क्योंकि WASP‑94A b जैसे हॉट जुपिटर अक्सर टाइडली लॉक्ड होते हैं (यानी उनका एक ही हिस्सा हमेशा अपने तारे की ओर रहता है), इसलिए सुबह और शाम वाले हिस्सों में परिस्थितियाँ अलग‑अलग हो सकती हैं। तुलना करने पर पता चला कि सुबह का हिस्सा ठंडा और बादलों से ढका है, जबकि शाम का हिस्सा ज्यादा गर्म और साफ है।
यहाँ के बादल पानी के नहीं हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये मैग्नीशियम‑सिलिकेट कणों से बने होते हैं—यानी सूक्ष्म स्तर पर चट्टान या रेत जैसे कण।
पर्यवेक्षणों के आधार पर वैज्ञानिकों ने इस मौसम चक्र का एक संभावित क्रम प्रस्तावित किया है:
इसी कारण शाम के स्पेक्ट्रम में पानी की भाप जैसे अणुओं के संकेत ज्यादा स्पष्ट दिखाई देते हैं, क्योंकि बादल कम होने से वातावरण के गहरे हिस्सों तक झाँकना संभव हो जाता है।
हॉट जुपिटर अपने तारों के बेहद करीब होते हैं और वहाँ का तापमान अक्सर 1,000 °C से भी अधिक होता है। फिर भी बादल बन सकते हैं क्योंकि पूरे ग्रह पर तापमान एक जैसा नहीं होता।
मॉडलों के अनुसार:
इस तरह संघनन, हवा द्वारा परिवहन और वाष्पीकरण की प्रक्रिया मिलकर दिन‑रात का लगातार बादल चक्र बनाती है।
पहले के कई अध्ययनों में माना जाता था कि ग्रह के टर्मिनेटर पर वातावरण समान होता है। लेकिन टाइडली लॉक्ड ग्रहों के लिए यह मान्यता बहुत सरल साबित हुई।
सुबह और शाम के हिस्सों को अलग‑अलग देखने से वैज्ञानिकों ने मानो डेटा से “धुंध हटा दी”। साफ शाम वाले हिस्से ने वातावरण की रासायनिक संरचना—जैसे पानी की भाप—को अधिक सटीकता से पहचानने में मदद की।
यह तकनीक भविष्य में अन्य एक्सोप्लैनेट के वातावरण को समझने के लिए भी एक प्रभावी तरीका बन सकती है।
संभावना है कि WASP‑94A b अकेला ऐसा ग्रह नहीं है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि “सुबह बादल, शाम साफ” जैसा पैटर्न कई हॉट जुपिटर ग्रहों पर आम हो सकता है।
JWST के अन्य अध्ययनों में भी इसी तरह के संकेत मिले हैं। उदाहरण के लिए WASP‑39 b पर सुबह और शाम के वातावरण में अंतर देखा गया है, जबकि WASP‑17 b के वातावरण में क्वार्ट्ज जैसे खनिज कणों वाले बादलों के प्रमाण मिले हैं।
इन सभी खोजों से यह संकेत मिलता है कि अत्यधिक गर्म गैस दानव ग्रहों पर भी जटिल और सक्रिय मौसम प्रणालियाँ हो सकती हैं—जहाँ बादल पानी से नहीं, बल्कि चट्टान और खनिजों से बनते हैं।
Comments
0 comments