EU का मानना है कि सेमीकंडक्टर आधुनिक अर्थव्यवस्था की बुनियादी तकनीक हैं—इनका उपयोग कारों, स्मार्टफोन, टेलीकॉम नेटवर्क, स्वास्थ्य उपकरण और AI सिस्टम तक में होता है।
यूरोपीय आयोग अब ऑटोमोबाइल कंपनियों से चिप सप्लाई में विविधता (supplier diversification) लाने के लिए कह रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, नए नियमों के तहत कुछ मामलों में कंपनियों को कम से कम दो अलग‑अलग सप्लायरों से चिप खरीदने की आवश्यकता हो सकती है।
इसके पीछे मुख्य वजहें हैं:
कार उद्योग में एक छोटी सी चिप की कमी भी पूरी असेंबली लाइन रोक सकती है। इसलिए EU अब पारंपरिक कम लागत वाली खरीद रणनीति की जगह जोखिम प्रबंधन आधारित सप्लाई रणनीति पर जोर दे रहा है।
2025 में डच सरकार ने सुरक्षा चिंताओं के कारण Nexperia नाम की सेमीकंडक्टर कंपनी में हस्तक्षेप किया। यह कंपनी तकनीकी रूप से नीदरलैंड्स में आधारित थी, लेकिन इसकी मूल कंपनी चीन से जुड़ी थी।
इस कदम के बाद स्थिति तेजी से भू‑राजनीतिक विवाद में बदल गई:
कई रिपोर्टों के अनुसार, यूरोप और अमेरिका की कार कंपनियों को कुछ ही हफ्तों में उत्पादन रुकने की आशंका होने लगी थी।
इस संकट ने एक बड़ी समस्या उजागर की: यूरोप की ऑटो इंडस्ट्री कुछ खास चिप निर्माताओं और वैश्विक सप्लाई पॉइंट्स पर अत्यधिक निर्भर है।
हालांकि अंतिम कानून अभी जारी नहीं हुआ है, लेकिन नीति चर्चाओं और रिपोर्टों में कुछ संभावित उपाय सामने आए हैं:
Chips Act II वास्तव में यूरोप की बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसे अक्सर “technological sovereignty” या “chip sovereignty” कहा जाता है। इसका मतलब है:
पहला Chips Act पहले ही यूरोप में सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए अरबों यूरो के निवेश को प्रोत्साहित कर चुका है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि Chips Act II अभी केवल प्रस्तावित नीति है और इसका अंतिम स्वरूप तय नहीं हुआ है।
यानी:
फिर भी Nexperia संकट के बाद यूरोप के नीति‑निर्माताओं के लिए संदेश साफ है: महत्वपूर्ण तकनीकों में एक ही सप्लायर पर अत्यधिक निर्भरता अब रणनीतिक जोखिम मानी जा रही है।
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