ईसीबी अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड ने इस रिपोर्ट के साथ जारी अपने वक्तव्य में स्पष्ट किया कि यूरोप को आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, "आत्मसंतुष्टि के लिए कोई जगह नहीं है, क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक प्रणाली में विखंडन (fragmentation) बढ़ रहा है" ।
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों और स्टेबलकॉइन (stablecoins) जैसे नवाचारों के बीच, भुगतान के साधन तेज़ी से बदल रहे हैं, जिससे यूरो जैसी पारंपरिक मुद्राओं के पीछे छूट जाने का खतरा पैदा हो गया है ।
लेगार्ड ने कहा कि यूरो को वास्तव में एक वैश्विक मुद्रा बनाने के लिए यूरोप को गहरे आर्थिक और वित्तीय एकीकरण की दिशा में तेज़ी से कदम उठाने होंगे। उन्होंने विशेष रूप से दो प्रमुख परियोजनाओं को पूरा करने का आह्वान किया:
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वैश्विक व्यापार नीतियों में आ रहे बदलावों का जवाब कम व्यापार एकीकरण से नहीं, बल्कि ज़्यादा व्यापार एकीकरण से दिया जाना चाहिए। इसका अर्थ है कि यूरोप को न केवल वैश्विक साझेदारों के साथ, बल्कि यूरोपीय संघ के भीतर भी व्यापार संबंधों को और मज़बूत करना होगा ।
2025 की शुरुआत से ही अमेरिकी डॉलर में यूरो के मुकाबले गिरावट देखी गई। ईसीबी ने नोट किया कि मार्च 2025 से डॉलर का यूरो के सापेक्ष मापनीय मूल्यह्रास (measurable depreciation) हुआ है । यह गिरावट अमेरिकी व्यापार नीतियों को लेकर अनिश्चितता और निवेशकों द्वारा सुरक्षित निवेश की तलाश में यूरोपीय बॉन्ड जैसे विकल्पों की ओर रुख करने का परिणाम थी।
लेगार्ड और ईसीबी के अन्य अधिकारियों ने स्वीकार किया कि डॉलर की प्रमुख भूमिका को लेकर बनी यह अनिश्चितता यूरो के लिए एक बड़ा अवसर खोल सकती है । लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह अवसर अपने आप नहीं मिलेगा। यूरो को एक वैश्विक रिज़र्व मुद्रा (reserve currency) के रूप में स्थापित करने के लिए यूरोप को अपनी संरचनात्मक खामियों को दूर करना होगा।
ईसीबी के एक ब्लॉग पोस्ट में कहा गया, "हम वैश्विक व्यवस्था में एक गहरा बदलाव देख रहे हैं: खुले बाज़ार और बहुपक्षीय नियम टूट रहे हैं, और व्यवस्था की आधारशिला, अमेरिकी डॉलर की प्रमुख भूमिका भी अब सुनिश्चित नहीं है... लेकिन यह बदलाव यूरोप के लिए अपने भाग्य पर नियंत्रण करने और यूरो की वैश्विक प्रमुखता हासिल करने के अवसर भी प्रदान करता है" ।
हालाँकि, बड़ी चुनौती यह है कि यूरो क्षेत्र का संप्रभु बॉन्ड बाज़ार (sovereign bond market) अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड बाज़ार की तुलना में बहुत छोटा है। यूरो क्षेत्र का AAA और AA-रेटेड सरकारी बॉन्ड बाज़ार मात्र 6.6 ट्रिलियन यूरो का है, जो अमेरिकी बाज़ार का केवल पाँचवाँ हिस्सा है। शेयर बाज़ार का आकार भी अमेरिका के आधे से भी कम है । यह अंतर यूरो को एक सुरक्षित और तरल (liquid) वैश्विक मुद्रा बनाने में एक बड़ी बाधा है।
ईसीबी की 2025 की रिपोर्ट एक मिली-जुली तस्वीर पेश करती है। एक ओर, यूरो ने हरित बॉन्ड जैसे भविष्य के बाज़ारों में बढ़त हासिल की है और उसकी समग्र भूमिका में सुधार हुआ है। दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती देने के लिए अभी बहुत लंबा रास्ता तय करना है। वैश्विक अर्थव्यवस्था का बढ़ता विखंडन और डॉलर में अनिश्चितता यूरो के लिए एक ऐतिहासिक अवसर हो सकता है, लेकिन इस अवसर को भुनाने की एकमात्र शर्त यह है कि यूरोप अपने आंतरिक आर्थिक ढाँचे को आधुनिक, एकीकृत और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कठोर संरचनात्मक सुधार करे।
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