इसके बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया जिसमें इस्राइली मंत्री इतामार बेन‑ग्विर इन हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं का मजाक उड़ाते और तंज करते दिखाई दिए। वीडियो तेजी से वायरल हो गया और यूरोप में तीखी आलोचना शुरू हो गई। कई यूरोपीय नेताओं ने इसे अपमानजनक और अस्वीकार्य बताया।
फ्रांस के विदेश मंत्री जाँ‑नोएल बैरो (Jean‑Noël Barrot) ने घोषणा की कि बेन‑ग्विर के व्यवहार के कारण उन्हें फ्रांस में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने इस व्यवहार को फ्रांसीसी और अन्य यूरोपीय नागरिकों के प्रति “अस्वीकार्य” और “निंदनीय” बताया।
वीडियो में दिखाई देने वाली तस्वीरों ने विवाद को और बढ़ा दिया। रिपोर्टों के मुताबिक कार्यकर्ताओं को हाथ बांधकर घुटनों के बल बैठाया गया था और उसी दौरान मंत्री द्वारा उनका मजाक उड़ाया गया।
यूरोप के कई देशों को यह चिंता हुई कि हिरासत में लिए गए लोगों के साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया, खासकर इसलिए क्योंकि उनमें यूरोपीय नागरिक भी शामिल थे। इसके बाद कई यूरोपीय सरकारों ने इस्राइली राजदूतों या राजनयिकों को तलब कर स्पष्टीकरण मांगा।
आलोचकों का कहना था कि एक वरिष्ठ सरकारी मंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से बंदियों का मजाक उड़ाना स्थिति को और भड़काने वाला कदम था।
फ्रांस का यह कदम अचानक नहीं आया। इससे पहले भी कई पश्चिमी देशों ने बेन‑ग्विर के खिलाफ कार्रवाई की थी।
जून 2025 में यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूज़ीलैंड और नॉर्वे ने संयुक्त रूप से बेन‑ग्विर और एक अन्य इस्राइली मंत्री पर प्रतिबंध लगाए थे। इन देशों ने आरोप लगाया था कि उनके बयान और नीतियाँ वेस्ट बैंक में फ़िलिस्तीनी समुदायों के खिलाफ हिंसा भड़काने से जुड़ी थीं।
इन प्रतिबंधों में कुछ देशों में यात्रा प्रतिबंध और संपत्ति फ्रीज़ जैसी कार्रवाइयाँ शामिल थीं।
फ्लोटिला विवाद के बाद फ्रांस और इटली ने इस मुद्दे को यूरोपीय संघ (EU) के स्तर तक ले जाने की कोशिश शुरू कर दी है।
दोनों देशों का कहना है कि इस मामले में EU‑स्तर के प्रतिबंधों पर विचार होना चाहिए। इटली ने यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कालास (Kaja Kallas) से अनुरोध किया कि इस मुद्दे को EU विदेश मंत्रियों की बैठक के एजेंडे में शामिल किया जाए।
हालांकि EU में किसी भी प्रतिबंध को लागू करने के लिए सभी सदस्य देशों की सहमति जरूरी होती है, इसलिए अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसा निर्णय लिया जाएगा या नहीं।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब गाज़ा युद्ध और वेस्ट बैंक से जुड़ी नीतियों को लेकर इस्राइल और यूरोपीय देशों के बीच पहले से ही मतभेद मौजूद हैं।
वीडियो सामने आने के बाद कई यूरोपीय देशों ने इस्राइल के कदमों की आलोचना की और राजनयिक विरोध दर्ज कराया। कुछ देशों ने इस्राइली राजनयिकों को तलब कर स्पष्टीकरण भी मांगा।
फ्रांस द्वारा एक मौजूदा इस्राइली मंत्री पर प्रवेश प्रतिबंध लगाना कूटनीतिक दृष्टि से एक कड़ा संकेत माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दोनों पक्षों के संबंध पूरी तरह टूटने की संभावना नहीं है, लेकिन यह घटना इस्राइल और यूरोप के बीच बढ़ते नीतिगत तनाव को जरूर उजागर करती है।