हास ने यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने निर्यात नियंत्रणों पर चिंता जताई है। इससे पहले ऑक्सफोर्ड में फाउंडर्स फोरम ग्लोबल कॉन्फ्रेंस में एनवीडिया के जेन्सन हुआंग के रुख का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा था कि तकनीकी पहुंच को सीमित करना 'उपभोक्ताओं के लिए अच्छा नहीं है' और इससे 'पाई और छोटी हो जाती है' ।
उनकी दलील का रणनीतिक पहलू यह है कि अगर अमेरिका बहुत सख्त नियंत्रण लगाता है, तो वह चीन को एक मजबूत, स्वतंत्र और वैकल्पिक तकनीकी इकोसिस्टम विकसित करने के लिए मजबूर कर देगा। इससे न केवल अमेरिकी कंपनियों का बाजार सिकुड़ेगा, बल्कि लंबे समय में एक नया प्रतिस्पर्धी भी खड़ा हो जाएगा।
हास का बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी नीति बेहद अस्थिर रही है:
उसी Computex मंच से, हास ने यह भी घोषणा की कि चीनी टेक दिग्गज बाइटडांस (TikTok की मूल कंपनी) और अमेरिकी क्लाउड फर्म ओरेकल, आर्म के इन-हाउस AGI डेटा सेंटर CPU का इस्तेमाल करने वाले नवीनतम ग्राहक हैं । यह जानकारी निर्यात नियंत्रणों की जटिलता को और बढ़ा देती है, क्योंकि अब यह सवाल उठता है कि क्या बाइटडांस जैसी चीनी कंपनियों तक ये चिप्स पहुंचाने पर भविष्य में रोक लगेगी।
रेने हास की टिप्पणी एक जमीनी हकीकत की ओर इशारा करती है। जब एक बुनियादी तकनीक इतनी सर्वव्यापी हो जाए, तो उसे केवल भू-राजनीतिक इरादों से रोक पाना एक तकनीकी दुःस्वप्न बन जाता है। अमेरिका के लिए चुनौती यह होगी कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंताओं और एक वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की वास्तविकता के बीच संतुलन कैसे बिठाता है, जो 'तेल' की तरह फैली हुई है।
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