मामलों की संख्या और महामारी के वास्तविक पैमाने को लेकर अनिश्चितता के कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मई 2026 में इसे Public Health Emergency of International Concern (PHEIC) घोषित कर दिया।
शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार मई के मध्य तक DRC में 246 संदिग्ध मामले और 80 मौतें दर्ज हुई थीं। बाद के आकलनों में संदिग्ध मामलों की संख्या सैकड़ों तक पहुँचने की आशंका जताई गई, हालांकि कई मामलों की पुष्टि अभी भी परीक्षण के अधीन है।
अक्सर लोग “ईबोला” को एक ही वायरस मानते हैं, लेकिन वास्तव में यह Orthoebolavirus परिवार के कई अलग‑अलग प्रकारों से हो सकता है।
आज जो ईबोला वैक्सीन लाइसेंस प्राप्त है—Ervebo—उसे विशेष रूप से Zaire ebolavirus के खिलाफ विकसित किया गया था, जो हाल के सबसे बड़े और घातक प्रकोपों का कारण रहा है।
लेकिन वर्तमान प्रकोप का कारण Bundibugyo ebolavirus है, जो आनुवंशिक रूप से अलग प्रजाति है। इसलिए Zaire स्ट्रेन के लिए बनाए गए वैक्सीन और एंटीबॉडी उपचार Bundibugyo वायरस पर प्रभावी साबित नहीं हुए हैं।
इसका मतलब यह नहीं है कि ईबोला वैक्सीन अचानक बेकार हो गई हैं—बल्कि समस्या यह है कि मौजूदा उपकरण दूसरे वायरस प्रकार के लिए बनाए गए थे।
क्योंकि Bundibugyo स्ट्रेन के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन नहीं है, इसलिए वैज्ञानिक अब इस वायरस के खिलाफ विशेष रूप से तैयार वैक्सीन उम्मीदवारों को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं।
यह उम्मीदवार recombinant vesicular stomatitis virus (rVSV) तकनीक पर आधारित है—यही प्लेटफॉर्म Zaire ईबोला वैक्सीन में भी इस्तेमाल हुआ था—लेकिन इसे Bundibugyo वायरस को लक्षित करने के लिए संशोधित किया गया है।
दूसरा उम्मीदवार ChAdOx1 वायरल‑वेक्टर प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जिसे यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड ने विकसित किया था। इसके उत्पादन में Serum Institute of India भी आपातकालीन ढांचे के तहत सहयोग कर रहा है।
WHO के अनुसार शुरुआती खुराकें 2–3 महीनों में तैयार हो सकती हैं, लेकिन व्यापक उपयोग से पहले पशु परीक्षण और अन्य अध्ययन अभी भी जरूरी हो सकते हैं।
इस संकट के जवाब में Coalition for Epidemic Preparedness Innovations (CEPI) ने कई वैश्विक संस्थाओं के साथ मिलकर काम शुरू किया है। इनमें शामिल हैं:
इन साझेदारियों के माध्यम से निम्न प्रयास किए जा रहे हैं:
दरअसल, कुछ तैयारी पहले से ही मौजूद थी। पहले के महामारी‑तैयारी कार्यक्रमों में CEPI, WHO और यूरोपीय संघ की Health Emergency Preparedness and Response Authority (HERA) जैसे संगठनों ने वैक्सीन परीक्षण ढांचे पर काम किया था।
CEPI की दीर्घकालिक रणनीति में एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है—“100 Days Mission”। इसका उद्देश्य है कि किसी नए रोगजनक की पहचान के बाद लगभग 100 दिनों के भीतर वैक्सीन उम्मीदवार विकसित कर लिया जाए।
Bundibugyo प्रकोप इस विचार की वास्तविक परीक्षा जैसा बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सक्रिय प्रकोप के दौरान तीन महीनों में पूरी तरह सुरक्षित और स्वीकृत वैक्सीन तैयार करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इसके अलावा कई व्यावहारिक बाधाएँ भी होती हैं, जैसे:
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार तीन मुख्य कारण हैं:
फिर भी वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों का कहना है कि यदि निगरानी और नियंत्रण उपाय सही ढंग से चलते रहे तो प्रभावित क्षेत्र के बाहर संक्रमण का जोखिम फिलहाल कम माना जाता है।
Bundibugyo प्रकोप एक बड़ी वास्तविकता को उजागर करता है: एक ही वायरस परिवार के अलग‑अलग प्रकारों के लिए अलग चिकित्सा समाधान चाहिए होते हैं।
दशकों की ईबोला रिसर्च और कुछ सफल वैक्सीन के बावजूद कई स्ट्रेन अभी भी पूरी तरह संरक्षित नहीं हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिक अब तेज वैक्सीन विकास प्रणाली और बेहतर महामारी तैयारी पर जोर दे रहे हैं।
नई वैक्सीन उम्मीदवार समय पर तैयार होंगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है—लेकिन इस दौड़ ने दुनिया को भविष्य की महामारियों के लिए तैयारी के तरीके पर फिर से सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।
Comments
0 comments