जापान अमेरिकी 'जेनेसिस मिशन' का पहला अंतरराष्ट्रीय साझेदार बना, जिसे मैनहट्टन प्रोजेक्ट की तरह एक राष्ट्रीय प्राथमिकता माना जा रहा है, और वह पांच वर्षों में 1 अरब डॉलर के कुल संयुक्त निवेश में 50 करोड़ डॉलर देगा। इसका खुला रणनीतिक उद्देश्य चीन से तकनीकी वर्चस्व की जंग में बढ़त हासिल करना है, जिसमें जापान को अमेरिकी...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What is the significance of Japan becoming the first international partner in the U.S. Genesis Mission AI project, including the funding str. Article summary: Japan has become the first international partner in the U.S. Genesis Mission — a Trump-administration AI initiative likened to the Manhattan Project — committing $500 million of a $1 billion total joint investment over f. Topic tags: general, government, general web. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "# Japan to Join U.S. Govt’s AI-Project ‘Genesis Mission’ with the Intl Partnership Aimed at Gaining Advantage in Tech Race with China. WASHINGTON — The Japanese government intends" source context "Japan to Join U.S. Govt’s AI-Project ‘Genesis Mission’ with the Intl Partnership Aimed at Gaining Advantage in Tech Race"
जापान ने अमेरिका की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) परियोजना, ‘जेनेसिस मिशन’, में पहले अंतरराष्ट्रीय साझेदार के रूप में औपचारिक रूप से शामिल होने की पुष्टि कर दी है। व्हाइट हाउस द्वारा इसे 'इस पीढ़ी का मैनहट्टन प्रोजेक्ट' बताया गया है । यह तकनीकी साझेदारी चीन के खिलाफ एक स्पष्ट मोर्चा है, जिसमें दोनों सरकारें अगले पांच वर्षों में संयुक्त रूप से 1 अरब डॉलर का निवेश करेंगी। इसमें जापान का योगदान 50 करोड़ डॉलर का होगा, जिसका उद्देश्य उन्नत वैज्ञानिक खोजों के लिए AI का संयुक्त विकास करना है
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यह एक 50-50 का वित्तीय समझौता है, जो एक विशेष संयुक्त कोष पर आधारित है। जापान के शिक्षा, संस्कृति, खेल, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MEXT) और अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय (METI) के वरिष्ठ अधिकारी जून 2026 में अमेरिकी ऊर्जा विभाग की यात्रा के दौरान अपने 50 करोड़ डॉलर के योगदान के विवरण को अंतिम रूप देंगे ।
यह फंड जेनेसिस मिशन के घरेलू संचालन से अलग, लेकिन उसका पूरक है। इस मिशन की शुरुआत नवंबर 2025 में एक अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश से हुई थी। उस आदेश में ऊर्जा सचिव को निर्देश दिया गया था कि वे कम से कम 20 राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण विज्ञान और प्रौद्योगिकी चुनौतियों की पहचान करें, जिनका समाधान इस मिशन के तहत किया जाना है ।
यह भागीदारी शुरू में लगभग 26 तकनीकी क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगी। तात्कालिक प्राथमिकताओं में क्वांटम सूचना विज्ञान, नाभिकीय संलयन ऊर्जा, जैव प्रौद्योगिकी और दवा विकास, सेमीकंडक्टर अनुसंधान, और महत्वपूर्ण खनिजों की खोज शामिल हैं ।
