क्वांटम सुप्रीमेसी पर सवाल: क्लासिकल टेंसर‑नेटवर्क एल्गोरिद्म ने दोहराया D‑Wave का प्रयोग
भौतिकविदों ने दिखाया कि D‑Wave के 2025 के “क्वांटम सुप्रीमेसी” प्रयोग में इस्तेमाल क्वांटम‑एनीलिंग सिमुलेशन को क्लासिकल टेंसर‑नेटवर्क एल्गोरिद्म से भी दोहराया जा सकता है—कुछ मामलों में साधारण लैपटॉप पर भी। D‑Wave ने दावा किया था कि उसका Advantage2 क्वांटम एनीलर यह सिमुलेशन लगभग 20 मिनट में कर सकता है, जबकि क्लासिकल...
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भौतिकविदों ने दिखाया कि D‑Wave के 2025 के “क्वांटम सुप्रीमेसी” प्रयोग में इस्तेमाल क्वांटम‑एनीलिंग सिमुलेशन को क्लासिकल टेंसर‑नेटवर्क एल्गोरिद्म से भी दोहराया जा सकता है—कुछ मामलों में साधारण लैपटॉप पर भी।
D‑Wave ने दावा किया था कि उसका Advantage2 क्वांटम एनीलर यह सिमुलेशन लगभग 20 मिनट में कर सकता है, जबकि क्लासिकल सुपरकंप्यूटर को लगभग 10 लाख साल लगते।
नए नतीजे दिखाते हैं कि बेहतर क्लासिकल एल्गोरिद्म क्वांटम एडवांटेज के दावों को चुनौती दे सकते हैं और इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा लगातार बदलती रहती है।
How did physicists at the Flatiron Institute and Boston University show that a classical computer—even a laptop using tensor‑network algoritImproved tensor‑network algorithms allowed classical computers to simulate a quantum dynamics problem previously claimed to require a quantum annealer.
AI संकेत
Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How did physicists at the Flatiron Institute and Boston University show that a classical computer—even a laptop using tensor‑network algorit. Article summary: They showed it by building a better classical simulator for the same quantum-annealing dynamics problem, using 2D and 3D tensor networks whose structure matches the lattice and updating them with belief propagation so th. Topic tags: general, academic, news, general web, government. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "Physicists at the Center for Computational Quantum Physics (CCQ) at the Simons Foundation’s Flatiron Institute, in collaboration with Boston University, have developed a classical" source context "Flatiron Institute Tensor Network Algorithm Overturns Historical D-Wave Quantum Supremacy Claim - Quantum
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क्वांटम कंप्यूटिंग कंपनियाँ अक्सर तब बड़ी उपलब्धि का दावा करती हैं जब उनका हार्डवेयर ऐसे काम कर लेता है जिन्हें क्लासिकल कंप्यूटरों के लिए लगभग असंभव माना जाता है। लेकिन हाल ही में फ्लैटआयरन इंस्टीट्यूट और बोस्टन यूनिवर्सिटी के भौतिकविदों के एक अध्ययन ने दिखाया कि यह सीमा कितनी जल्दी बदल सकती है।
वैज्ञानिकों ने टेंसर‑नेटवर्क और belief propagation पर आधारित एक अधिक कुशल क्लासिकल सिमुलेशन विधि विकसित की। इस तकनीक से उन्होंने वही क्वांटम‑डायनेमिक्स समस्या दोबारा हल कर ली जिसे D‑Wave ने 2025 में अपने चर्चित “क्वांटम सुप्रीमेसी” दावे के लिए इस्तेमाल किया था। कुछ मामलों में यह सिमुलेशन इतना हल्का था कि इसे साधारण हार्डवेयर—यहाँ तक कि एक व्यक्तिगत लैपटॉप—पर भी चलाया जा सका।
