वसंत सत्र के दौरान अपनाए गए इस घोषणा पत्र का शीर्षक है 'रोकथाम और रक्षा में एक क्वांटम छलांग का समर्थन: एक मजबूत नाटो के लिए संसदीय एजेंडा' [6]। घोषणा पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि रूस यूरो अटलांटिक सुरक्षा के लिए 'प्रत्यक्ष, रणनीतिक और दीर्घकालिक खतरा' बना हुआ है [6]। रक्षा और प्रतिरोध में 'क्वांटम छलांग' लग...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What declaration did the NATO Parliamentary Assembly adopt at its Spring Session in Vilnius (May 29–June 1, 2026), and what did it say about. Article summary: At its Spring Session in Vilnius (May 29–June 1, 2026), the NATO Parliamentary Assembly adopted the final declaration titled **Supporting a quantum leap in deterrence and defence: a parliamentary agenda for a stronger NA. Topic tags: general, general web, user generated, government. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "DAYTON, OHIO – Weeks ahead of a key NATO summit, lawmakers from across the Alliance warned leaders that Allied nations must upgrade their defences quickly to protect against a bell" source context "NATO leaders must boost defence investments to deter threats from Russia and its authoritarian enablers
नाटो संसदीय सभा (NATO PA) के विलनियस, लिथुआनिया में आयोजित वसंत सत्र (29 मई – 1 जून, 2026) के दौरान, सदस्य देशों ने एक सर्वसम्मत घोषणा पत्र अपनाया, जो यूरो-अटलांटिक क्षेत्र की बदलती सुरक्षा चुनौतियों के प्रति एक ठोस प्रतिक्रिया है । इस ऐतिहासिक बैठक ने न केवल मौजूदा खतरों की गंभीरता को रेखांकित किया, बल्कि भविष्य की रणनीतिक दिशा भी तय की, जिसमें सामूहिक सुरक्षा के लिए एक अभूतपूर्व वित्तीय और सैन्य प्रतिबद्धता की मांग की गई।
यह आयोजन एक ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर हुआ, जब यूरोप की पूर्वी सीमाओं पर सुरक्षा की स्थिति लगातार जटिल होती जा रही है। नाटो उप-महासचिव रादमिला शेकेरिंस्का ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि "कोई भी सहयोगी गठबंधन में कभी अकेला नहीं खड़ा होता," और पुष्टि की कि "हमारे अग्रिम थल बल बाल्टिक से लेकर काला सागर तक तैनात हैं।" ।
लिथुआनिया के राष्ट्रपति गितानास नौसेदा ने एकीकृत वायु और मिसाइल रक्षा योजना को आगामी अंकारा शिखर सम्मेलन की एक प्रमुख उपलब्धि बनाने का आह्वान किया ।
घोषणा पत्र का सबसे कठोर संदेश रूस के संबंध में था, जिसे "यूरो-अटलांटिक सुरक्षा के लिए एक प्रत्यक्ष, रणनीतिक और दीर्घकालिक खतरा" के रूप में परिभाषित किया गया । इसमें यूक्रेन के खिलाफ रूस के लगातार आक्रामक युद्ध, सहयोगी सीमाओं के पास लापरवाह सैन्य गतिविधियों और लिथुआनिया व रोमानिया में हाल ही में ड्रोन घुसपैठ सहित अस्थिरता फैलाने वाले अभियानों पर प्रकाश डाला गया
। नाटो पीए के अध्यक्ष मार्कोस पेरेस्ट्रेलो ने जोर देकर कहा कि ऐसी घटनाओं का उत्तरदायित्व पूरी तरह से रूस पर है
।
यह धारणा अकेली नहीं है। लिथुआनियाई रक्षा उप-मंत्री करोलिस अलेक्सा ने चेतावनी देते हुए कहा था, "रूस का खतरा कहीं क्षितिज पर नहीं है; यह पहले से ही यहाँ है, और समय दबाव डाल रहा है" ।
घोषणा पत्र के केंद्र में नाटो की रक्षा और प्रतिरोध क्षमता में एक "क्वांटम छलांग" (Quantum Leap) लगाने का आह्वान है, खासकर पूर्वी हिस्से में । यह एक प्रतीकात्मक भाषा नहीं है, बल्कि एक तत्काल सैन्य आवश्यकता को दर्शाती है। इसका अर्थ है कि न केवल अधिक सैनिक तैनात किए जाएँ, बल्कि हथियार प्रणालियों, कमान संरचनाओं और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताओं में एक पीढ़ीगत बदलाव लाया जाए
।
यह प्रतिबद्धता संधि के अनुच्छेद 5 के तहत सामूहिक रक्षा के अटूट वादे और नाटो की अग्रिम रक्षा को लगातार मजबूत करने पर जोर देती है । उप-महासचिव शेकेरिंस्का ने कहा, "नाटो सहयोगी क्षेत्र के हर इंच की रक्षा करने के लिए तैयार, इच्छुक और सक्षम है।"
