने दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के बीच आरक्षित परिसंपत्तियों की असुरक्षा का एक मौलिक पुनर्मूल्यांकन शुरू कर दिया ।
विश्व स्वर्ण परिषद (WGC) ने करीब 60 केंद्रीय बैंकों पर एक सर्वेक्षण किया, जिसे ECB ने उद्धृत किया, और आधिकारिक सोने की मांग के प्रमुख चालकों की पहचान की: पारंपरिक आरक्षित मुद्राओं से विविधीकरण, भू-राजनीतिक जोखिम के खिलाफ बचाव, और संकट के समय में दीर्घकालिक मूल्य भंडार (स्टोर ऑफ वैल्यू) की इच्छा । ECB के अक्टूबर 2025 के मौद्रिक नीति खाते ने नोट किया कि सोने की तेजी "शुरुआत में केंद्रीय बैंकों, विशेष रूप से उभरते बाजारों में, द्वारा अपने भंडार में विविधता लाने से प्रेरित थी," इससे पहले कि इसे संस्थागत और खुदरा निवेशकों ने मजबूत किया ।
मूल्यांकन प्रभावों की भूमिका
सोने की बढ़ती कीमत के मूल्यांकन प्रभाव (वैल्यूएशन इफ़ेक्ट्स) भंडार में इसकी बढ़ती हिस्सेदारी का एक प्रमुख प्रवर्धक रहे हैं। ECB के अक्टूबर 2025 की बैठक के खाते में देखा गया कि सोने की तेजी ने "ऐतिहासिक सहसंबंधों को खारिज कर दिया" क्योंकि मजबूत अमेरिकी डॉलर और उच्च वास्तविक प्रतिफल (यील्ड) के बावजूद कीमतें बढ़ीं । इसका मतलब है कि भले ही केंद्रीय बैंकों ने एक भी अतिरिक्त औंस नहीं खरीदा होता, फिर भी उनके मौजूदा सोने के भंडार का बाजार मूल्य और इस तरह हिस्सेदारी काफी बढ़ जाती।
उदाहरण के लिए, जर्मनी के बुंडेसबैंक ने बताया कि उसकी सोने की स्थिति एक ऐतिहासिक उच्च स्तर €395 अरब पर पहुंच गई, जो एक ही वर्ष में मूल्यांकन-प्रेरित €125 अरब की वृद्धि थी । वैश्विक स्तर पर, भंडार में सोने की बढ़ती हिस्सेदारी सक्रिय खरीद और मौजूदा स्टॉक के निष्क्रिय पुनर्मूल्यांकन दोनों का प्रतिबिंब है ।
विविधीकरण, न कि केवल डी-डॉलरीकरण
सोने की ओर रुख एक व्यापक आरक्षित विविधीकरण प्रवृत्ति का हिस्सा है, लेकिन इसे केवल अमेरिकी डॉलर से पलायन के रूप में अतिरंजित नहीं करना महत्वपूर्ण है। जून 2026 में प्रकाशित एक फेडरल रिज़र्व पेपर ने निष्कर्ष निकाला कि अधिकांश देशों की सोने की खरीद "अंतर्राष्ट्रीय भंडार के मामूली विविधीकरण" को दर्शाती है, न कि पूर्ण डी-डॉलरीकरण की रणनीति को । डॉलर-मूल्यवर्ग की संपत्तियां अभी भी वैश्विक भंडार का सबसे बड़ा समग्र हिस्सा (42%) दर्शाती हैं, भले ही अमेरिकी ट्रेज़री विशेष रूप से सोने से पीछे रह गई हों ।
विविधीकरण कई मोर्चों पर हो रहा है। ECB की जून 2025 की रिपोर्ट ने नोट किया कि ऑस्ट्रेलियाई और कनाडाई डॉलर जैसी गैर-पारंपरिक आरक्षित मुद्राओं की संयुक्त हिस्सेदारी बढ़कर 9.6% हो गई, जो यूक्रेन पर आक्रमण से पहले के स्तर से 2.4 प्रतिशत अंक अधिक है। इसके अतिरिक्त, सर्वेक्षण आंकड़ों ने संकेत दिया कि दो-तिहाई रिज़र्व मैनेजरों को अपने सोने के आवंटन को और बढ़ाने की उम्मीद थी ।
