इसके साथ‑साथ पुरातत्वविदों को काँच की मनके (glass beads) और अन्य सांस्कृतिक वस्तुएँ भी मिलीं, जो यह संकेत देती हैं कि यह स्थान किसी धार्मिक या अनुष्ठानिक गतिविधि से जुड़ा हुआ था।
दिलचस्प बात यह है कि पहले बहुत कम मामलों में पत्थर के जारों के अंदर सीधे मानव अवशेष मिले थे, इसलिए यह खोज असाधारण मानी जा रही है।
हड्डियों और दाँतों की रेडियोकार्बन डेटिंग से पता चला कि ये अवशेष लगभग 9वीं से 12वीं सदी CE के बीच के हैं। कुछ नमूनों की तारीख लगभग 890 से 1160 ईस्वी के बीच आती है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस जार का इस्तेमाल एक ही बार में नहीं हुआ था। बल्कि यह करीब 270 साल तक कई बार दफन के लिए इस्तेमाल किया गया।
इससे पता चलता है कि अलग‑अलग पीढ़ियाँ समय‑समय पर यहाँ वापस आती थीं।
हड्डियों की स्थिति ने एक महत्वपूर्ण सुराग दिया। अंदर पूरी कंकाल संरचना नहीं मिली, बल्कि अलग‑अलग और बिखरी हुई हड्डियाँ मिलीं।
यह पैटर्न आम तौर पर secondary burial नामक प्रथा की ओर इशारा करता है, जिसमें:
खुदाई के दौरान शोधकर्ताओं ने देखा कि खोपड़ियाँ जार के किनारों पर रखी थीं, जबकि हाथ‑पैर की हड्डियाँ अलग समूहों में रखी गई थीं।
इससे संकेत मिलता है कि यह कोई साधारण ढेर नहीं था, बल्कि एक संगठित अंतिम संस्कार स्थल था।
क्योंकि जार में अलग‑अलग उम्र के लोगों के अवशेष मिले और वे सदियों में जमा हुए, शोधकर्ताओं का मानना है कि यह किसी समुदाय या विस्तारित परिवार का सामूहिक दफन स्थल रहा होगा।
संभव है कि यहाँ लोग अपने पूर्वजों की स्मृति में अनुष्ठान करते रहे हों और पीढ़ी दर पीढ़ी उसी जार में अवशेष रखते रहे हों।
Plain of Jars क्षेत्र में 2,000 से अधिक विशाल पत्थर के जार 100 से ज्यादा स्थलों पर फैले हुए हैं। लंबे समय तक इनके उद्देश्य को लेकर बहस चलती रही—कुछ लोगों ने इन्हें भोजन या पानी के भंडारण के लिए बनाया गया माना, जबकि अन्य ने इन्हें दफन से जोड़ा।
अब एक ही जार के भीतर दर्जनों मानव अवशेष मिलने से यह मजबूत प्रमाण मिलता है कि कम से कम कुछ जार मृतकों के लिए बनाए गए अनुष्ठानिक पात्र थे।
शोध से यह भी संकेत मिलता है कि पत्थर के ये जार संभवतः उनमें रखे गए मध्यकालीन दफन से भी अधिक पुराने हो सकते हैं।
इसका मतलब है कि बाद की पीढ़ियों ने एक पहले से मौजूद प्राचीन मेगालिथिक स्थल को सदियों बाद फिर से दफन अनुष्ठानों के लिए अपनाया।
कुछ प्रमाण बताते हैं कि इन स्थलों पर गतिविधियाँ 13वीं सदी तक जारी रहीं—उसी समय जब इस क्षेत्र में बौद्ध धर्म का प्रसार हो रहा था। हालांकि जारों के उपयोग और बौद्ध परंपराओं के बीच सीधा संबंध अभी तक साबित नहीं हुआ है।
Site 75 की खुदाई Plain of Jars को समझने की दिशा में अब तक की सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक है। इससे पता चलता है कि:
इन निष्कर्षों से दक्षिण‑पूर्व एशिया के सबसे रहस्यमय पुरातात्विक स्थलों में से एक की कहानी धीरे‑धीरे स्पष्ट होती जा रही है—और यह भी कि वहाँ रहने वाले लोग अपने पूर्वजों को किस तरह याद करते थे।
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