खगोलविदों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जो प्रोटोप्लैनेटरी डिस्क (ग्रहों के जन्मस्थल) में धूल के छल्लों के प्रेक्षणीय गुणों—विशेष रूप से छल्ले की चौड़ाई, चरम चमक का स्थान, और धूल द्रव्यमान—का उपयोग करके उनमें छिपे नवजात ग्रहों के द्रव्यमान का अनुमान लगाती है। इस पद्धति का सफल परीक्षण PDS 70 सिस्टम पर किया गया, जहाँ इसने सीधे चित्रित ग्रह PDS 70c का द्रव्यमान अन्य स्वतंत्र अनुमानों के बेहद करीब पाया ।
मुख्य बिंदु:
तकनीक क्या है: वारविक विश्वविद्यालय की अमेना फारूकी के नेतृत्व में MIT और मैकमास्टर विश्वविद्यालय के सहयोगियों के साथ एक टीम ने 2D हाइड्रोडायनामिक सिमुलेशन का उपयोग करके यह सिद्ध किया कि धूल के छल्ले की चौड़ाई, उसके सबसे चमकीले बिंदु का स्थान और उसका कुल धूल द्रव्यमान, इन सबका छिपे हुए ग्रह के द्रव्यमान के साथ गहरा संबंध होता है । उन्होंने छल्ले के चमक-शिखर के स्थान और ग्रह के 'हिल रेडियस' (Hill Radius, यानी ग्रह का गुरुत्वाकर्षण प्रभाव क्षेत्र) के बीच एक सरल और मजबूत गणितीय संबंध खोजा। खास बात यह है कि यह संबंध देखने के तरंगदैर्ध्य या धूल के कण के आकार पर निर्भर नहीं करता, जिसका मतलब है कि इसे चिली में स्थित ALMA (अटाकामा लार्ज मिलीमीटर/सबमिलीमीटर ऐरे) रेडियो टेलीस्कोप के पुराने चित्रों पर भी लागू किया जा सकता है
।
PDS 70 पर सत्यापन: शोधकर्ताओं ने अपनी इस नई विधि को PDS 70 सिस्टम पर आजमाया। यह उन चुनिंदा ज्ञात सिस्टम में से एक है जहाँ ग्रहों को उनकी प्रोटोप्लैनेटरी डिस्क के भीतर सीधे देखा जा चुका है। इस तकनीक से PDS 70c के द्रव्यमान का जो अनुमान मिला, वह अन्य स्वतंत्र आकलनों से पूरी तरह मेल खाता है। यह इस पद्धति की एक वास्तविक अवलोकन-आधारित पुष्टि है ।
व्यापक निहितार्थ और प्रभाव:
Studio Global AI
Use this topic as a starting point for a fresh source-backed answer, then compare citations before you share it.
खगोलविदों ने प्रोटोप्लैनेटरी डिस्क में धूल के छल्लों के अवलोकन योग्य गुणों—जैसे चौड़ाई, चरम चमक का स्थान और धूल द्रव्यमान—का उपयोग करके उनमें छिपे नवजात ग्रहों के द्रव्यमान का अनुमान लगाने का तरीका खोज निकाला है [5]।
खगोलविदों ने प्रोटोप्लैनेटरी डिस्क में धूल के छल्लों के अवलोकन योग्य गुणों—जैसे चौड़ाई, चरम चमक का स्थान और धूल द्रव्यमान—का उपयोग करके उनमें छिपे नवजात ग्रहों के द्रव्यमान का अनुमान लगाने का तरीका खोज निकाला है [5]। इस तकनीक का सत्यापन PDS 70 सिस्टम पर किया गया, जहाँ सीधे देखे गए ग्रह PDS 70c का अनुमानित द्रव्यमान अन्य स्वतंत्र मापों से मेल खाता पाया गया [5]।
वारविक विश्वविद्यालय के नेतृत्व वाली टीम ने 2D हाइड्रोडायनामिक सिमुलेशन से एक सरल गणितीय संबंध खोजा, जो ग्रह के 'हिल रेडियस' और धूल के छल्ले की चमक के शिखर को जोड़ता है [5]।