सरकार का उद्देश्य ताइवान को एशिया में एक “लोकतांत्रिक ड्रोन सप्लाई‑चेन” का केंद्र बनाना है, जिससे सहयोगी देशों के साथ सुरक्षित तकनीकी साझेदारी हो सके।
ताइवान की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी है कि ड्रोन निर्माण में चीन से जुड़े घटकों पर निर्भरता कम की जाए। इसके लिए देश में ही प्रमुख हिस्सों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जैसे:
इससे ताइवान उन देशों के लिए आकर्षक सप्लायर बन सकता है जो विश्वसनीय और गैर‑चीनी ड्रोन तकनीक चाहते हैं।
रक्षा क्षेत्र इस उद्योग के विस्तार का एक बड़ा चालक है। ताइवान की सेना 2026 और 2027 के बीच कुल 48,750 ड्रोन खरीदने की योजना बना रही है, जिसे हथियार अधिग्रहण ब्यूरो (Armaments Bureau) के माध्यम से लागू किया जाएगा।
इन ड्रोन का उपयोग आधुनिक युद्ध स्थितियों में किया जाएगा, जिनमें विशेष क्षमताएँ शामिल हैं:
यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर ड्रोन के इस्तेमाल ने यह दिखाया है कि निगरानी, टोही और सटीक हमलों में इनकी भूमिका तेजी से बढ़ रही है।
ताइवान की यह योजना उसके व्यापक टेक्नोलॉजी एजेंडा से भी जुड़ी हुई है। राष्ट्रपति लाई चिंग‑ते के प्रशासन ने सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सैन्य तकनीक, सुरक्षा प्रणालियाँ और अगली पीढ़ी की संचार तकनीक को भविष्य की आर्थिक वृद्धि के मुख्य उद्योगों के रूप में चिन्हित किया है।
ड्रोन में उन्नत चिप्स और एआई सॉफ्टवेयर का उपयोग करके ताइवान उच्च‑प्रदर्शन वाले UAV विकसित करने पर ध्यान दे सकता है, जिससे वह कम लागत वाले उपभोक्ता ड्रोन बाजार के बजाय प्रीमियम तकनीकी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा कर सके।
ताइवान वैश्विक बाजारों में प्रवेश के लिए प्रमाणन कार्यक्रमों और साझेदारियों पर भी काम कर रहा है।
एक महत्वपूर्ण कदम यह है कि ताइवान का इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट (ITRI) अमेरिकी नेतृत्व वाले Green UAS प्रमाणन कार्यक्रम का हिस्सा बन गया है—और अमेरिका के बाहर यह एकमात्र प्रमाणन साइट है।
यह कार्यक्रम ड्रोन के लिए साइबर सुरक्षा और भरोसेमंद सप्लाई‑चेन मानकों को सत्यापित करता है, जिससे सरकारी और कॉर्पोरेट खरीदारों के लिए ताइवान के उत्पाद अधिक स्वीकार्य हो सकते हैं।
हालाँकि रणनीति महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसमें राजनीतिक जोखिम भी हैं। रक्षा बजट को लेकर संसद में हुए विवाद के कारण प्रस्तावित विशेष रक्षा बजट में कुछ कटौती की गई, जिससे घरेलू ड्रोन खरीद कार्यक्रमों पर असर पड़ सकता है।
क्योंकि शुरुआती वर्षों में उद्योग के विस्तार के लिए सैन्य ऑर्डर महत्वपूर्ण हैं, इसलिए रक्षा खर्च में देरी या कमी से उत्पादन बढ़ाने की गति प्रभावित हो सकती है।
ताइवान की ड्रोन रणनीति केवल एक औद्योगिक नीति नहीं है; यह वैश्विक तकनीकी सप्लाई‑चेन में अपनी भूमिका मजबूत करने का प्रयास भी है।
यदि उत्पादन बढ़ाने, घरेलू घटक निर्माण और अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन की योजनाएँ सफल रहती हैं, तो ताइवान उन देशों के लिए एक महत्वपूर्ण ड्रोन आपूर्तिकर्ता बन सकता है जो सुरक्षित और चीन‑विकल्प तकनीक की तलाश में हैं—साथ ही यह उसकी अपनी रक्षा क्षमता को भी मजबूत करेगा।
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