अगर इस रास्ते पर खतरा बढ़ता है, तो बाजार कई तरह के जोखिम प्रीमियम जोड़ने लगते हैं, जैसे:
क्योंकि तेल लगभग हर उद्योग का बुनियादी इनपुट है, इसकी कीमत बढ़ने से परिवहन, निर्माण और उपभोक्ता वस्तुओं की लागत भी जल्दी बढ़ जाती है।
लंबी अवधि की सरकारी बॉन्ड यील्ड इसलिए ऊपर जा रही हैं क्योंकि निवेशक भविष्य में ज्यादा महंगाई की संभावना देख रहे हैं।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों ने भी माना है कि मध्य‑पूर्व का संघर्ष महंगाई के अनुमान को जटिल बना रहा है। फेड की एफओएमसी बैठक के मिनट्स में कहा गया कि इस संघर्ष से ऊर्जा कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई और कई वित्तीय परिसंपत्तियों का पुनर्मूल्यांकन हुआ।
ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो ऊर्जा झटके महंगाई की उम्मीदों को तेजी से ऊपर ले जाते हैं। फेड के कई अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि ईंधन की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं, तो इसका असर सप्लाई चेन और व्यापक कीमतों पर पड़ सकता है।
बॉन्ड बाजार के लिए इसका मतलब दो चीजें हैं:
इसी कारण अमेरिका के ट्रेजरी बॉन्ड सहित कई विकसित देशों के सरकारी बॉन्ड की यील्ड ऊपर गई है।
शेयर बाजार फिलहाल दो विपरीत ताकतों के बीच फंसा हुआ है।
एक तरफ बढ़ती बॉन्ड यील्ड शेयरों के लिए नकारात्मक होती हैं—खासकर तेज़ी से बढ़ने वाली टेक कंपनियों के लिए—क्योंकि ऊंची ब्याज दरें भविष्य की कमाई के वर्तमान मूल्य को कम कर देती हैं। हाल के सत्रों में तेल कीमतों और बॉन्ड यील्ड के बढ़ने के साथ वैश्विक शेयरों में गिरावट देखी गई।
दूसरी तरफ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सेक्टर को लेकर मजबूत उम्मीदें बाजार को सहारा भी दे रही हैं।
इस संदर्भ में एनवीडिया निवेशकों का केंद्र बना हुआ है। कंपनी की कमाई को वैश्विक एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और सेमीकंडक्टर निवेश की मांग का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। कई बार भू‑राजनीतिक तनाव के बावजूद चिप कंपनियों में मजबूती ने बाजार की भावना को स्थिर किया है।
यानी बाजार में एक साथ दो कहानियां चल रही हैं—मैक्रो जोखिम और तकनीकी सेक्टर की आशावादिता।
तेल कीमतों में उछाल और आर्थिक वृद्धि को लेकर अनिश्चितता मिलकर एक और जोखिम पैदा करती है—स्टैगफ्लेशन।
स्टैगफ्लेशन वह स्थिति है जब महंगाई बढ़ती है लेकिन आर्थिक वृद्धि कमजोर पड़ जाती है। अगर ऊर्जा आपूर्ति में बाधा या शिपिंग जोखिम के कारण तेल लंबे समय तक महंगा रहता है, तो कुछ संभावनाएं बढ़ जाती हैं:
हालांकि यदि कूटनीतिक प्रगति होती है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है, तो तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट भी आ सकती है और महंगाई का दबाव कम हो सकता है।
चूंकि यह संघर्ष दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति लाइनों में से एक को सीधे प्रभावित करता है, इसलिए बाजार खबरों पर तुरंत प्रतिक्रिया दे रहे हैं। छोटी‑सी खबर भी कई एसेट क्लास में एक साथ हलचल पैदा कर सकती है।
इस समय निवेशक तीन प्रमुख संकेतकों पर सबसे ज्यादा नजर रख रहे हैं:
फिलहाल वैश्विक बाजार की कहानी भू‑राजनीतिक जोखिम और तकनीकी आशावाद के बीच संतुलन की है। अगर ऊर्जा झटका अस्थायी साबित होता है तो बाजार स्थिर हो सकते हैं। लेकिन यदि फारस की खाड़ी क्षेत्र में व्यवधान जारी रहता है, तो ऊंचे तेल दाम और बढ़ती बॉन्ड यील्ड वैश्विक वित्तीय बाजार की प्रमुख थीम बने रह सकते हैं।