मार्च 2026 तक न्यूयॉर्क फेड में अमेरिकी ट्रेज़री होल्डिंग्स में $82 बिलियन की गिरावट से जुड़ा एक अलग, नाटकीय डेटा बिंदु इस अस्थिर वातावरण को रेखांकित करता है। इस बिकवाली का कारण बड़े पैमाने पर तुर्की, भारत और थाईलैंड जैसे तेल-आयातक देशों को बताया गया, जिन्होंने ईरान युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के बाद अपनी मुद्राओं को सहारा देने और ऊर्जा आयात के भुगतान के लिए डॉलर भंडार को भुनाया । हालांकि यह सोने के उदय का प्रत्यक्ष कारण नहीं है, यह तीव्र तरलता दबावों को दर्शाता है जो गैर-डॉलर आरक्षित परिसंपत्तियों को अधिक आकर्षक बना रहे हैं।
2025 में सबसे बड़े आधिकारिक क्षेत्र के सोना खरीदार
2025 में केंद्रीय बैंकों की शुद्ध सोने की खरीद कुल मिलाकर 850 टन रही, जो 2024 के 1,045 टन के रिकॉर्ड से कम है लेकिन फिर भी ऐतिहासिक मानदंडों से कहीं ऊपर है । इस मांग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उभरते बाजारों से आया।
विश्व स्वर्ण परिषद और अन्य स्रोतों के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं:
पोलैंड: नेशनल बैंक ऑफ पोलैंड लगातार दूसरे वर्ष सबसे बड़ा खरीदार रहा, जिसने 550 टन के भंडार तक पहुंचने के लिए लगभग 102 टन जोड़े। इसने अपने लक्ष्य आवंटन को कुल भंडार का 30% तक बढ़ाकर सोने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की ।
कज़ाखस्तान: नेशनल बैंक ऑफ कज़ाखस्तान दूसरा सबसे बड़ा खरीदार था, जिसने घरेलू उत्पादन से खरीद द्वारा संचालित एक रिकॉर्ड वर्ष में लगभग 57 टन जोड़े ।
ब्राज़ील: सेंट्रल बैंक ऑफ ब्राज़ील ने चार साल के अंतराल के बाद बाजार में फिर से प्रवेश किया, कुछ महीनों के भीतर 43 टन खरीदकर अपना कुल 172 टन कर लिया ।
चीन: पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने अपनी खरीद का सिलसिला जारी रखा, लगातार 17 महीनों में 27 टन जोड़कर अपनी आधिकारिक रूप से रिपोर्ट की गई होल्डिंग्स को 2,306 टन तक पहुंचा दिया ।
तुर्की: सेंट्रल बैंक ऑफ तुर्की एक स्थिर संचयकर्ता बना रहा, जिसने अपनी बड़ी होल्डिंग्स में और 22 टन जोड़े ।
आरक्षित परिसंपत्ति के रूप में सोने की संरचनात्मक सीमाएं
सोने के उदय के बावजूद, ECB और अन्य विश्लेषक सावधान करते हैं कि यह मुद्रा-आधारित आरक्षित प्रणालियों का पूर्ण प्रतिस्थापन नहीं है। केंद्रीय बैंकरों के एक WGC सर्वेक्षण ने सोना रखने की प्रमुख प्रेरणाओं - विविधीकरण और भू-राजनीतिक बचाव - का हवाला दिया, जो स्पष्ट रूप से ब्याज देने वाले सरकारी बॉन्ड से इसकी अलग भूमिका को उजागर करता है ।
प्रमुख आधिकारिक आरक्षित परिसंपत्तियों की तुलना में सोने की प्रमुख संरचनात्मक सीमाओं में शामिल हैं:
कोई प्रतिफल (यील्ड) नहीं: सोना कूपन आय प्रदान नहीं करता है, जो इसे उच्च-ब्याज-दर वाले माहौल में आय-उत्पादक परिसंपत्ति के रूप में कम आकर्षक बनाता है ।
