क्योंकि यह निर्णय दुनिया के सबसे प्रभावशाली संस्थागत निवेशकों में से एक ने लिया, इसलिए इस पर खास ध्यान गया।
फंड का कदम सिर्फ एल्कैन तक सीमित नहीं था। उसने मेटा की वार्षिक बैठक में कई शेयरहोल्डर प्रस्तावों का समर्थन भी किया, जो कंपनी की गवर्नेंस और जोखिम प्रबंधन पर सवाल उठाते हैं।
इन प्रस्तावों में शामिल थे:
फंड ने मानवाधिकार और AI से जुड़े जोखिमों पर भी अधिक पारदर्शिता की मांग करने वाले प्रस्तावों का समर्थन किया।
मेटा में निवेशकों की नाराज़गी के बावजूद बदलाव आसान नहीं है। इसका मुख्य कारण कंपनी की dual‑class share structure है।
इस व्यवस्था में अलग‑अलग शेयर क्लास को अलग वोटिंग शक्ति मिलती है। इससे कंपनी के संस्थापक और CEO मार्क ज़करबर्ग के पास कंपनी के फैसलों पर मजबूत नियंत्रण बना रहता है।
मेटा की 2026 वार्षिक बैठक में निदेशकों के चुनाव के साथ‑साथ AI डेटा उपयोग, मानवाधिकार, जलवायु प्रतिबद्धताओं और गवर्नेंस सुधारों से जुड़े कई प्रस्तावों पर वोट होना है।
नॉर्वे के वेल्थ फंड द्वारा:
मेटा पर प्रतिष्ठात्मक और गवर्नेंस दबाव बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है—even अगर कंपनी की शेयर संरचना के कारण बाहरी निवेशकों की वास्तविक शक्ति सीमित ही क्यों न हो।
रिपोर्टों में एल्कैन की बोर्ड उपस्थिति और बाहरी भूमिकाओं को लेकर चिंता का उल्लेख है, लेकिन अभी तक मेटा या एल्कैन की ओर से विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
इसलिए मौजूदा विवाद मुख्यतः निवेशकों के मतदान रिकॉर्ड और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है, न कि किसी विस्तृत आधिकारिक जांच पर।
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