इस तरह की तकनीक को अक्सर लिक्विड बायोप्सी कहा जाता है—जहाँ खून जैसे शारीरिक तरल पदार्थ से कैंसर से जुड़े संकेत (बायोमार्कर) खोजे जाते हैं। फोटोनिक बायोसेंसर प्रकाश के गुणों का उपयोग करके इन सूक्ष्म अणुओं को बेहद संवेदनशील तरीके से पहचान सकते हैं।
अगर यह तकनीक व्यापक रूप से विकसित और चिकित्सकीय रूप से लागू होती है, तो भविष्य में डॉक्टर बहुत शुरुआती चरण में कैंसर की पहचान कर सकते हैं—संभवतः ऐसे समय पर जब बीमारी अभी स्कैन में भी दिखाई नहीं देती।
शोधकर्ताओं का मानना है कि इस तरह का कॉम्पैक्ट, अत्यंत संवेदनशील सेंसर भविष्य में अस्पतालों, क्लीनिकों और संभवतः पॉइंट‑ऑफ‑केयर टेस्टिंग में उपयोगी हो सकता है। इसका उद्देश्य जटिल लैब सिस्टम को छोटा बनाकर तेज़ और सुलभ कैंसर स्क्रीनिंग संभव करना है।