स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि संक्रमण की असल संख्या रिपोर्ट से काफ़ी अधिक हो सकती है। एक मॉडल के अनुसार 20 मई तक ही 400 से 900 के बीच मामले हो चुके होंगे, जबकि आधिकारिक आँकड़े इस स्तर तक हफ़्तों बाद पहुँचे ।
यह प्रकोप बुंडीबुग्यो वायरस (Bundibugyo virus) के कारण है, जो इबोला वायरस की ही एक अलग प्रजाति है और जिसे पहली बार 2007 में खोजा गया था । आम ज़ैरे स्ट्रेन के विपरीत, जिसके लिए लाइसेंस प्राप्त टीका मौजूद है, बुंडीबुग्यो के लिए कोई मंज़ूरशुदा टीका या दवा मौजूद नहीं है। यही एक बड़ी वजह है जो इसकी रोकथाम को बहुत मुश्किल बना रही है, और स्वास्थ्यकर्मी मरीज़ों की देखभाल, उन्हें अलग रखने और समुदाय-आधारित बचाव के तरीकों पर ही निर्भर हैं
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CDC के अनुसार बुंडीबुग्यो वायरस की ऐतिहासिक मृत्यु दर (केस फैटलिटी रेट) लगभग 30% है । मौजूदा प्रकोप में 22 मई 2026 तक पुष्ट मामलों में यह दर लगभग 9% थी
। हालाँकि, यह कम आँकड़ा शायद बहुत बड़ा अंडरकाउंट है, क्योंकि 900 से अधिक संदिग्ध मामलों की अभी तक प्रयोगशाला पुष्टि नहीं हुई है, और संदिग्ध मामलों में हुई बहुत-सी मौतों की जाँच नहीं हो पाती
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WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडहानॉम घेब्रेयेसस ने शनिवार, 30 मई 2026 को बुनिया का दौरा किया। उन्होंने वहाँ एक इलाज केंद्र का मुआयना किया और स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्यकर्मियों तथा प्रभावित परिवारों से मुलाक़ात की । एक प्रेस वार्ता में उन्होंने ज़मीनी हक़ीक़त को स्वीकार करते हुए कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और नई अंतरराष्ट्रीय मदद के बावजूद, वायरस “राहत कार्यों से भी तेज़ी से फैल रहा है”
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डॉ. टेड्रोस ने क्षेत्र के सशस्त्र समूहों से सीधी अपील की कि वे युद्धविराम घोषित करें, ताकि स्वास्थ्यकर्मी समुदायों तक सुरक्षित पहुँच बना सकें और संक्रमण की शृंखला को तोड़ सकें । उन्होंने देशों से आग्रह किया कि वे यात्रा प्रतिबंधों और सीमा बंद करने जैसे क़दमों पर पुनर्विचार करें, क्योंकि इससे “पारदर्शिता हतोत्साहित होती है”
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उनका कहना था, “हम यहाँ लोगों को निर्देश देने नहीं आए हैं। हम सुनने आए हैं।” उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस प्रकोप पर क़ाबू पाने के लिए केवल चिकित्सीय हस्तक्षेप ही नहीं, बल्कि सामुदायिक विश्वास ही निर्णायक होगा ।
17 मई 2026 को डॉ. टेड्रोस ने इस प्रकोप को ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ (PHEIC) घोषित किया। इसके पीछे बढ़ते मामले, सीमा-पार संक्रमण और प्रकोप के असली पैमाने को लेकर भारी अनिश्चितता जैसे कारण थे । यह घोषणा अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम (IHR) के तहत की गई, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया गया कि इसे महामारी आपातकाल (Pandemic Emergency) का दर्जा नहीं दिया जा रहा
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PHEIC का दर्जा अंतरराष्ट्रीय समन्वय और संसाधन जुटाने के लिए दिया जाता है, परंतु क्षेत्र की अस्थिरता लगातार राहत कार्यों को कमज़ोर कर रही है।
पूर्वी DRC दर्जनों सशस्त्र समूहों से ग्रस्त है, जिसकी वजह से संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की पहचान करना (कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग) और सुरक्षित दफ़न जैसे नियमित जन-स्वास्थ्य कार्य भी बेहद ख़तरनाक हो गए हैं । स्वास्थ्यकर्मियों और ढाँचे पर हमले की ख़बरें आ रही हैं, और असुरक्षा के इस माहौल का असर अन्य बीमारियों के टीकाकरण और निगरानी प्रयासों पर भी पड़ रहा है
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इससे भी बुनियादी समस्या है अधिकारियों और बाहरी स्वास्थ्य राहतकर्मियों के प्रति लंबे समय से पनप रहा गहरा अविश्वास। डॉ. टेड्रोस ने बार-बार ज़ोर दिया कि सामुदायिक विश्वास ही फ़ैसलाकुन चीज़ है । स्थानीय आबादी के सहयोग के बिना, मरीज़ों को अलग रखना, संपर्क में आए लोगों का पता लगाना, और सुरक्षित दफ़न जैसे रोकथाम के उपाय लागू करना लगभग नामुमकिन है।
एक इलाज-विहीन स्ट्रेन, सक्रिय संघर्ष, भौगोलिक विस्तार और सामुदायिक अवरोध — ये सब मिलकर एक ऐसा ख़तरनाक संगम बन रहे हैं जिसके और विकराल रूप लेने की चेतावनी स्वास्थ्य अधिकारी दे रहे हैं, बशर्ते विश्वास जल्द नहीं बनाया गया और सुरक्षा की गारंटी नहीं दी गई ।
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