ये आंकड़े अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Africa CDC) के अपडेट और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में बताए गए थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक भी हो सकती है, क्योंकि शुरुआती चरण में कई मामले संदिग्ध रहते हैं और लैब से पुष्टि होने में समय लगता है।
इबोला का यह प्रकार अपेक्षाकृत दुर्लभ है। 2014–2016 में पश्चिम अफ्रीका में फैले बड़े प्रकोप का कारण Zaire स्ट्रेन था, जबकि वर्तमान प्रकोप Bundibugyo स्ट्रेन से जुड़ा है। यह भी गंभीर रक्तस्रावी बुखार (hemorrhagic fever) पैदा करता है और इसकी मृत्यु दर ऊँची हो सकती है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस स्ट्रेन के लिए अभी कोई लाइसेंस प्राप्त विशेष वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, जिससे संक्रमण को तेजी से नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 17 मई 2026 को इस प्रकोप को Public Health Emergency of International Concern (PHEIC) घोषित किया।
PHEIC, WHO की अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमावली के तहत उच्चतम स्तर की चेतावनी होती है, जिसका मतलब है कि बीमारी के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलने का जोखिम है और देशों के बीच समन्वित प्रतिक्रिया की आवश्यकता है।
WHO के साथ‑साथ Africa CDC ने भी इस प्रकोप को Public Health Emergency of Continental Security घोषित किया।
इस घोषणा से एजेंसी को अफ्रीकी देशों के बीच समन्वय बढ़ाने, आपातकालीन टीमें तैनात करने और निगरानी व तैयारी मजबूत करने का अधिकार मिलता है।
Africa CDC के अनुसार, DRC और युगांडा के अलावा 10 अन्य अफ्रीकी देशों में संक्रमण फैलने का जोखिम है। ये देश हैं:
इनमें से अधिकांश देश DRC या युगांडा की सीमा से जुड़े हैं, इसलिए सीमा‑पार आवाजाही के कारण जोखिम बढ़ जाता है।
प्रकोप के बाद कई अंतरराष्ट्रीय कदम उठाए गए हैं।
इन कदमों का उद्देश्य संभावित संक्रमण को सीमित करना और वैश्विक तैयारी को मजबूत करना है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकोप को लेकर कई वजहों से चिंता बनी हुई है:
स्वास्थ्य एजेंसियाँ कह रही हैं कि प्रकोप को रोकने के लिए तेज़ पहचान, मरीजों को अलग रखना, संपर्क‑अनुसरण (contact tracing) और समुदायों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण हैं।
फिलहाल प्रभावित क्षेत्र के बाहर जोखिम कम माना जा रहा है, लेकिन वैश्विक स्वास्थ्य संस्थाएँ स्थिति पर करीबी निगरानी रखे हुए हैं क्योंकि मध्य अफ्रीका में संक्रमण को नियंत्रित करना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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