हॉक की चेतावनी वित्तीय दुनिया की एक पुरानी समस्या पर केंद्रित है—asset‑liability mismatch।
स्टेबलकॉइन धारक आमतौर पर दो चीज़ें चाहते हैं:
अगर स्टेबलकॉइन के रिज़र्व में ऐसी संपत्तियाँ हों जिनकी कीमत तेजी से बदल सकती है या जिन्हें तुरंत बेचना मुश्किल हो, तो बाज़ार में उथल‑पुथल के समय समस्या पैदा हो सकती है। ऐसे हालात में अगर बहुत से उपयोगकर्ता एक साथ अपने टोकन भुनाने लगें, तो जारीकर्ता को अपनी संपत्तियाँ जल्दी बेचनी पड़ सकती हैं—और संभव है कि कम कीमत पर। इससे स्टेबलकॉइन की स्थिरता पर भरोसा भी कमजोर पड़ सकता है।
हॉक की टिप्पणियाँ ऐसे समय आई हैं जब दुनिया भर में स्टेबलकॉइन पर नियम कड़े किए जा रहे हैं।
यूरोपीय संघ में Markets in Crypto‑Assets Regulation (MiCA) नाम का व्यापक नियामक ढांचा लागू किया गया है। यह नियम क्रिप्टो‑एसेट्स—खासकर स्टेबलकॉइन—के लिए पारदर्शिता, रिज़र्व प्रबंधन और उपभोक्ता सुरक्षा से जुड़े मानक तय करता है।
MiCA के तहत स्टेबलकॉइन को अलग‑अलग श्रेणियों में बांटा गया है, जैसे asset‑referenced tokens और e‑money tokens। जारीकर्ताओं को रिज़र्व बनाए रखने, प्राधिकरण लेने और यह बताने की आवश्यकता होती है कि उन रिज़र्व को कैसे प्रबंधित किया जा रहा है।
अमेरिका में भी इसी दिशा में कदम उठाए गए हैं। GENIUS Act, जिसे 2025 में कानून बनाया गया, भुगतान‑आधारित स्टेबलकॉइन जारीकर्ताओं को 1:1 रिज़र्व बैकिंग बनाए रखने के लिए बाध्य करता है—यानी हर टोकन के पीछे उच्च गुणवत्ता वाली तरल संपत्तियाँ जैसे अमेरिकी डॉलर या अल्पकालिक ट्रेज़री बॉन्ड होने चाहिए।
इसके साथ ही जारीकर्ताओं को अपने रिज़र्व की संरचना सार्वजनिक रूप से बतानी होती है और स्पष्ट रिडेम्प्शन नीतियाँ रखनी होती हैं।
हॉक की आलोचना एक व्यापक बहस को सामने लाती है: स्टेबलकॉइन वास्तव में क्या होने चाहिए?
अगर उन्हें डिजिटल नकद या भुगतान साधन के रूप में इस्तेमाल करना है, तो कई नीति‑निर्माताओं का मानना है कि उनके रिज़र्व को बैंक जमा या मनी‑मार्केट फंड की तरह अत्यधिक सुरक्षित और तरल होना चाहिए।
लेकिन यदि जारीकर्ता अधिक जटिल निवेश रणनीतियाँ अपनाते हैं ताकि अतिरिक्त रिटर्न हासिल किया जा सके, तो आलोचकों के अनुसार ये साधन स्थिर मुद्रा से कम और निवेश उत्पाद से ज्यादा लगने लगते हैं।
जैसे‑जैसे स्टेबलकॉइन का उपयोग वैश्विक भुगतान, क्रिप्टो ट्रेडिंग और DeFi में बढ़ रहा है, वैसे‑वैसे एक बुनियादी सवाल और महत्वपूर्ण होता जा रहा है: आखिर स्थिरता का वादा वास्तव में किस चीज़ पर आधारित है?
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