फिर भी ताइवान हर साल लाखों टन सोयाबीन आयात करता है—मुख्य रूप से अमेरिका और ब्राज़ील से—इसलिए स्थानीय उत्पादन अभी एक छोटा लेकिन बढ़ता हुआ क्षेत्र है ।
ताइवान के कृषि अधिकारी स्थानीय सोयाबीन को केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं बल्कि पर्यावरणीय लाभों के कारण भी महत्वपूर्ण मानते हैं।
सोयाबीन अपेक्षाकृत सूखा‑सहिष्णु फसल है। इसके विकास काल में इसे आम तौर पर चावल की तुलना में केवल 30–40% पानी चाहिए। सावधानीपूर्वक सिंचाई प्रबंधन के साथ प्रति हेक्टेयर 5,000–7,000 टन तक पानी की बचत संभव है—जो पानी की कमी से जूझ रहे ताइवान जैसे द्वीपीय देश के लिए अहम है ।
सोयाबीन एक दलहनी फसल है। इसकी जड़ों में मौजूद बैक्टीरिया हवा से नाइट्रोजन पकड़कर मिट्टी में उपलब्ध करा सकते हैं। इस प्राकृतिक प्रक्रिया से रासायनिक नाइट्रोजन उर्वरक का उपयोग लगभग 20% तक कम हो सकता है, जिससे लागत घटती है और नाइट्रस ऑक्साइड जैसे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन भी कम होते हैं ।
ताइवान में इस्तेमाल होने वाली अधिकांश सोयाबीन समुद्री जहाज़ों से दूर देशों से आती है। इसके विपरीत स्थानीय सोयाबीन कम "फूड माइल्स" के कारण कम कार्बन उत्सर्जन पैदा करती है—खासकर जब इन्हें देश के भीतर ही प्रोसेस और बेचा जाता है ।
इन्हीं कारणों से नीति‑निर्माता सोयाबीन को लो‑कार्बन कृषि और टिकाऊ आहार की दिशा में एक महत्वपूर्ण फसल मानते हैं।
ताइवान के कृषि अनुसंधान केंद्रों ने स्थानीय जलवायु और खाद्य उद्योग की जरूरतों के अनुसार कई किस्में विकसित की हैं। इनके विकास में उच्च पैदावार, रोग प्रतिरोध, जलवायु सहनशीलता और बेहतर बीज गुणवत्ता पर जोर दिया गया है।
कुछ प्रमुख किस्में:
इसके अलावा शोधकर्ताओं ने बड़े दानों वाली काली सोयाबीन की किस्में Tainan No. 8 ("Heizhen") और No. 9 ("Heibao") भी विकसित की हैं, जिनमें बेहतर पैदावार और कीट‑रोग सहनशीलता देखी गई है । हाल ही में विकसित Taichung No. 1 नामक किस्म को शरदकालीन बुवाई और कम इनपुट वाली खेती के लिए तैयार किया गया है
।
हालाँकि खेती का क्षेत्र बढ़ रहा है, लेकिन घरेलू उत्पादन अभी भी आयात को प्रतिस्थापित करने के लिए बहुत कम है। फिर भी सरकार स्थानीय सोयाबीन को बढ़ावा देने के कई कारण बताती है।
1. नॉन‑GMO और ट्रेस करने योग्य सप्लाई
ताइवान में आयातित सोयाबीन का बड़ा हिस्सा जेनेटिकली मॉडिफाइड होता है, जबकि स्थानीय सोयाबीन आमतौर पर नॉन‑GMO होती हैं और उनकी आपूर्ति श्रृंखला को ट्रैक करना आसान होता है ।
2. ज्यादा ताज़ा खाद्य उत्पाद
स्थानीय स्तर पर उगाई गई सोयाबीन जल्दी प्रोसेसर और उपभोक्ताओं तक पहुँचती हैं, जिससे टोफू, सोया दूध और अन्य पारंपरिक खाद्य पदार्थ अधिक ताज़ा बनते हैं।
3. ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समर्थन
कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कार्यक्रमों के जरिए किसानों और खाद्य प्रोसेसर के बीच साझेदारी बनाई जा रही है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलता है।
4. पर्यावरणीय लाभ
कम परिवहन दूरी, कम पानी की जरूरत और कम उर्वरक उपयोग—ये सभी ताइवान के सतत कृषि और जलवायु लक्ष्यों में योगदान देते हैं ।
ताइवान का सोयाबीन क्षेत्र अभी छोटा है, लेकिन तेजी से बढ़ रहा है। केवल दस वर्षों में खेती का क्षेत्र पाँच गुना से अधिक बढ़ चुका है और नई स्थानीय किस्में किसानों के लिए बेहतर विकल्प बना रही हैं।
हालाँकि आयात अभी भी प्रमुख स्रोत बना रहेगा, ताइवान एक विशेषीकृत घरेलू सोयाबीन प्रणाली विकसित कर रहा है—जो टिकाऊ खेती, खाद्य गुणवत्ता और कम कार्बन वाले खाद्य उत्पादन पर केंद्रित है। यह दिखाता है कि स्थानीय उत्पादन का छोटा हिस्सा भी किसी देश की खाद्य सुरक्षा और जलवायु रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
Comments
0 comments