इस मिशन का तकनीकी केंद्र 17 अमेरिकी राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के सुपरकंप्यूटिंग संसाधनों और दशकों के विशाल वैज्ञानिक डेटा को AI मॉडलों से जोड़ने वाला एक एकीकृत मंच तैयार करना है। इस ढांचे को इस तरह डिजाइन किया गया है कि आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान में प्रयोग और गणना के चक्र को नाटकीय रूप से तेज किया जा सके ।
जापान के लिए, इसका प्राथमिक लाभ उन अमेरिकी संसाधनों तक पहुंच है, जो अन्यथा उसकी पहुँच से बाहर होते: विशाल संघीय डेटाबेस, बेहतरीन सुपरकंप्यूटिंग बुनियादी ढांचा, और मूलभूत AI अनुसंधान मंच । यह जापानी अनुसंधान संस्थानों को घरेलू हार्डवेयर और बजट की बाध्यताओं से बाहर निकलने का मौका देता है, विशेष रूप से नाभिकीय संलयन और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे कम्प्यूटेशनल रूप से गहन क्षेत्रों में
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यह साझेदारी स्पष्ट रूप से चीन के खिलाफ एक रणनीतिक जवाबी कदम है। जापानी मीडिया ने बताया है कि इसका लक्ष्य "चीन के साथ तकनीकी वर्चस्व की दौड़ में बढ़त हासिल करने के लिए अमेरिका और जापान का सहयोग करना" है । यह उन अमेरिकी अधिकारियों की सोच से मेल खाता है, जिन्होंने जेनेसिस मिशन को "एक घोषणा बताया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका 21वीं सदी की निर्णायक भू-राजनीतिक प्रतियोगिता को जीतने का इरादा रखता है" और जिसमें AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और उन्नत ऊर्जा को सीधे चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के खिलाफ लामबंदी का क्षेत्र बताया गया है
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यह गठजोड़ अमेरिका को अपने तकनीकी गठबंधन के ढांचे का विस्तार करने की अनुमति देता है और जापान को चीन की सरकार समर्थित AI प्रगति के साथ कदम मिलाकर चलने का एक महत्वपूर्ण साधन प्रदान करता है ।
जेनेसिस मिशन में जापान का प्रवेश अचानक नहीं हुआ है; यह तेजी से घनिष्ठ हो रहे द्विपक्षीय समझौतों और अनुसंधान साझेदारियों के जाल पर आधारित है।
इसका सबसे ताजा ढांचा अक्टूबर 2025 में हस्ताक्षरित यू.एस.-जापान प्रौद्योगिकी समृद्धि समझौता है, जिसमें दोनों देशों ने AI नीति, निर्यात संवर्धन और महत्वपूर्ण उभरती प्रौद्योगिकियों की सुरक्षा पर सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई थी । इसके अलावा, 27 जनवरी, 2026 को जापान की RIKEN अनुसंधान संस्था ने अमेरिकी ऊर्जा विभाग की आर्गन राष्ट्रीय प्रयोगशाला, फुजित्सु और एनवीडिया के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह साझेदारी विशेष रूप से जेनेसिस मिशन के लक्ष्यों का समर्थन करने हेतु अगली पीढ़ी के AI और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए की गई थी
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हाल की ये गतिविधियां विश्वविद्यालय-कॉरपोरेट साझेदारियों की एक श्रृंखला के बाद आई हैं। 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री किशिदा की राजकीय यात्रा के दौरान, 11 करोड़ डॉलर की संयुक्त AI अनुसंधान पहलों की घोषणा की गई थी, जो वाशिंगटन विश्वविद्यालय और त्सुकुबा विश्वविद्यालय तथा कार्नेगी मेलन और कीयो विश्वविद्यालय को जोड़ती हैं, और जिन्हें एनवीडिया, अमेज़ॅन, आर्म और सॉफ्टबैंक से वित्त पोषण प्राप्त है । अप्रैल 2025 में, 'क्रॉस पैसिफिक AI इनिशिएटिव' (X-PAI) पर हस्ताक्षर किए गए, जो दस वर्षों में त्सुकुबा विश्वविद्यालय, वाशिंगटन विश्वविद्यालय, एनवीडिया और अमेज़ॅन के बीच AI अनुसंधान के लिए और 5 करोड़ डॉलर प्रदान करता है
