इस तकनीक का लक्ष्य क्वांटम कंप्यूटरों में होने वाली त्रुटियों (errors) को कम करना है। यदि यह सफल होती है तो बड़े पैमाने पर fault‑tolerant quantum computers बनाना आसान हो सकता है—जो क्वांटम कंप्यूटिंग की सबसे बड़ी तकनीकी चुनौतियों में से एक है।
फ्रांस की राष्ट्रीय रणनीति के तहत चल रहे PROQCIMA कार्यक्रम का लक्ष्य भी इसी दिशा में प्रगति करना है। इस पहल के तहत 2030 तक 128 लॉजिकल क्यूबिट वाला fault‑tolerant क्वांटम कंप्यूटर डेमो बनाना और बाद में 2048 लॉजिकल क्यूबिट सिस्टम विकसित करना लक्ष्य है।
इस कार्यक्रम में कई फ्रांसीसी हार्डवेयर स्टार्टअप शामिल हैं, जैसे:
लगभग इसी समय अमेरिका ने भी बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने CHIPS and Science Act के तहत नौ कंपनियों के लिए $2.013 अरब के संघीय प्रोत्साहन देने के लिए समझौता पत्र (letters of intent) जारी किए हैं।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य क्वांटम कंप्यूटिंग में अमेरिकी नेतृत्व को मजबूत करना और उससे जुड़ी घरेलू विनिर्माण क्षमता को बढ़ाना है।
रिपोर्टों के अनुसार इस कार्यक्रम से जुड़ी प्रमुख कंपनियों में शामिल हैं:
यह निवेश सिर्फ शोध तक सीमित नहीं है। इसका बड़ा हिस्सा क्वांटम हार्डवेयर, चिप निर्माण और आपूर्ति श्रृंखला तैयार करने पर केंद्रित है।
दोनों देशों की घोषणाएँ आकार में बड़ी हैं, लेकिन उनकी प्राथमिकताएँ थोड़ी अलग दिखती हैं।
अगर केवल क्वांटम हिस्से को देखें तो अमेरिका का निवेश फ्रांस के नए €1 अरब क्वांटम फंड से बड़ा है। लेकिन माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स को शामिल करने पर फ्रांस का कुल पैकेज आकार में काफी करीब पहुंच जाता है।
ये घोषणाएँ अलग‑थलग कदम नहीं हैं बल्कि बड़े राष्ट्रीय तकनीकी कार्यक्रमों का विस्तार हैं।
फ्रांस ने 2021 में €1.8 अरब की राष्ट्रीय क्वांटम रणनीति शुरू की थी, जिसका लक्ष्य देश को क्वांटम तकनीक के वैश्विक नेताओं में शामिल करना है।
इस रणनीति में कई क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है, जैसे:
अमेरिका में CHIPS and Science Act एक व्यापक कानून है जिसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर निर्माण को देश के भीतर बढ़ाना और उन्नत तकनीकों—जैसे क्वांटम कंप्यूटिंग—को समर्थन देना है।
इसके अलावा National Quantum Initiative जैसे कार्यक्रम भी विभिन्न सरकारी एजेंसियों, उद्योग और विश्वविद्यालयों के बीच अनुसंधान सहयोग को समन्वित करते हैं।
फ्रांस और अमेरिका की ये घोषणाएँ दिखाती हैं कि क्वांटम कंप्यूटिंग अब वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन चुकी है।
सरकारें इसे तीन बड़े कारणों से रणनीतिक मानती हैं:
इसी वजह से निवेश अब केवल विश्वविद्यालयों के शोध तक सीमित नहीं है। इसमें स्टार्टअप इकोसिस्टम, औद्योगिक उत्पादन, चिप निर्माण और पूरी तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला शामिल की जा रही है।
फ्रांस का नया निवेश और अमेरिका का CHIPS कार्यक्रम इस बात के ताजा उदाहरण हैं कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ भविष्य के क्वांटम कंप्यूटर बनाने की दौड़ में तेजी से संसाधन झोंक रही हैं।
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