भौतिक भंडारण: एक भौतिक परिसंपत्ति के रूप में, सोने पर अभिरक्षा, तिजोरी और बीमा लागत आती है जो इलेक्ट्रॉनिक प्रतिभूतियों पर लागू नहीं होती हैं ।
हस्तक्षेप के लिए तरलता: सोना मूल्य का उत्कृष्ट भंडार है लेकिन दिन-प्रतिदिन के विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप और निपटान के लिए तरल विदेशी-मुद्रा जमा या प्रतिभूतियों की तुलना में तत्काल कम प्रयोग करने योग्य है ।
मूल्य अस्थिरता: ECB ने नोट किया कि सोने की तेज तेजी ने "ऐतिहासिक सहसंबंधों को खारिज कर दिया," अन्य परिसंपत्ति वर्गों के सापेक्ष अप्रत्याशित मूल्य उतार-चढ़ाव की इसकी क्षमता को उजागर करता है ।
मापनीयता (स्केलेबिलिटी): सोने का कार्य मुद्रा-आधारित आरक्षित परिसंपत्तियों के पूरक के रूप में सबसे अच्छी तरह से समझा जाता है, न कि प्रमुख सरकारी बॉन्ड बाजारों की गहराई और परिचालन लचीलेपन के लिए एक मापनीय विकल्प के रूप में ।
आरक्षित-परिसंपत्ति लीडरबोर्ड के शीर्ष पर सोने का उदय एक ऐतिहासिक क्षण है जो भू-राजनीतिक यथास्थिति के प्रति गहरी बेचैनी का संकेत देता है। फिर भी, इसकी सीमाएं सुनिश्चित करती हैं कि वैश्विक वित्तीय प्रणाली में प्रमुख आधिकारिक मुद्राओं और उनके सरकारी बॉन्ड बाजारों की मूलभूत भूमिका बरकरार रहे।
भू-राजनीतिक कारण: केंद्रीय बैंक क्यों खरीद रहे हैं?
ECB की अध्यक्ष क्रिस्टीन लगार्ड और उपाध्यक्ष लुइस डी गिंडोस ने इस प्रवृत्ति के पीछे लगातार भू-राजनीतिक तनाव को एक प्राथमिक बल बताया है । इस बदलाव की जड़ें 2022 में देखी जा सकती हैं, जब पश्चिमी देशों ने यूक्रेन पर आक्रमण के बाद रूस के डॉलर भंडार को स्थिर (फ्रीज़) कर दिया था। इस कार्रवाई ने दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के बीच आरक्षित परिसंपत्तियों की असुरक्षा का एक मौलिक पुनर्मूल्यांकन शुरू कर दिया ।
विश्व स्वर्ण परिषद (WGC) ने करीब 60 केंद्रीय बैंकों पर एक सर्वेक्षण किया, जिसे ECB ने उद्धृत किया, और आधिकारिक सोने की मांग के प्रमुख चालकों की पहचान की: पारंपरिक आरक्षित मुद्राओं से विविधीकरण, भू-राजनीतिक जोखिम के खिलाफ बचाव, और संकट के समय में दीर्घकालिक मूल्य भंडार (स्टोर ऑफ वैल्यू) की इच्छा । ECB के अक्टूबर 2025 के मौद्रिक नीति खाते ने नोट किया कि सोने की तेजी "शुरुआत में केंद्रीय बैंकों, विशेष रूप से उभरते बाजारों में, द्वारा अपने भंडार में विविधता लाने से प्रेरित थी," इससे पहले कि इसे संस्थागत और खुदरा निवेशकों ने मजबूत किया ।
मूल्यांकन प्रभावों की भूमिका
सोने की बढ़ती कीमत के मूल्यांकन प्रभाव (वैल्यूएशन इफ़ेक्ट्स) भंडार में इसकी बढ़ती हिस्सेदारी का एक प्रमुख प्रवर्धक रहे हैं। ECB के अक्टूबर 2025 की बैठक के खाते में देखा गया कि सोने की तेजी ने "ऐतिहासिक सहसंबंधों को खारिज कर दिया" क्योंकि मजबूत अमेरिकी डॉलर और उच्च वास्तविक प्रतिफल (यील्ड) के बावजूद कीमतें बढ़ीं । इसका मतलब है कि भले ही केंद्रीय बैंकों ने एक भी अतिरिक्त औंस नहीं खरीदा होता, फिर भी उनके मौजूदा सोने के भंडार का बाजार मूल्य और इस तरह हिस्सेदारी काफी बढ़ जाती।