मूल दावा: क्वांटम कंप्यूटर बनाम दस लाख साल का सुपरकंप्यूटर
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"क्वांटम सुप्रीमेसी पर सवाल: क्लासिकल टेंसर‑नेटवर्क एल्गोरिद्म ने दोहराया D‑Wave का प्रयोग" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
भौतिकविदों ने दिखाया कि D‑Wave के 2025 के “क्वांटम सुप्रीमेसी” प्रयोग में इस्तेमाल क्वांटम‑एनीलिंग सिमुलेशन को क्लासिकल टेंसर‑नेटवर्क एल्गोरिद्म से भी दोहराया जा सकता है—कुछ मामलों में साधारण लैपटॉप पर भी।
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
भौतिकविदों ने दिखाया कि D‑Wave के 2025 के “क्वांटम सुप्रीमेसी” प्रयोग में इस्तेमाल क्वांटम‑एनीलिंग सिमुलेशन को क्लासिकल टेंसर‑नेटवर्क एल्गोरिद्म से भी दोहराया जा सकता है—कुछ मामलों में साधारण लैपटॉप पर भी। D‑Wave ने दावा किया था कि उसका Advantage2 क्वांटम एनीलर यह सिमुलेशन लगभग 20 मिनट में कर सकता है, जबकि क्लासिकल सुपरकंप्यूटर को लगभग 10 लाख साल लगते।
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
नए नतीजे दिखाते हैं कि बेहतर क्लासिकल एल्गोरिद्म क्वांटम एडवांटेज के दावों को चुनौती दे सकते हैं और इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा लगातार बदलती रहती है।
मार्च 2025 में क्वांटम कंप्यूटिंग कंपनी D‑Wave ने अपने लगभग 5,000 क्यूबिट वाले Advantage2 सुपरकंडक्टिंग क्वांटम एनीलर के परिणाम प्रकाशित किए। कंपनी के अनुसार यह मशीन जटिल चुंबकीय पदार्थों (magnetic materials) के व्यवहार का सिमुलेशन करीब 20 मिनट से कम समय में कर सकती है।
कंपनी का अनुमान था कि वही गणना यदि पारंपरिक सुपरकंप्यूटर से की जाए तो उसे पूरा करने में लगभग 10 लाख साल लग सकते हैं।
यह समस्या अव्यवस्थित चुंबकीय प्रणालियों—खासकर Ising spin‑glass मॉडल—की क्वांटम डायनेमिक्स का अध्ययन करने से जुड़ी थी। ये मॉडल जाली (lattice) संरचनाओं में परस्पर क्रिया करने वाले स्पिनों का वर्णन करते हैं और सामग्री विज्ञान में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। D‑Wave और उसके सहयोगियों का कहना था कि मौजूदा क्लासिकल तकनीकें इतने बड़े सिस्टम को स्केल पर सिमुलेट नहीं कर पातीं, इसलिए इसे “beyond‑classical” गणना का उदाहरण बताया गया।
इसी तरह के दावों को आम तौर पर quantum supremacy या quantum advantage कहा जाता है—जब कोई क्वांटम डिवाइस ऐसा काम कर दे जिसे क्लासिकल कंप्यूटर व्यावहारिक समय में पूरा नहीं कर सकते।
क्लासिकल एल्गोरिद्म से मिला नया समाधान
फ्लैटआयरन–बोस्टन यूनिवर्सिटी की टीम ने उसी भौतिक समस्या को दोबारा परखा। सीधे पूरे क्वांटम स्टेट की गणना करने के बजाय—जो क्यूबिट बढ़ने के साथ घातीय रूप से जटिल हो जाती है—उन्होंने सिस्टम की गणितीय संरचना का फायदा उठाया।
उनकी विधि में कई तकनीकों का संयोजन था:
स्पिन सिस्टम की lattice संरचना को दर्शाने वाले दो‑आयामी और तीन‑आयामी टेंसर नेटवर्क
नेटवर्क को कुशलता से अपडेट करने के लिए belief propagation नामक message‑passing एल्गोरिद्म
