ESO 490-017 एक क्लासिक बौनी अनियमित आकाशगंगा है: इसमें न तो प्रसिद्ध आकाशगंगाओं की तरह स्पष्ट सर्पिल भुजाएँ हैं और न ही कोई चमकीला केंद्रीय उभार। यह तारों के एक ढीले-ढाले, धुंधले बिखराव के रूप में दिखाई देती है । इसकी सबसे बड़ी चुनौती इसकी अत्यंत कम सतही चमक है, जो इसे पृष्ठभूमि के अंधेरे आकाश से अलग पहचानना बहुत मुश्किल बना देती है। इस चुनौती को हमारी अपनी मिल्की वे आकाशगंगा के अग्रभूमि तारे और भी जटिल बना देते हैं । ये अग्रभूमि तारे अपनी विशिष्ट ‘डिफ्रैक्शन स्पाइक्स’ यानी क्रॉस-आकार की किरणों के कारण आसानी से पहचाने जाते हैं, जो हबल की आंतरिक ऑप्टिक्स के कारण बनने वाली एक कलाकृति है ।
इस आकाशगंगा के पार, तस्वीर में गहराई से देखने पर दूर स्थित पूर्ण विकसित आकाशगंगाओं की एक भीड़ नज़र आती है। ये आकाशगंगाएँ लाल, नारंगी और हल्के पीले रंगों में चमकती हैं, और उनमें से कई में स्पष्ट सर्पिल संरचनाएँ दिखती हैं, जो पूरी तस्वीर को अंतरिक्ष की गहराइयों का एक नाटकीय एहसास प्रदान करती हैं ।
इस आकाशगंगा की दूरी मापने के लिए खगोलविदों ने ‘टिप ऑफ द रेड जायंट ब्रांच’ (TRGB) नामक तकनीक का उपयोग किया । आइए इसे सरल तरीके से समझते हैं:
कम द्रव्यमान वाले बूढ़े होते तारे, जिन्हें ‘लाल दानव’ कहा जाता है, अपने जीवन के अंतिम चरण में उत्तरोत्तर चमकीले होते जाते हैं। वे तारकीय विकास की एक काल्पनिक शाखा पर चढ़ते हैं, और अपने केंद्र में एक अनियंत्रित हीलियम फ्लैश (एक छोटा लेकिन शक्तिशाली विस्फोट) से ठीक पहले चमक की एक महत्वपूर्ण अधिकतम सीमा तक पहुँचते हैं। चमक का यह शिखर ही इस शाखा का ‘अग्रभाग’ या ‘टिप’ है। वैज्ञानिक तौर पर, इन्फ्रारेड I-बैंड में इस अधिकतम चमक की एक पूर्वनिर्धारित, लगभग स्थिर आंतरिक चमक होती है, जो इसे एक विश्वसनीय ‘मानक मोमबत्ती’ बनाती है ।
अब, खगोलविद हबल द्वारा ली गई तस्वीरों में इन TRGB तारों की केवल ‘दृश्य चमक’ को मापते हैं। फिर, वे इसकी तुलना तारों की पहले से ज्ञात ‘वास्तविक चमक’ यानी आंतरिक चमक से करते हैं। यह तुलना ही उन्हें आकाशगंगा की सटीक दूरी की गणना करने की अनुमति देती है । इस तकनीक की खास बात यह है कि हबल, पास की आकाशगंगाओं के भीड़ भरे समूहों में भी, अलग-अलग लाल दानव तारों को पहचानने में सक्षम है, जिसने ESO 490-017 जैसे धुँधले लक्ष्य के लिए इस माप को संभव बनाया ।
ESO 490-017 जैसी बौनी अनियमित आकाशगंगाएँ अपने छोटे आकार के बावजूद वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यधिक मूल्यवान हैं। इसका प्रमुख कारण है कि माना जाता है कि इनमें दृश्य तारों और गैस की तुलना में डार्क मैटर का प्रभुत्व बहुत अधिक है । यह उन्हें आकाशगंगा निर्माण और विकास के मॉडलों के परीक्षण के लिए एक स्वच्छ प्रयोगशाला बनाता है, खासकर उस कम द्रव्यमान वाली सीमा में जहाँ तारा निर्माण से निकली ऊर्जा और डार्क मैटर हेलो की गतिशीलता के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा होती है ।
इन बौनी आकाशगंगाओं की सटीक TRGB दूरियाँ, ब्रह्मांडीय दूरी की सीढ़ी के लिए भी एक मजबूत आधार प्रदान करती हैं। इस सीढ़ी का उपयोग और भी दूर की आकाशगंगाओं की दूरी मापने के लिए किया जाता है। जिस हबल अवलोकन कार्यक्रम ने ESO 490-017 की तस्वीर ली है, वह साथ ही स्थानीय आकाशगंगाओं में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के तारों का एक महत्वपूर्ण अभिलेखागार (लीगेसी आर्काइव) भी तैयार कर रहा है। यह एक दीर्घकालिक संदर्भ बनाएगा जिससे भविष्य में वैज्ञानिक विभिन्न ब्रह्मांडीय वातावरणों में तारा निर्माण के इतिहास का अध्ययन कर सकेंगे ।
तो अगली बार जब आप अंतरिक्ष की कोई तस्वीर देखें, तो याद रखें कि जो पहली नज़र में रोशनी का एक शांत, धुंधला सा गुच्छा लगता है, वह वास्तव में ब्रह्मांड के अदृश्य ढाँचे को तौलने और उन विशाल धाराओं का पता लगाने का एक सटीक उपकरण है जो संपूर्ण आकाशगंगाओं को अपने ब्रह्मांडीय सफर पर ले जाती हैं।