2023 का पहला चिप्स एक्ट सेमीकंडक्टर निर्माण को सब्सिडी देने और कारखाने लगाने पर केंद्रित था, लेकिन वह 2030 तक वैश्विक बाजार में यूरोप की 20% हिस्सेदारी के अपने लक्ष्य को हासिल करने में विफल रहा । अब चिप्स एक्ट 2.0 की रणनीति पूरी तरह बदल गई है।
CADA शायद इस पैकेज का सबसे विवादास्पद हिस्सा है, क्योंकि यह सीधे अमेरिकी टेक दिग्गजों - एडब्ल्यूएस (AWS), माइक्रोसॉफ्ट एज़्योर (Microsoft Azure), और गूगल क्लाउड (Google Cloud) - को निशाना बनाता है ।
यह पूरा पैकेज एक स्पष्ट संकेत है कि यूरोप बाहरी तकनीकी शक्तियों पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है।
आपके लिए यह समझना ज़रूरी है कि यह पैकेज अभी एक प्रस्ताव मात्र है - यह तुरंत कानून नहीं बनेगा। इसे कानून बनने के लिए एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा:
सभी 27 सदस्य देशों के बीच सहमति बनाना अपने आप में एक बड़ी चुनौती होगी।
यूरोपीय आयोग का यह 'टेक सॉवरिनिटी पैकेज' निस्संदेह वैश्विक टेक उद्योग और भू-राजनीति के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।
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