इन मॉड्यूल्स को आमतौर पर उन जगहों पर लगाया जाता है जहाँ वाहन स्वाभाविक रूप से धीमे होते हैं या ब्रेक लगाते हैं, जैसे:
जब कोई वाहन—खासकर भारी ट्रक—इस मॉड्यूल के ऊपर से गुजरता है, तो उसका वजन सड़क में लगी धातु या मैकेनिकल प्लेट को थोड़ा दबाता है। यह हलचल एक मैकेनिकल या हाइड्रोलिक सिस्टम को सक्रिय करती है जो जनरेटर घुमाता है और इस तरह यांत्रिक ऊर्जा को बिजली में बदल देता है।
क्योंकि ये मॉड्यूल उन जगहों पर लगाए जाते हैं जहाँ वाहन पहले से ही धीमे हो रहे होते हैं, इसलिए कंपनी का दावा है कि यह वही ऊर्जा पकड़ता है जो सामान्यतः ब्रेकिंग के दौरान व्यर्थ चली जाती है। इस बिजली को पास के उपकरणों या स्थानीय बिजली प्रणाली में इस्तेमाल किया जा सकता है।
REPS का पहला वास्तविक सिस्टम Port of Hamburg में लगाया गया है, जो यूरोप के सबसे व्यस्त लॉजिस्टिक्स हब में से एक है। यहाँ लगभग 12 मीटर लंबा सड़क खंड कंपनी के ऊर्जा‑हार्वेस्टिंग सिस्टम के साथ बनाया गया है।
पायलट प्रोजेक्ट से जुड़े कुछ प्रमुख तथ्य:
फिलहाल इस पायलट का मुख्य उद्देश्य यह दिखाना है कि तकनीक व्यस्त औद्योगिक ट्रैफिक में बिना बाधा काम कर सकती है।
हालाँकि अभी तक लंबे समय के लिए स्वतंत्र, तृतीय‑पक्ष डेटा—जैसे वास्तविक बिजली उत्पादन, रखरखाव लागत या आर्थिक लाभ—बहुत कम सार्वजनिक हुआ है।
इस पूंजी का उपयोग मुख्य रूप से इन कामों के लिए किया जाएगा:
कंपनी की शुरुआती रणनीति ऐसे स्थानों पर ध्यान देने की है जहाँ भारी ट्रैफिक और बार‑बार ब्रेकिंग होती है—जैसे बंदरगाह, माल ढुलाई टर्मिनल और बड़े लॉजिस्टिक्स पार्क।
यदि मॉडल आर्थिक रूप से सफल साबित होता है, तो ये स्थान छोटे‑छोटे डिस्ट्रिब्यूटेड माइक्रो‑पावर सोर्स की तरह काम कर सकते हैं।
ब्रेकिंग से ऊर्जा रिकवर करने का सिद्धांत नया नहीं है। शोध बताते हैं कि वाहनों की ऊर्जा का बड़ा हिस्सा चलते समय अलग‑अलग रूपों में खो जाता है और उसका कुछ भाग ब्रेकिंग के दौरान गर्मी व घर्षण में बदल जाता है।
इसी वजह से इंजीनियरिंग शोध में सड़क में लगे हाइड्रोलिक प्लेट या पायज़ोइलेक्ट्रिक सिस्टम जैसी तकनीकों पर भी प्रयोग किए गए हैं, जो ट्रैफिक से थोड़ी‑बहुत बिजली पैदा कर सकती हैं।
भारी ट्रक सड़क पर बहुत अधिक दबाव डालते हैं, इसलिए लॉजिस्टिक्स हब इस तरह के प्रयोगों के लिए आकर्षक जगह माने जाते हैं।
तकनीक दिलचस्प जरूर है, लेकिन विशेषज्ञों के सामने कुछ महत्वपूर्ण सवाल अभी भी बाकी हैं।
अगर सड़क किसी वाहन से ऊर्जा निकालती है तो सिद्धांततः वह ऊर्जा वाहन की गति से ही आती है। सवाल यह है कि सिस्टम वास्तव में सिर्फ व्यर्थ होने वाली ब्रेकिंग ऊर्जा पकड़ता है या फिर इतना प्रतिरोध पैदा करता है कि वाहन को ज्यादा ईंधन या बिजली खर्च करनी पड़े।
आधुनिक इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहन पहले से ही regenerative braking का उपयोग करते हैं, जो ब्रेकिंग ऊर्जा को सीधे वाहन की बैटरी में वापस भेज देता है। शोध बताते हैं कि यह ऊर्जा पुनर्प्राप्ति का बहुत प्रभावी तरीका है।
इससे यह सवाल उठता है कि भविष्य में जब इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ेगी, तब सड़क‑आधारित सिस्टम के लिए कितनी ऊर्जा बची रहेगी।
सड़क के अंदर लगे किसी भी मैकेनिकल सिस्टम को कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है, जैसे:
इसलिए लंबे समय तक विश्वसनीयता साबित करना महत्वपूर्ण होगा।
संभव है कि यह तकनीक केवल उन जगहों पर ही आर्थिक रूप से लाभदायक हो जहाँ बहुत अधिक ब्रेकिंग ट्रैफिक होता है—जैसे पोर्ट या टोल प्लाज़ा। अगर ऐसा है, तो इसका उपयोग सीमित क्षेत्रों तक ही रह सकता है, जबकि सौर या पवन ऊर्जा जैसे विकल्प व्यापक स्तर पर काम करते हैं।
REPS और ऐसी अन्य तकनीकों के लिए सबसे मजबूत प्रमाण तब मिलेगा जब सार्वजनिक रूप से ये डेटा उपलब्ध होगा:
अगर भविष्य में यह डेटा सकारात्मक साबित होता है, तो व्यस्त परिवहन मार्ग छोटे‑छोटे ऊर्जा स्रोत बन सकते हैं। फिलहाल, हैम्बर्ग का इंस्टॉलेशन इस विचार की वास्तविक दुनिया में शुरुआती परीक्षा माना जा रहा है।
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