अधिकारियों का कहना है कि इस विस्तार से फुजैराह के माध्यम से निर्यात क्षमता लगभग दोगुनी हो सकती है। इसका मतलब यह होगा कि अधिक तेल सीधे ओमान की खाड़ी के रास्ते वैश्विक बाजारों तक भेजा जा सकेगा।
तेल निर्यात पर निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए यह लचीलापन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकीर्ण समुद्री मार्ग है जो फारस की खाड़ी को खुले समुद्र से जोड़ता है। दुनिया की बड़ी मात्रा में ऊर्जा आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है।
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के अनुसार 2024 में औसतन लगभग 20 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल इस जलडमरूमध्य से होकर गुज़रा — जो दुनिया की कुल पेट्रोलियम तरल खपत का लगभग 20% है और वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा बनाता है।
इसके अलावा, वैश्विक LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) व्यापार का लगभग पाँचवाँ हिस्सा भी इसी मार्ग से गुजरता है।
यही कारण है कि अगर इस रास्ते में कोई रुकावट आती है तो उसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहता — बल्कि तेल की कीमतों, शिपिंग लागत, बीमा दरों और वैश्विक सप्लाई चेन तक महसूस किया जाता है।
अल जाबेर ने चेतावनी दी कि अगर हॉर्मुज़ में बड़ा व्यवधान आता है तो उसके प्रभाव लंबे समय तक रह सकते हैं। उनके अनुसार किसी क्षेत्रीय संघर्ष के समाप्त होने के बाद भी वैश्विक तेल प्रवाह को पहले के स्तर के लगभग 80% तक लौटने में कम से कम चार महीने लग सकते हैं।
इस देरी के पीछे कई कारण होते हैं — जैसे टैंकरों की नई रूटिंग, बीमा कवर की बहाली, लॉजिस्टिक पुनर्संयोजन और बाजार स्थिरता की वापसी।
यूएई की यह परियोजना ऊर्जा उद्योग में बदलती सोच को भी दिखाती है। पहले ऊर्जा सुरक्षा का मतलब सिर्फ पर्याप्त उत्पादन और भंडार से था। अब ध्यान निर्यात मार्गों की विविधता और अवसंरचना की मजबूती पर है।
हाल के क्षेत्रीय तनाव और शिपिंग व्यवधानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर बहुत अधिक ऊर्जा एक ही संकीर्ण मार्ग से गुजरती है तो वैश्विक बाजार जोखिम में पड़ सकता है।
इसी वजह से खाड़ी क्षेत्र के कई ऊर्जा उत्पादक अब पाइपलाइन, वैकल्पिक बंदरगाह और अतिरिक्त भंडारण जैसी परियोजनाओं में निवेश कर रहे हैं ताकि भू-राजनीतिक संकट के समय भी ऊर्जा आपूर्ति जारी रह सके।
यूएई के लिए वेस्ट–ईस्ट पाइपलाइन सिर्फ एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं है — बल्कि यह दुनिया के सबसे संवेदनशील ऊर्जा कॉरिडोर में दीर्घकालिक भू‑राजनीतिक जोखिम के खिलाफ सुरक्षा कवच के रूप में देखी जा रही है।
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