।
यूक्रेन के प्रति समर्थन को सत्र की चार स्पष्ट प्राथमिकताओं में से एक के रूप में चिन्हित किया गया । घोषणा पत्र में रेखांकित किया गया कि एक "मजबूत, संप्रभु और स्वतंत्र यूक्रेन यूरो-अटलांटिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है"
।
यह मान्यता है कि यूक्रेन में युद्ध पारंपरिक युद्ध की प्रकृति को बदल रहा है। शेकेरिंस्का ने जोर दिया कि "मजबूत प्रतिरोध और रक्षा निरंतर, सतत नवाचार पर निर्भर करती है। यूक्रेन यह हर दिन दिखाता है।" ।
इटली ने दृढ़ संकल्प के साथ अपनी बढ़ती रक्षा भूमिका का संकेत दिया। विदेश मंत्री एंटोनियो तायानी ने सत्र से पहले हेलसिंगबोर्ग में नाटो विदेश मंत्रियों की बैठक में कहा था कि इटली "रक्षा खर्च को सकल घरेलू उत्पाद के 5% के लक्ष्य तक बढ़ाने के लिए तैयार है" । हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यूरोपीय संघ के बजट नियमों, विशेष रूप से ऊर्जा पर, अधिक छूट आवश्यक होगी
।
इतालवी प्रतिनिधिमंडल ने सत्र में सक्रिय भूमिका निभाई, और इटली के चैंबर ऑफ डेप्युटीज़ ने घोषणा पत्र का पूरा पाठ और संबंधित तैयारी दस्तावेज़ प्रकाशित किए, जो विधायी पारदर्शिता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है ।
विलनियस सत्र आगामी नाटो अंकारा शिखर सम्मेलन के लिए एक महत्वपूर्ण संसदीय कदम था । इस सत्र से जो स्पष्ट अपेक्षाएँ उभरीं, वे निम्नलिखित हैं:
घोषणा पत्र में इस कठोर यथार्थ को स्वीकार किया गया कि "साइबर हमले, तोड़फोड़, आर्थिक दबाव और अन्य हाइब्रिड रणनीतियाँ प्रतिदिन सहयोगी समाजों को निशाना बनाती हैं" ।
विशेष रूप से, रूस के "छाया बेड़े" का मुकाबला करने के लिए दो प्रमुख पहलों का स्वागत किया गया :
सत्र ने रक्षा निवेश के मुद्दे पर कोई नरमी नहीं बरती। घोषणा पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि "2% जीडीपी का लक्ष्य वैकल्पिक नहीं, बल्कि एक दायित्व है" और एक महत्वाकांक्षी नए लक्ष्य, जो 2% से कहीं अधिक हो, का आह्वान किया गया ।
2025 के हेग शिखर सम्मेलन में सहमत हुए अनुसार, सहयोगी 2035 तक प्रतिवर्ष जीडीपी के 5% निवेश के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसमें कम से कम 3.5% कोर रक्षा आवश्यकताओं पर खर्च किया जाएगा ।
सत्र ने इस बात को रेखांकित किया कि यूरोपीय रक्षा प्रयासों का स्वागत है, लेकिन उन्हें नाटो का पूरक होना चाहिए, न कि उसकी नकल। "यूरोपीय रक्षा को नाटो को मजबूत करना चाहिए, उसकी नकल नहीं," घोषणा पत्र में प्रमुखता से कहा गया ।
नाटो-ईयू संयुक्त घोषणा पर सहयोग (2023) को सैन्य और नागरिक लचीलेपन के समन्वय के लिए एक रूपरेखा के रूप में संदर्भित किया गया । इस सहयोग में हाइब्रिड खतरों का मुकाबला करना, सैन्य गतिशीलता बढ़ाना और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की रक्षा करना शामिल है, हालांकि संरचनात्मक असमानताएँ अभी भी मौजूद हैं
।
घोषणा पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया कि यूरोप में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है, जो ट्रान्साटलांटिक सुरक्षा संबंधों की आधारशिला है ।
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वसंत सत्र के दौरान अपनाए गए इस घोषणा पत्र का शीर्षक है 'रोकथाम और रक्षा में एक क्वांटम छलांग का समर्थन: एक मजबूत नाटो के लिए संसदीय एजेंडा' [6]।
वसंत सत्र के दौरान अपनाए गए इस घोषणा पत्र का शीर्षक है 'रोकथाम और रक्षा में एक क्वांटम छलांग का समर्थन: एक मजबूत नाटो के लिए संसदीय एजेंडा' [6]। घोषणा पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि रूस यूरो अटलांटिक सुरक्षा के लिए 'प्रत्यक्ष, रणनीतिक और दीर्घकालिक खतरा' बना हुआ है [6]।
रक्षा और प्रतिरोध में 'क्वांटम छलांग' लगाने के साथ साथ 2035 से पहले सकल घरेलू उत्पाद के 5% रक्षा निवेश लक्ष्य को प्राप्त करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया गया [6]।