घटना के बाद सबसे पहले नोवी साद में प्रदर्शन शुरू हुए, जिनका नेतृत्व विश्वविद्यालय के छात्रों ने किया। जल्द ही यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया और सरकार से जवाबदेही की मांग करने वाला बड़ा नागरिक आंदोलन बन गया।
यूरोपीय संसद के दस्तावेज़ों में भी इस घटना को छात्रों के नेतृत्व में हुए अभूतपूर्व राष्ट्रीय विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत बताया गया है।
शुरुआत में प्रदर्शनकारियों की मांग केवल हादसे के पीड़ितों को न्याय दिलाने की थी। लेकिन कुछ ही महीनों में आंदोलन ने शासन व्यवस्था और लोकतंत्र से जुड़े व्यापक मुद्दों को भी उठाना शुरू कर दिया।
मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
इन मांगों को आगे बढ़ाने में छात्रों की भूमिका केंद्रीय रही है। उन्होंने विश्वविद्यालयों में धरने, सड़क मार्च और बड़े सार्वजनिक प्रदर्शन आयोजित किए, जिससे आंदोलन कैंपस से निकलकर पूरे समाज तक फैल गया।
जैसे‑जैसे प्रदर्शन बड़े होते गए, सरकार ने कई मौकों पर उन्हें नियंत्रित करने की कोशिश की।
बेलग्रेड में हुई कुछ बड़ी रैलियों के दौरान दंगा‑रोधी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुईं। रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने भीड़ को तितर‑बितर करने के लिए आंसू गैस और बड़े पैमाने पर हिरासत जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया।
मानवाधिकार संगठनों और पर्यवेक्षकों ने कुछ और गंभीर आरोप भी लगाए हैं, जैसे:
सरकार का कहना है कि पुलिस कार्रवाई कानून‑व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी थी। लेकिन आलोचकों का कहना है कि ऐसी कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर कर सकती है और राजनीतिक तनाव बढ़ा सकती है।
इन प्रदर्शनों ने यूरोपीय संस्थाओं का भी ध्यान खींचा है, क्योंकि सर्बिया यूरोपीय संघ (EU) का संभावित सदस्य देश है और उसकी लोकतांत्रिक प्रगति पर नज़र रखी जाती है।
यूरोपीय संसद और अन्य संस्थाओं ने कई मुद्दों पर चिंता जताई है:
काउंसिल ऑफ यूरोप के मानवाधिकार आयुक्त ने भी चेतावनी दी है कि विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए बल प्रयोग और गिरफ्तारियां अभिव्यक्ति और सभा की स्वतंत्रता के लिए चिंता का विषय हैं।
ये मुद्दे इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि लोकतांत्रिक सुधार और मानवाधिकारों का सम्मान यूरोपीय संघ की सदस्यता प्रक्रिया की प्रमुख शर्तें हैं।
नोवी साद की दुर्घटना से शुरू हुआ यह आंदोलन अब सर्बिया के हालिया इतिहास के सबसे बड़े नागरिक आंदोलनों में से एक बन चुका है। 2025 तक देश के सैकड़ों शहरों और कस्बों में प्रदर्शन हो चुके थे और बेलग्रेड सहित कई बड़े शहरों में लाखों लोग सड़कों पर उतरे।
कई प्रदर्शनकारियों के लिए यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं बल्कि गहरे सिस्टमेटिक मुद्दों—खासतौर पर भ्रष्टाचार, पारदर्शिता की कमी और कमजोर संस्थागत जवाबदेही—का प्रतीक बन गया है।
आने वाले समय में यह आंदोलन राजनीतिक सुधार या जल्दी चुनाव तक पहुंचता है या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन इतना तय है कि इन प्रदर्शनों ने सर्बिया की राजनीति और उसके लोकतांत्रिक भविष्य पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान जरूर बढ़ा दिया है।
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