ऐसी compression तकनीकें जो बढ़ती entanglement के बावजूद नेटवर्क को छोटा और प्रबंधनीय बनाए रखें
इस तरीके से एल्गोरिद्म को पूरे 5,000‑क्यूबिट वेवफंक्शन को स्पष्ट रूप से स्टोर करने की जरूरत नहीं पड़ी। इसके बजाय वह केवल सिस्टम की महत्वपूर्ण सहसंबंधों (correlations) को ट्रैक करता रहा—जिससे गणना की लागत बहुत कम हो गई, जबकि सटीकता बनी रही।
शोधकर्ताओं के अनुसार यह तरीका उसी क्वांटम‑एनीलिंग डायनेमिक्स को सटीक और कुशल तरीके से सिमुलेट कर सकता है जिसे पहले क्लासिकल कंप्यूटिंग की पहुंच से बाहर बताया गया था।
लैपटॉप पर सिमुलेशन कैसे संभव हुआ
टेंसर नेटवर्क का मूल विचार है क्वांटम स्टेट को संपीड़ित (compress) करना। किसी बड़े क्वांटम सिस्टम के सभी संभावित स्टेट्स को स्टोर करने के बजाय यह केवल उन पैटर्न और संबंधों को कैप्चर करता है जो वास्तव में सिस्टम में उत्पन्न होते हैं।
कई भौतिक प्रणालियों—खासकर नियमित lattice संरचना वाले सिस्टम—में entanglement सीमित तरीके से बढ़ती है। ऐसे मामलों में टेंसर‑नेटवर्क मॉडल अपेक्षाकृत कम पैरामीटर के साथ पूरे सिस्टम का अच्छा अनुमान दे सकते हैं।
फ्लैटआयरन अध्ययन में जब इन नेटवर्कों को belief propagation के साथ जोड़ा गया, तो कुछ सिमुलेशन इतने कुशल हो गए कि उन्हें बड़े सुपरकंप्यूटर की बजाय साधारण पर्सनल कंप्यूटर पर भी चलाया जा सकता था।
क्वांटम एडवांटेज के लिए इसका क्या मतलब है
यह परिणाम यह नहीं कहता कि क्वांटम कंप्यूटर बेकार हैं। बल्कि यह एक महत्वपूर्ण तथ्य को उजागर करता है: तुलना का मानक लगातार बदलता रहता है।
किसी भी “क्वांटम एडवांटेज” का दावा आम तौर पर उस समय उपलब्ध सबसे अच्छे क्लासिकल एल्गोरिद्म से तुलना करके किया जाता है। लेकिन क्लासिकल कंप्यूटिंग के एल्गोरिद्म—जैसे टेंसर नेटवर्क, मॉन्टे‑कार्लो तकनीकें और अन्य अनुमानात्मक विधियाँ—भी तेज़ी से बेहतर हो रही हैं।
इसका मतलब है कि आज जो समस्या क्लासिकल कंप्यूटर के लिए असंभव लगती है, वह कल एक नए एल्गोरिद्म के कारण संभव हो सकती है। फ्लैटआयरन टीम का काम यही दिखाता है कि बाधा हमेशा हार्डवेयर की नहीं होती—कभी‑कभी बेहतर एल्गोरिद्म ही खेल बदल देते हैं।
कंप्यूटिंग की चलती हुई दौड़
इसी वजह से अब वैज्ञानिक क्वांटम एडवांटेज साबित करने के लिए और भी सख्त मानक अपनाने लगे हैं। आम तौर पर वे ऐसे कार्यों की तलाश करते हैं जहाँ:
क्लासिकल एल्गोरिद्म के बहुत तेजी से बेहतर होने की संभावना कम हो
क्वांटम हार्डवेयर को स्पष्ट स्केलिंग लाभ मिले
परिणामों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जा सके
यह घटना कंप्यूटेशनल विज्ञान की एक व्यापक सच्चाई को दर्शाती है: प्रगति अक्सर हार्डवेयर और एल्गोरिद्म—दोनों से आती है। क्वांटम प्रोसेसर तेजी से विकसित हो रहे हैं, लेकिन क्लासिकल कंप्यूटिंग की विधियाँ भी उतनी ही तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
अभी के लिए यह मुकाबला एक तरह की तकनीकी दौड़ बना हुआ है—जहाँ हर नया क्वांटम दावा अगली क्लासिकल एल्गोरिद्मिक खोज से चुनौती का सामना कर सकता है।
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Quantum Dynamics Advance Overturns Claim of ‘Quantum Supremacy,’ Opens New Research Directions