उन्होंने दो प्रमुख कमजोरियों की ओर इशारा किया:
क्योंकि क्रिप्टो लेन‑देन सीमाओं से परे होते हैं और पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम से अलग भी चल सकते हैं, इसलिए किसी एक देश का ढीला नियम पूरे वैश्विक सिस्टम में कमजोर कड़ी बन सकता है।
मैक्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि क्रिप्टो और ब्लॉकचेन तकनीक केवल जोखिम ही नहीं लातीं। सही ढंग से विनियमित होने पर ये कई वैध और उपयोगी फायदे दे सकती हैं, जैसे:
दुनिया भर के नीति‑निर्माताओं के बीच यह सोच तेजी से उभर रही है कि नवाचार और सुरक्षा—दोनों के बीच संतुलन जरूरी है।
मैक्रों का मुख्य तर्क यह था कि क्रिप्टो बाज़ार स्वभाव से वैश्विक और सीमा‑पार हैं। इसलिए केवल राष्ट्रीय स्तर के नियम पर्याप्त नहीं होंगे।
उन्होंने देशों से आग्रह किया कि वे Financial Action Task Force (FATF) जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के माध्यम से नियमों को समन्वित करें। FATF एक वैश्विक निकाय है जो मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद की फंडिंग से लड़ने के लिए मानक तय करता है।
समान वैश्विक मानक होने से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि किसी एक देश की कमजोर निगरानी पूरी प्रणाली को प्रभावित न करे।
मैक्रों ने खास तौर पर उस जोखिम का जिक्र किया जिसमें कुछ देश जानबूझकर कम या ढीले क्रिप्टो नियम बनाकर व्यवसाय आकर्षित करने की कोशिश करते हैं।
ऐसे क्षेत्र धीरे‑धीरे रेगुलेटरी हैवन बन सकते हैं—जहाँ अपराधी या आतंकवादी फंड ट्रांसफर करके सख्त निगरानी से बचने की कोशिश करते हैं। मैक्रों ने चेताया कि अगर देशों ने ऐसे अनियंत्रित डिजिटल‑एसेट क्षेत्रों को बढ़ने दिया, तो वे अनजाने में आतंकवाद और संगठित अपराध की गतिविधियों को बढ़ावा दे सकते हैं।
पेरिस का यह सम्मेलन आतंकवाद की फंडिंग को रोकने के लिए वैश्विक सहयोग को मजबूत करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा था। इसमें खुफिया जानकारी साझा करने, वित्तीय निगरानी बढ़ाने और नई तकनीकों के लिए नियम विकसित करने पर जोर दिया गया।
मैक्रों का संदेश साफ था: डिजिटल एसेट्स वित्तीय नवाचार को आगे बढ़ा सकते हैं, लेकिन तभी जब उनके साथ वैश्विक स्तर पर मजबूत और समन्वित नियम भी विकसित किए जाएँ।
अन्यथा, वही तकनीक जो वित्तीय प्रणाली को तेज और खुला बनाती है, अवैध नेटवर्क के लिए दुनिया भर में पैसा ले जाने का नया रास्ता भी बन सकती है।
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