संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार 2026 में बड़े पैमाने पर अफ़ग़ानों की वापसी हुई है:
इसके अलावा, व्यापक क्षेत्रीय प्रवृत्ति भी दिखाई देती है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार अक्टूबर 2023 के बाद से लगभग 5.4 मिलियन अफ़ग़ान ईरान और पाकिस्तान से वापस लौट चुके हैं, जिनमें कई लोग दबाव या मजबूरी में लौटे।
संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान लौटने वाले लोगों को कई प्रकार के गंभीर जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। इनमें शामिल हैं:
रिपोर्टों के अनुसार महिलाओं और लड़कियों पर विशेष रूप से कड़े प्रतिबंध हैं, और कई सामाजिक तथा शैक्षिक अधिकार सीमित किए गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानून में नॉन‑रिफाउलमेंट (Non‑Refoulement) एक बुनियादी सिद्धांत है। इसके अनुसार किसी भी व्यक्ति को ऐसे देश में वापस नहीं भेजा जा सकता जहाँ उसके जीवन, स्वतंत्रता या सुरक्षा को गंभीर खतरा हो।
यह सिद्धांत विशेष रूप से उन परिस्थितियों पर लागू होता है जहाँ व्यक्ति को निम्न जोखिम हो:
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सुरक्षा सभी प्रवासियों पर लागू होती है, चाहे उनका कानूनी दर्जा कुछ भी हो।
मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों का कहना है कि कई देशों द्वारा बड़े पैमाने पर अफ़ग़ानों की वापसी—खासकर पाकिस्तान और ईरान से—इस सिद्धांत के उल्लंघन का जोखिम पैदा करती है। आलोचकों का कहना है कि जब किसी देश में गंभीर मानवाधिकार जोखिम मौजूद हों, तो वहाँ जबरन वापसी अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हो सकती है।
इसी कारण संयुक्त राष्ट्र ने देशों से अपील की है कि अफ़ग़ान शरणार्थियों की वापसी स्वैच्छिक, सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से ही होनी चाहिए।
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