EU 2026 में प्रस्तावित Chips Act II के जरिए अपनी सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित और लचीला बनाना चाहता है। यूरोपीय आयोग कार कंपनियों को कुछ मामलों में कम से कम दो चिप सप्लायर रखने की शर्त लगा सकता है। 2025 के Nexperia संकट और चीन की निर्यात प्रतिक्रिया ने दिखाया कि यूरोप की ऑटो इंडस्ट्री कुछ सीमित सप्लायरों प...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What is the proposed EU Chips Act II, why is the European Commission planning to require automakers to diversify their semiconductor supplie. Article summary: The proposed EU Chips Act II appears to be the Commission’s planned 2026 follow-on to the 2023 Chips Act, aimed at tightening semiconductor supply-chain resilience and industrial policy rather than replacing the original. Topic tags: general. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "Under a forthcoming draft law expected to be unveiled next month, the European Commission will mandate that automotive manufacturers purchase chips from a minimum of two suppliers" source context "EU to Mandate Dual Chip Suppliers for Carmakers Under New ..." Reference image 2: visual subject "**The second pillar**of the European Chips Act w
यूरोपीय संघ (EU) अगले चरण की सेमीकंडक्टर रणनीति के रूप में EU Chips Act II लाने की तैयारी कर रहा है। यह 2023 में लागू हुए पहले European Chips Act का फॉलो‑अप होगा और इसका उद्देश्य यूरोप की चिप सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित, विविध और भू‑राजनीतिक जोखिमों से कम प्रभावित बनाना है।
यह कदम खास तौर पर इसलिए चर्चा में है क्योंकि हाल के वर्षों में कई घटनाओं—विशेषकर 2025 के Nexperia संकट—ने दिखाया कि यूरोप की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री कुछ गिने‑चुने चिप सप्लायरों पर अत्यधिक निर्भर है।
यूरोपीय आयोग ने 2026 में Chips Act II प्रस्ताव पेश करने की योजना बनाई है। यह नया कानून पूरी तरह से अलग ढांचा नहीं होगा, बल्कि 2023 के मूल Chips Act को अपडेट और मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है।
पहला Chips Act यूरोप की सेमीकंडक्टर क्षमता बढ़ाने के लिए बनाया गया था, जिसमें प्रमुख लक्ष्य शामिल थे:
EU का मानना है कि सेमीकंडक्टर आधुनिक अर्थव्यवस्था की बुनियादी तकनीक हैं—इनका उपयोग कारों, स्मार्टफोन, टेलीकॉम नेटवर्क, स्वास्थ्य उपकरण और AI सिस्टम तक में होता है।
यूरोपीय आयोग अब ऑटोमोबाइल कंपनियों से चिप सप्लाई में विविधता (supplier diversification) लाने के लिए कह रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, नए नियमों के तहत कुछ मामलों में कंपनियों को कम से कम दो अलग‑अलग सप्लायरों से चिप खरीदने की आवश्यकता हो सकती है।
इसके पीछे मुख्य वजहें हैं:
कार उद्योग में एक छोटी सी चिप की कमी भी पूरी असेंबली लाइन रोक सकती है। इसलिए EU अब पारंपरिक कम लागत वाली खरीद रणनीति की जगह जोखिम प्रबंधन आधारित सप्लाई रणनीति पर जोर दे रहा है।
2025 में डच सरकार ने सुरक्षा चिंताओं के कारण Nexperia नाम की सेमीकंडक्टर कंपनी में हस्तक्षेप किया। यह कंपनी तकनीकी रूप से नीदरलैंड्स में आधारित थी, लेकिन इसकी मूल कंपनी चीन से जुड़ी थी।
इस कदम के बाद स्थिति तेजी से भू‑राजनीतिक विवाद में बदल गई:
कई रिपोर्टों के अनुसार, यूरोप और अमेरिका की कार कंपनियों को कुछ ही हफ्तों में उत्पादन रुकने की आशंका होने लगी थी।
इस संकट ने एक बड़ी समस्या उजागर की: यूरोप की ऑटो इंडस्ट्री कुछ खास चिप निर्माताओं और वैश्विक सप्लाई पॉइंट्स पर अत्यधिक निर्भर है।
हालांकि अंतिम कानून अभी जारी नहीं हुआ है, लेकिन नीति चर्चाओं और रिपोर्टों में कुछ संभावित उपाय सामने आए हैं:
Chips Act II वास्तव में यूरोप की बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसे अक्सर “technological sovereignty” या “chip sovereignty” कहा जाता है। इसका मतलब है:
पहला Chips Act पहले ही यूरोप में सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए अरबों यूरो के निवेश को प्रोत्साहित कर चुका है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि Chips Act II अभी केवल प्रस्तावित नीति है और इसका अंतिम स्वरूप तय नहीं हुआ है।
यानी:
फिर भी Nexperia संकट के बाद यूरोप के नीति‑निर्माताओं के लिए संदेश साफ है: महत्वपूर्ण तकनीकों में एक ही सप्लायर पर अत्यधिक निर्भरता अब रणनीतिक जोखिम मानी जा रही है।
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EU 2026 में प्रस्तावित Chips Act II के जरिए अपनी सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित और लचीला बनाना चाहता है।
EU 2026 में प्रस्तावित Chips Act II के जरिए अपनी सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित और लचीला बनाना चाहता है। यूरोपीय आयोग कार कंपनियों को कुछ मामलों में कम से कम दो चिप सप्लायर रखने की शर्त लगा सकता है।
2025 के Nexperia संकट और चीन की निर्यात प्रतिक्रिया ने दिखाया कि यूरोप की ऑटो इंडस्ट्री कुछ सीमित सप्लायरों पर बहुत अधिक निर्भर है।