24 मई को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और बेलारूस के नेता अलेक्जेंडर लुकाशेंको के बीच 2022 के बाद पहली बार फोन पर बातचीत हुई, जिसे बेलारूसी पक्ष के अनुसार फ्रांस की पहल पर किया गया। [1][3][6] बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा, बेलारूस के यूरोपीय संघ के साथ संबंध और पेरिस‑मिन्स्क संबंधों पर चर्चा हुई, लेकिन किसी ठो...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What happened during the first phone call between French President Emmanuel Macron and Belarusian leader Alexander Lukashenko since 2022, wh. Article summary: In the first reported Macron–Lukashenko phone call since February 2022, the Belarusian side said Macron initiated the conversation and that the two leaders discussed regional issues plus Belarus’s relations with the EU a. Topic tags: general, general web, user generated, government. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "# French president says longtime Belarus leader ‘must go’. France is stepping up the pressure on Belarus’ longtime leader Alexander Lukashenko, with President Emmanuel Macron telli" source context "French president says longtime Belarus leader ‘must go’ | World News" Reference image 2: visual subject
यूरोप की कूटनीति में हाल ही में एक अप्रत्याशित घटना हुई—फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और बेलारूस के नेता अलेक्जेंडर लुकाशेंको के बीच फोन पर बातचीत। यह इसलिए खास है क्योंकि दोनों नेताओं के बीच फरवरी 2022 के बाद पहली बार सीधे संपर्क की खबर सामने आई है।
बेलारूस की आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह कॉल 24 मई को हुई और इसे फ्रांस की पहल पर किया गया था। बातचीत में क्षेत्रीय मुद्दों, बेलारूस के यूरोपीय संघ (EU) के साथ संबंधों और फ्रांस‑बेलारूस द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा हुई।
हालाँकि फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय (एलिसे पैलेस) ने अभी तक कॉल के उद्देश्य या विवरण पर सार्वजनिक रूप से ज्यादा जानकारी साझा नहीं की है, इसलिए इसके पीछे के सटीक कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।
बेलारूसी पक्ष के अनुसार फोन कॉल के दौरान मुख्य रूप से तीन विषयों पर बात हुई:
कॉल के बाद किसी समझौते, संयुक्त बयान या नई पहल की घोषणा नहीं हुई। इससे संकेत मिलता है कि बातचीत शायद कूटनीतिक संपर्क बनाए रखने की कोशिश भर थी।
फ्रांस और बेलारूस के शीर्ष नेताओं के बीच सीधा संपर्क लगभग यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद से बंद हो गया था।
दोनों नेताओं की पिछली बातचीत 26 फरवरी 2022 को हुई थी, जब रूस ने यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने का हमला शुरू किया था। उस समय मैक्रों ने लुकाशेंको से आग्रह किया था कि वे बेलारूस की जमीन से रूसी सैनिकों को हटाने की मांग करें और रूस के सैन्य अभियान से दूरी बनाएँ।
यूक्रेन पर हमले के दौरान रूस को बेलारूस की जमीन और लॉजिस्टिक समर्थन मिलने से यूरोपीय देशों के लिए लुकाशेंको से सीधा संवाद राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील हो गया था।
फ्रांस ने औपचारिक तौर पर कॉल का कारण नहीं बताया है, लेकिन समय पर नजर डालें तो यह बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच हुआ है। हाल के महीनों में कुछ घटनाओं ने सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाया है:
ऐसे हालात में कई बार देशों के बीच सीमित संपर्क भी बनाए रखा जाता है ताकि संकट के समय संचार चैनल पूरी तरह बंद न हों। कूटनीति में इसे अक्सर क्राइसिस डिप्लोमेसी कहा जाता है।
फ्रांस और बेलारूस के संबंधों को समझने के लिए व्यापक EU‑Belarus रिश्तों को देखना जरूरी है।
तनाव की शुरुआत अगस्त 2020 के बेलारूस राष्ट्रपति चुनाव से हुई थी। यूरोपीय सरकारों और संस्थाओं ने कहा कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं था। चुनाव के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए और सरकार की कार्रवाई की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई।
इसके बाद संबंध और बिगड़ गए, जिनमें शामिल हैं:
इन घटनाओं के जवाब में यूरोपीय संघ ने बेलारूस पर कई दौर के आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबंध लगाए।
इसी बीच लुकाशेंको ने हाल के महीनों में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की से मिलने की संभावना भी जताई है। हालांकि कीव बेलारूस की रूस के साथ सैन्य साझेदारी के कारण सतर्क बना हुआ है।
यूक्रेन ने अपनी उत्तरी सीमा पर सुरक्षा मजबूत कर दी है और बेलारूस की ओर हो रही गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह फोन कॉल जरूरी नहीं कि यूरोप और बेलारूस के बीच संबंधों में बड़े बदलाव का संकेत हो। इसे ज्यादा सही तरीके से व्यावहारिक कूटनीति के रूप में देखा जा सकता है—जहाँ विरोध के बावजूद बातचीत की सीमित लाइनें खुली रखी जाती हैं।
फ्रांस और अन्य पश्चिमी देश यूक्रेन का समर्थन जारी रखते हुए भी कभी‑कभी विरोधी या विवादित सरकारों से संपर्क बनाए रखते हैं, खासकर तब जब क्षेत्रीय सुरक्षा या युद्ध से जुड़े जोखिम बढ़ जाते हैं।
फिलहाल मैक्रों और लुकाशेंको की यह बातचीत मुख्यतः संवाद की एक छोटी लेकिन प्रतीकात्मक वापसी के रूप में देखी जा रही है।
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24 मई को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और बेलारूस के नेता अलेक्जेंडर लुकाशेंको के बीच 2022 के बाद पहली बार फोन पर बातचीत हुई, जिसे बेलारूसी पक्ष के अनुसार फ्रांस की पहल पर किया गया। [1][3][6]
24 मई को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और बेलारूस के नेता अलेक्जेंडर लुकाशेंको के बीच 2022 के बाद पहली बार फोन पर बातचीत हुई, जिसे बेलारूसी पक्ष के अनुसार फ्रांस की पहल पर किया गया। [1][3][6] बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा, बेलारूस के यूरोपीय संघ के साथ संबंध और पेरिस‑मिन्स्क संबंधों पर चर्चा हुई, लेकिन किसी ठोस समझौते की घोषणा नहीं हुई। [1][3]
यह संपर्क ऐसे समय हुआ है जब बेलारूस और रूस की सैन्य गतिविधियों तथा यूक्रेन सीमा के आसपास बढ़ती तनावपूर्ण स्थिति को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं। [22][24]