इसी तरह के दावों को आम तौर पर quantum supremacy या quantum advantage कहा जाता है—जब कोई क्वांटम डिवाइस ऐसा काम कर दे जिसे क्लासिकल कंप्यूटर व्यावहारिक समय में पूरा नहीं कर सकते।
फ्लैटआयरन–बोस्टन यूनिवर्सिटी की टीम ने उसी भौतिक समस्या को दोबारा परखा। सीधे पूरे क्वांटम स्टेट की गणना करने के बजाय—जो क्यूबिट बढ़ने के साथ घातीय रूप से जटिल हो जाती है—उन्होंने सिस्टम की गणितीय संरचना का फायदा उठाया।
उनकी विधि में कई तकनीकों का संयोजन था:
इस तरीके से एल्गोरिद्म को पूरे 5,000‑क्यूबिट वेवफंक्शन को स्पष्ट रूप से स्टोर करने की जरूरत नहीं पड़ी। इसके बजाय वह केवल सिस्टम की महत्वपूर्ण सहसंबंधों (correlations) को ट्रैक करता रहा—जिससे गणना की लागत बहुत कम हो गई, जबकि सटीकता बनी रही।
शोधकर्ताओं के अनुसार यह तरीका उसी क्वांटम‑एनीलिंग डायनेमिक्स को सटीक और कुशल तरीके से सिमुलेट कर सकता है जिसे पहले क्लासिकल कंप्यूटिंग की पहुंच से बाहर बताया गया था।
टेंसर नेटवर्क का मूल विचार है क्वांटम स्टेट को संपीड़ित (compress) करना। किसी बड़े क्वांटम सिस्टम के सभी संभावित स्टेट्स को स्टोर करने के बजाय यह केवल उन पैटर्न और संबंधों को कैप्चर करता है जो वास्तव में सिस्टम में उत्पन्न होते हैं।
कई भौतिक प्रणालियों—खासकर नियमित lattice संरचना वाले सिस्टम—में entanglement सीमित तरीके से बढ़ती है। ऐसे मामलों में टेंसर‑नेटवर्क मॉडल अपेक्षाकृत कम पैरामीटर के साथ पूरे सिस्टम का अच्छा अनुमान दे सकते हैं।
फ्लैटआयरन अध्ययन में जब इन नेटवर्कों को belief propagation के साथ जोड़ा गया, तो कुछ सिमुलेशन इतने कुशल हो गए कि उन्हें बड़े सुपरकंप्यूटर की बजाय साधारण पर्सनल कंप्यूटर पर भी चलाया जा सकता था।
यह परिणाम यह नहीं कहता कि क्वांटम कंप्यूटर बेकार हैं। बल्कि यह एक महत्वपूर्ण तथ्य को उजागर करता है: तुलना का मानक लगातार बदलता रहता है।
किसी भी “क्वांटम एडवांटेज” का दावा आम तौर पर उस समय उपलब्ध सबसे अच्छे क्लासिकल एल्गोरिद्म से तुलना करके किया जाता है। लेकिन क्लासिकल कंप्यूटिंग के एल्गोरिद्म—जैसे टेंसर नेटवर्क, मॉन्टे‑कार्लो तकनीकें और अन्य अनुमानात्मक विधियाँ—भी तेज़ी से बेहतर हो रही हैं।
इसका मतलब है कि आज जो समस्या क्लासिकल कंप्यूटर के लिए असंभव लगती है, वह कल एक नए एल्गोरिद्म के कारण संभव हो सकती है। फ्लैटआयरन टीम का काम यही दिखाता है कि बाधा हमेशा हार्डवेयर की नहीं होती—कभी‑कभी बेहतर एल्गोरिद्म ही खेल बदल देते हैं।
इसी वजह से अब वैज्ञानिक क्वांटम एडवांटेज साबित करने के लिए और भी सख्त मानक अपनाने लगे हैं। आम तौर पर वे ऐसे कार्यों की तलाश करते हैं जहाँ:
यह घटना कंप्यूटेशनल विज्ञान की एक व्यापक सच्चाई को दर्शाती है: प्रगति अक्सर हार्डवेयर और एल्गोरिद्म—दोनों से आती है। क्वांटम प्रोसेसर तेजी से विकसित हो रहे हैं, लेकिन क्लासिकल कंप्यूटिंग की विधियाँ भी उतनी ही तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
अभी के लिए यह मुकाबला एक तरह की तकनीकी दौड़ बना हुआ है—जहाँ हर नया क्वांटम दावा अगली क्लासिकल एल्गोरिद्मिक खोज से चुनौती का सामना कर सकता है।
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