। जापान के शामिल होने से पहले ही, OpenAI, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एंथ्रोपिक जैसी अमेरिकी कंपनियाँ जेनेसिस मिशन के निजी क्षेत्र के ट्रैक से जुड़ चुकी थीं
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सरकारी साझेदारी के समानांतर, जापानी कॉरपोरेट जगत से निजी AI निवेश की एक बहुत बड़ी लहर चल रही है, जिसमें सॉफ्टबैंक ग्रुप और फुजित्सु सबसे आगे हैं। यह एक संपूर्ण राष्ट्रीय प्रयास का संकेत है।
सॉफ्टबैंक ग्रुप ने चार प्राथमिकता वाले AI क्षेत्रों की पहचान की है: AI चिप्स, AI रोबोट, AI डेटा सेंटर और उन्हें शक्ति प्रदान करने के लिए ऊर्जा । 2025 के अंत में OpenAI में अपने बड़े दांव से यह समूह फिर से मुनाफे में आ गया। अनुमान है कि 2026 की शुरुआत तक OpenAI में सॉफ्टबैंक का संचयी निवेश 64.6 अरब डॉलर तक पहुँच गया था
। घरेलू बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर, सॉफ्टबैंक कथित तौर पर डेटा सेंटरों में लगभग 2 ट्रिलियन येन (लगभग 18.8 अरब डॉलर) के निवेश पर चर्चा कर रहा है। यह जापानी सरकार की एक अलग योजना के अनुरूप है, जिसमें लगभग दस कंपनियों के साथ मिलकर स्वदेशी AI मॉडल विकसित करने के लिए 1 ट्रिलियन येन (6.7 अरब डॉलर) का सार्वजनिक-निजी उपक्रम बनाने की बात है
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फुजित्सु RIKEN–आर्गन–एनवीडिया के बीच हुए उस महत्वपूर्ण समझौते में प्रमुख जापानी कॉरपोरेट साझेदार के रूप में कार्य करता है, जो जेनेसिस मिशन के लिए अगली पीढ़ी के कंप्यूटिंग बेस का सह-विकास कर रहा है । यह जापान में AI बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा और कार्यबल विकास के लिए माइक्रोसॉफ्ट की 10 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता का भी भागीदार है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य 2030 तक जापान में दस लाख इंजीनियरों और डेवलपर्स को प्रशिक्षित करना है
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जापान की AI महत्वाकांक्षा का पैमाना कुल आंकड़ों में देखा जा सकता है: 2030 तक संयुक्त जापानी सार्वजनिक और निजी AI प्रतिबद्धताएँ पहले ही सरकारी फंडिंग में 10 ट्रिलियन येन (लगभग 65 अरब डॉलर) और प्रमुख तकनीकी कंपनियों से 70 अरब डॉलर को पार कर चुकी हैं ।
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जापान अमेरिकी 'जेनेसिस मिशन' का पहला अंतरराष्ट्रीय साझेदार बना, जिसे मैनहट्टन प्रोजेक्ट की तरह एक राष्ट्रीय प्राथमिकता माना जा रहा है, और वह पांच वर्षों में 1 अरब डॉलर के कुल संयुक्त निवेश में 50 करोड़ डॉलर देगा।
जापान अमेरिकी 'जेनेसिस मिशन' का पहला अंतरराष्ट्रीय साझेदार बना, जिसे मैनहट्टन प्रोजेक्ट की तरह एक राष्ट्रीय प्राथमिकता माना जा रहा है, और वह पांच वर्षों में 1 अरब डॉलर के कुल संयुक्त निवेश में 50 करोड़ डॉलर देगा। इसका खुला रणनीतिक उद्देश्य चीन से तकनीकी वर्चस्व की जंग में बढ़त हासिल करना है, जिसमें जापान को अमेरिकी राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के डेटा, सुपरकंप्यूटर और एआई प्लेटफॉर्म तक पहुंच मिलेगी।
सॉफ्टबैंक और फुजित्सु जैसी जापानी कंपनियाँ समानांतर रूप से भारी निजी निवेश कर रही हैं, जो 2030 तक 135 अरब डॉलर से अधिक के सरकारी और कॉरपोरेट एआई व्यय को दर्शाता है।