यह साबित करने के लिए कि यह प्रभाव किसी जीवित कोशिका की जटिलता के लिए अनूठा है, शोधकर्ताओं ने कृत्रिम लिपोसोम पर एक समान परीक्षण चलाया – ये साधारण, तरल पदार्थ से भरी थैलियां होती हैं जिन्हें लगभग एक कोशिका के आकार का बनाया गया था। परिणाम एकदम स्पष्ट थे। लिपोसोम में, गर्मी तेजी से फैल गई और ठीक वैसे ही जैसा तरल पदार्थों के लिए मानक विसरण समीकरण (standard diffusion equation) भविष्यवाणी करता है। हालांकि, जीवित कोशिकाओं के अंदर, उतनी ही गर्मी काफी धीमी गति से फैली ।
यह प्रत्यक्ष तुलना कारण को अलग करती है। लिपोसोम मूलतः एक झिल्ली में बंद पानी की थैलियां हैं। कोशिकाओं में वही पानी जैसा कोशिकाद्रव्य होता है लेकिन वे प्रोटीनों, कोशिकांगों और एक आणविक साइटोस्केलेटन की सघन भीड़ से भरी होती हैं। अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला कि कोशिका के भीतर मौजूद ये अन्य जैव अणु ही वह कारण हैं जो गर्मी को फंसा लेते हैं ।
यह खोज मौजूदा सिद्धांत में सिर्फ एक फुटनोट जोड़ने जैसी नहीं है – यह सीधे उसे चुनौती देती है। मानक ऊष्मागतिकी और तरल गतिकी कहती है कि तरल वातावरण में गर्मी तेजी से फैलनी चाहिए। टोक्यो के अध्ययन ने पाया कि कोशिका के भीतर ऊष्मा विसरण न केवल धीमा था, बल्कि स्थान-निर्भर भी था। गर्मी के फैलने की दर इस बात पर निर्भर करती थी कि कोशिका के किस हिस्से को गर्म किया गया है और उसके पास कौन सी आणविक संरचनाएं मौजूद हैं ।
शोध टीम ने कहा, "'न फैलने वाली गर्मी' की घटना इतनी अभूतपूर्व है कि हम इसके भौतिक तंत्र को समझने के लिए मौजूदा पाठ्यपुस्तकों पर भरोसा नहीं कर सकते" । यह जटिलता वैज्ञानिकों को भीड़-भाड़ वाले, सक्रिय जैविक वातावरण में नैनो-स्केल पर ऊर्जा के प्रवाह के तरीके पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करती है।
इसके निहितार्थ भौतिकी की पाठ्यपुस्तकों से कहीं आगे बढ़ते हैं और जीव विज्ञान व बीमारी की हमारी मौलिक समझ को प्रभावित करते हैं।
यह अध्ययन, जिसका शीर्षक है "Non-diffusive slow heat dissipation induces high local temperature in living cells," मई 2026 में नेचर कम्युनिकेशंस (Nature Communications) पत्रिका में प्रकाशित हुआ था (DOI: 10.1038/s41467-026-71878-y) ।
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