2026 में Efferon NEO को यूरोप में CE MDR प्रमाणन मिला, जिससे यह यूरोपीय मेडिकल डिवाइस रेगुलेशन के तहत नवजात और बच्चों में सेप्सिस के उपचार के लिए स्वीकृत शुरुआती हेमोएडसॉर्प्शन उपकरणों में से एक बन गया।
Efferon की तकनीक extracorporeal hemoperfusion नामक प्रक्रिया पर आधारित है। उपचार के दौरान मरीज का रक्त एक बाहरी सर्किट से होकर गुजरता है और एक विशेष कार्ट्रिज से होकर निकलता है, जिसके बाद रक्त वापस शरीर में भेज दिया जाता है।
कार्ट्रिज के अंदर विशेष पॉलीमर बीड्स (polymer beads) होते हैं जो surface‑modified hypercrosslinked polystyrene से बने होते हैं। इन्हें ऐसे डिजाइन किया गया है कि ये बैक्टीरिया द्वारा बनाए गए एंडोटॉक्सिन (lipopolysaccharides या LPS) को पकड़कर अपने साथ बाँध लें।
साथ ही ये बीड्स अन्य सूजन से जुड़े अणुओं—जैसे साइटोकाइन्स और damage‑associated molecular patterns—को भी सोख लेते हैं। इससे एक तरह का multimodal adsorption प्रभाव बनता है, जो संक्रमण के विषाक्त पदार्थों और शरीर की अत्यधिक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया दोनों को कम करने की कोशिश करता है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य है:
चूंकि यह तकनीक दवा देने के बजाय रक्त से हानिकारक अणुओं को हटाने पर आधारित है, इसलिए इसे आम तौर पर एंटीबायोटिक्स और अन्य आईसीयू उपचारों के साथ मिलाकर उपयोग किया जाता है।
सेप्टिक शॉक में एंडोटॉक्सिन हटाने वाली हेमोपर्फ्यूजन थेरेपी पर कई क्लिनिकल अध्ययन किए गए हैं।
एक बहु‑केंद्रित रैंडमाइज़्ड क्लिनिकल ट्रायल में Efferon LPS हेमोपर्फ्यूजन प्राप्त करने वाले मरीजों में एंडोटॉक्सिन गतिविधि में कमी देखी गई और कुछ महत्वपूर्ण क्लिनिकल संकेतकों—जैसे वासोप्रेसर की आवश्यकता और ऑर्गन‑फेल्योर स्कोर—में सुधार पाया गया, जब तुलना मानक उपचार से की गई।
हालांकि विशेषज्ञ अभी भी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि किस प्रकार के मरीजों को इस थेरेपी से सबसे अधिक लाभ मिल सकता है और उपचार कब शुरू करना सबसे प्रभावी होता है।
कंपनी और उसके वितरकों के अनुसार, हेमोएडसॉर्प्शन थेरेपी मरीजों को जल्दी स्थिर करने में मदद कर सकती है, जिससे कुछ मामलों में:
हालांकि स्वतंत्र अध्ययनों में आईसीयू‑दिनों या लागत बचत के लिए सार्वभौमिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए वास्तविक प्रभाव मरीज की स्थिति, उपचार के समय और अस्पताल के प्रोटोकॉल पर निर्भर कर सकता है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार Efferon की तकनीक का उपयोग अब तक 10,000 से अधिक गंभीर मरीजों के उपचार में किया जा चुका है।
कंपनी अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के माध्यम से कई क्षेत्रों में विस्तार कर रही है और नए बाजारों—जैसे ऑस्ट्रेलिया—में भी वितरण समझौते या नियामकीय स्वीकृतियां हासिल की हैं।
हालांकि अलग‑अलग देशों में अपनाने की गति अलग है, लेकिन गंभीर संक्रमणों के इलाज में extracorporeal blood purification तकनीकों पर वैश्विक स्तर पर शोध तेजी से बढ़ रहा है।
2026 में Efferon ने €2.5 मिलियन की सीड फंडिंग जुटाई, जिसका नेतृत्व जर्मनी, ऑस्ट्रिया और स्विट्ज़रलैंड (DACH क्षेत्र) के निजी निवेशकों ने किया।
कंपनी के अनुसार इस निवेश का उपयोग मुख्य रूप से इन उद्देश्यों के लिए किया जाएगा:
सेप्सिस को वैश्विक स्वास्थ्य के बड़े संकटों में से एक माना जाता है। अनुमान है कि दुनिया भर में हर साल लगभग 20–30 मिलियन मामले सामने आते हैं और यह आईसीयू में मृत्यु और अंग विफलता का प्रमुख कारण है।
एंटीबायोटिक्स और आधुनिक आईसीयू देखभाल के बावजूद मृत्यु दर अभी भी काफी अधिक है। इसी कारण शोधकर्ता ऐसे नए उपचार ढूंढ रहे हैं जो संक्रमण के साथ‑साथ शरीर की अनियंत्रित प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को भी नियंत्रित कर सकें।
Efferon की हेमोएडसॉर्प्शन तकनीक इसी विचार पर आधारित है—संक्रमण को सीधे मारने के बजाय शरीर में चल रही अत्यधिक सूजन को नियंत्रित करने की कोशिश।
आने वाले वर्षों में यह स्पष्ट होगा कि क्लिनिकल साक्ष्यों, नियामकीय स्वीकृतियों और चिकित्सा दिशानिर्देशों के आधार पर सेप्सिस के नियमित उपचार में इस प्रकार की तकनीकों की भूमिका कितनी बड़ी हो सकती है।
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