उदाहरण के लिए, जर्मनी के बुंडेसबैंक ने बताया कि उसकी सोने की स्थिति एक ऐतिहासिक उच्च स्तर €395 अरब पर पहुंच गई, जो एक ही वर्ष में मूल्यांकन-प्रेरित €125 अरब की वृद्धि थी । वैश्विक स्तर पर, भंडार में सोने की बढ़ती हिस्सेदारी सक्रिय खरीद और मौजूदा स्टॉक के निष्क्रिय पुनर्मूल्यांकन दोनों का प्रतिबिंब है ।
विविधीकरण, न कि केवल डी-डॉलरीकरण
सोने की ओर रुख एक व्यापक आरक्षित विविधीकरण प्रवृत्ति का हिस्सा है, लेकिन इसे केवल अमेरिकी डॉलर से पलायन के रूप में अतिरंजित नहीं करना महत्वपूर्ण है। जून 2026 में प्रकाशित एक फेडरल रिज़र्व पेपर ने निष्कर्ष निकाला कि अधिकांश देशों की सोने की खरीद "अंतर्राष्ट्रीय भंडार के मामूली विविधीकरण" को दर्शाती है, न कि पूर्ण डी-डॉलरीकरण की रणनीति को । डॉलर-मूल्यवर्ग की संपत्तियां अभी भी वैश्विक भंडार का सबसे बड़ा समग्र हिस्सा (42%) दर्शाती हैं, भले ही अमेरिकी ट्रेज़री विशेष रूप से सोने से पीछे रह गई हों ।
विविधीकरण कई मोर्चों पर हो रहा है। ECB की जून 2025 की रिपोर्ट ने नोट किया कि ऑस्ट्रेलियाई और कनाडाई डॉलर जैसी गैर-पारंपरिक आरक्षित मुद्राओं की संयुक्त हिस्सेदारी बढ़कर 9.6% हो गई, जो यूक्रेन पर आक्रमण से पहले के स्तर से 2.4 प्रतिशत अंक अधिक है। इसके अतिरिक्त, सर्वेक्षण आंकड़ों ने संकेत दिया कि दो-तिहाई रिज़र्व मैनेजरों को अपने सोने के आवंटन को और बढ़ाने की उम्मीद थी ।
मार्च 2026 तक न्यूयॉर्क फेड में अमेरिकी ट्रेज़री होल्डिंग्स में $82 बिलियन की गिरावट से जुड़ा एक अलग, नाटकीय डेटा बिंदु इस अस्थिर वातावरण को रेखांकित करता है। इस बिकवाली का कारण बड़े पैमाने पर तुर्की, भारत और थाईलैंड जैसे तेल-आयातक देशों को बताया गया, जिन्होंने ईरान युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के बाद अपनी मुद्राओं को सहारा देने और ऊर्जा आयात के भुगतान के लिए डॉलर भंडार को भुनाया । हालांकि यह सोने के उदय का प्रत्यक्ष कारण नहीं है, यह तीव्र तरलता दबावों को दर्शाता है जो गैर-डॉलर आरक्षित परिसंपत्तियों को अधिक आकर्षक बना रहे हैं।
2025 में सबसे बड़े आधिकारिक क्षेत्र के सोना खरीदार
2025 में केंद्रीय बैंकों की शुद्ध सोने की खरीद कुल मिलाकर 850 टन रही, जो 2024 के 1,045 टन के रिकॉर्ड से कम है लेकिन फिर भी ऐतिहासिक मानदंडों से कहीं ऊपर है । इस मांग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उभरते बाजारों से आया।
विश्व स्वर्ण परिषद और अन्य स्रोतों के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं:
पोलैंड: नेशनल बैंक ऑफ पोलैंड लगातार दूसरे वर्ष सबसे बड़ा खरीदार रहा, जिसने 550 टन के भंडार तक पहुंचने के लिए लगभग 102 टन जोड़े। इसने अपने लक्ष्य आवंटन को कुल भंडार का 30% तक बढ़ाकर सोने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की ।
