संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टुर्क ने 2026 में चेतावनी दी कि अफ़ग़ान शरणार्थियों को जबरन वापस भेजना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और शरणार्थी कानून का उल्लंघन हो सकता है। [1][4] उन्होंने कहा कि अफ़ग़ान महिलाएँ, पुरुष और बच्चे उन देशों से निकाले जा रहे हैं जहाँ वे सुरक्षा की तलाश में गए थे, जबकि तालिबान शासन म...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What has the UN High Commissioner for Human Rights warned about the forced deportation of Afghan refugees in 2026, how many Afghans have bee. Article summary: The UN human rights chief, Volker Türk, warned in May 2026 that forcing Afghans back to Afghanistan can violate international human rights and refugee law because returnees are being sent into “grave risk” under Taliban . Topic tags: general, general web, government, education. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "### Muttaqi Calls for Taliban Representation at the United Nations in Meeting with Acting Head of UNAMA. ### Afghan Children: Unseen Victims of the Taliban’s War on Education. KABU" source context "Deportation of Afghans to Taliban Rule Violates International Law ..." Reference image 2: visual subject "###
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टुर्क ने मई 2026 में चेतावनी दी कि अफ़ग़ान शरणार्थियों और आश्रय‑प्रार्थियों को जबरन अफ़ग़ानिस्तान भेजना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और शरणार्थी कानून का उल्लंघन हो सकता है। उनके अनुसार कई लोगों को ऐसे हालात में वापस भेजा जा रहा है जहाँ उन्हें “गंभीर खतरे” का सामना करना पड़ सकता है।
टुर्क ने कहा कि अफ़ग़ान महिलाएँ, पुरुष और बच्चे उन देशों से निकाले जा रहे हैं जहाँ वे सुरक्षा की तलाश में पहुँचे थे, और उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध वापस भेजा जा रहा है।
उन्होंने विशेष रूप से चेतावनी दी कि कुछ समूहों के लिए जोखिम और भी अधिक है, जैसे:
इन समूहों को तालिबान शासन के तहत प्रतिशोध या दमन का सामना करना पड़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार 2026 में बड़े पैमाने पर अफ़ग़ानों की वापसी हुई है:
इसके अलावा, व्यापक क्षेत्रीय प्रवृत्ति भी दिखाई देती है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार अक्टूबर 2023 के बाद से लगभग 5.4 मिलियन अफ़ग़ान ईरान और पाकिस्तान से वापस लौट चुके हैं, जिनमें कई लोग दबाव या मजबूरी में लौटे।
संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान लौटने वाले लोगों को कई प्रकार के गंभीर जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। इनमें शामिल हैं:
रिपोर्टों के अनुसार महिलाओं और लड़कियों पर विशेष रूप से कड़े प्रतिबंध हैं, और कई सामाजिक तथा शैक्षिक अधिकार सीमित किए गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानून में नॉन‑रिफाउलमेंट (Non‑Refoulement) एक बुनियादी सिद्धांत है। इसके अनुसार किसी भी व्यक्ति को ऐसे देश में वापस नहीं भेजा जा सकता जहाँ उसके जीवन, स्वतंत्रता या सुरक्षा को गंभीर खतरा हो।
यह सिद्धांत विशेष रूप से उन परिस्थितियों पर लागू होता है जहाँ व्यक्ति को निम्न जोखिम हो:
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सुरक्षा सभी प्रवासियों पर लागू होती है, चाहे उनका कानूनी दर्जा कुछ भी हो।
मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों का कहना है कि कई देशों द्वारा बड़े पैमाने पर अफ़ग़ानों की वापसी—खासकर पाकिस्तान और ईरान से—इस सिद्धांत के उल्लंघन का जोखिम पैदा करती है। आलोचकों का कहना है कि जब किसी देश में गंभीर मानवाधिकार जोखिम मौजूद हों, तो वहाँ जबरन वापसी अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हो सकती है।
इसी कारण संयुक्त राष्ट्र ने देशों से अपील की है कि अफ़ग़ान शरणार्थियों की वापसी स्वैच्छिक, सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से ही होनी चाहिए।
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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टुर्क ने 2026 में चेतावनी दी कि अफ़ग़ान शरणार्थियों को जबरन वापस भेजना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और शरणार्थी कानून का उल्लंघन हो सकता है। [1][4]
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टुर्क ने 2026 में चेतावनी दी कि अफ़ग़ान शरणार्थियों को जबरन वापस भेजना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और शरणार्थी कानून का उल्लंघन हो सकता है। [1][4] उन्होंने कहा कि अफ़ग़ान महिलाएँ, पुरुष और बच्चे उन देशों से निकाले जा रहे हैं जहाँ वे सुरक्षा की तलाश में गए थे, जबकि तालिबान शासन में उन्हें ‘गंभीर खतरे’ का सामना करना पड़ सकता है। [1][9]
UNHCR के अनुसार 2026 में मई की शुरुआत तक लगभग 177,600 अफ़ग़ान पाकिस्तान से लौटे हैं, जबकि जनवरी–मार्च 2026 में ही 55,202 लोगों को वापस भेजा गया। [14][10]