कज़ाखस्तान: नेशनल बैंक ऑफ कज़ाखस्तान दूसरा सबसे बड़ा खरीदार था, जिसने घरेलू उत्पादन से खरीद द्वारा संचालित एक रिकॉर्ड वर्ष में लगभग 57 टन जोड़े ।
ब्राज़ील: सेंट्रल बैंक ऑफ ब्राज़ील ने चार साल के अंतराल के बाद बाजार में फिर से प्रवेश किया, कुछ महीनों के भीतर 43 टन खरीदकर अपना कुल 172 टन कर लिया ।
चीन: पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने अपनी खरीद का सिलसिला जारी रखा, लगातार 17 महीनों में 27 टन जोड़कर अपनी आधिकारिक रूप से रिपोर्ट की गई होल्डिंग्स को 2,306 टन तक पहुंचा दिया ।
तुर्की: सेंट्रल बैंक ऑफ तुर्की एक स्थिर संचयकर्ता बना रहा, जिसने अपनी बड़ी होल्डिंग्स में और 22 टन जोड़े ।
आरक्षित परिसंपत्ति के रूप में सोने की संरचनात्मक सीमाएं
सोने के उदय के बावजूद, ECB और अन्य विश्लेषक सावधान करते हैं कि यह मुद्रा-आधारित आरक्षित प्रणालियों का पूर्ण प्रतिस्थापन नहीं है। केंद्रीय बैंकरों के एक WGC सर्वेक्षण ने सोना रखने की प्रमुख प्रेरणाओं - विविधीकरण और भू-राजनीतिक बचाव - का हवाला दिया, जो स्पष्ट रूप से ब्याज देने वाले सरकारी बॉन्ड से इसकी अलग भूमिका को उजागर करता है ।
प्रमुख आधिकारिक आरक्षित परिसंपत्तियों की तुलना में सोने की प्रमुख संरचनात्मक सीमाओं में शामिल हैं:
कोई प्रतिफल (यील्ड) नहीं: सोना कूपन आय प्रदान नहीं करता है, जो इसे उच्च-ब्याज-दर वाले माहौल में आय-उत्पादक परिसंपत्ति के रूप में कम आकर्षक बनाता है ।
भौतिक भंडारण: एक भौतिक परिसंपत्ति के रूप में, सोने पर अभिरक्षा, तिजोरी और बीमा लागत आती है जो इलेक्ट्रॉनिक प्रतिभूतियों पर लागू नहीं होती हैं ।
हस्तक्षेप के लिए तरलता: सोना मूल्य का उत्कृष्ट भंडार है लेकिन दिन-प्रतिदिन के विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप और निपटान के लिए तरल विदेशी-मुद्रा जमा या प्रतिभूतियों की तुलना में तत्काल कम प्रयोग करने योग्य है ।
मूल्य अस्थिरता: ECB ने नोट किया कि सोने की तेज तेजी ने "ऐतिहासिक सहसंबंधों को खारिज कर दिया," अन्य परिसंपत्ति वर्गों के सापेक्ष अप्रत्याशित मूल्य उतार-चढ़ाव की इसकी क्षमता को उजागर करता है ।
मापनीयता (स्केलेबिलिटी): सोने का कार्य मुद्रा-आधारित आरक्षित परिसंपत्तियों के पूरक के रूप में सबसे अच्छी तरह से समझा जाता है, न कि प्रमुख सरकारी बॉन्ड बाजारों की गहराई और परिचालन लचीलेपन के लिए एक मापनीय विकल्प के रूप में ।
आरक्षित-परिसंपत्ति लीडरबोर्ड के शीर्ष पर सोने का उदय एक ऐतिहासिक क्षण है जो भू-राजनीतिक यथास्थिति के प्रति गहरी बेचैनी का संकेत देता है। फिर भी, इसकी सीमाएं सुनिश्चित करती हैं कि वैश्विक वित्तीय प्रणाली में प्रमुख आधिकारिक मुद्राओं और उनके सरकारी बॉन्ड बाजारों की मूलभूत भूमिका बरकरार रहे।